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Published November 22, 2023
Updated November 22, 2023

Shaktipanchaksharastutih

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10वीं शताब्दी के कश्मीरी शैव दार्शनिक अभिनवगुप्त द्वारा रचित है।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र में देवी दुर्गा के पाँच अक्षरों वाले मंत्र "ॐ ह्रीं श्रीं" की स्तुति की गई है। यह मंत्र देवी दुर्गा के पाँच रूपों का प्रतीक है:

  • अक्षर ब्रह्मा के रूप का प्रतीक है।
  • ह्रीं अक्षर विष्णु के रूप का प्रतीक है।
  • श्रीं अक्षर शिव के रूप का प्रतीक है।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:

ॐ ह्रीं श्रीं त्रिगुणात्मिका देव्यै नमः ।

सर्वव्यापिनै च सर्वशक्तिसम्पन्नै ।

सर्वकामप्रदायिनि सर्वदुष्टनिवारिणि ।

सर्वस्वास्थ्यदायिनि सर्वसुखप्रदायिनि ।

Shaktipanchaksharastutih

अर्थ

ॐ ह्रीं श्रीं त्रिगुणात्मिका देवी को नमस्कार है ।

जो सर्वव्यापी हैं, सर्वशक्तिसम्पन्न हैं,

सर्वकामप्रदायिनी हैं, सर्वदुष्टनिवारिणी हैं,

सर्वस्वास्थ्यदायिनी हैं, सर्वसुखप्रदायिनी हैं ।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र का पाठ करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र मन को शांत करता है और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • यह मन को शांत करता है और चिंता, तनाव और भय को दूर करता है।
  • यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।
  • यह धन, समृद्धि और सफलता को आकर्षित करता है।
  • यह रोगों से बचाता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र का पाठ किसी भी समय और किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका पाठ करते समय मन को एकाग्र और शुद्ध रखना चाहिए।

शक्तिपञ्चाक्षरस्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और त्वरित तरीका है।

शङ्कराष्टकम् Shankarashtakam

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