वेणुगोपालस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति में लिखा गया है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के बालरूप की सुंदरता और लीलाओं का वर्णन करता है।
वेणुगोपालस्तोत्रम् का रचनाकार अज्ञात है, लेकिन यह माना जाता है कि यह स्तोत्र 15वीं शताब्दी में लिखा गया था। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है।
वेणुगोपालस्तोत्रम् की कुछ विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
venugopaalastotram
- स्तोत्र में भगवान कृष्ण के बालरूप की सुंदरता का अद्भुत वर्णन किया गया है।
- स्तोत्र में भगवान कृष्ण की लीलाओं का भी सुंदर वर्णन किया गया है।
- स्तोत्र में भगवान कृष्ण की भक्ति का महत्व बताया गया है।
वेणुगोपालस्तोत्रम् एक सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की भक्ति को बढ़ावा देता है।
वेणुगोपालस्तोत्रम् के कुछ श्लोक निम्नलिखित हैं:
- श्लोक 1:
वेणुं करे धृतं श्यामं गोपवेशधारिणम्। यशोदा सुतं कृष्णं वन्दे वन्दे गोपालम्।।
अर्थ:
जो श्याम वर्ण के हैं, वेणु हाथ में लिए हुए हैं और गोपवेश धारण किए हुए हैं, ऐसे यशोदा के पुत्र कृष्ण को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
- श्लोक 2:
गोपबालकैः परिवेष्टितं वृन्दावने वृन्दावनाधिपम्। मुरलीध्वनिप्रेरितं नृत्यन्तं वन्दे वन्दे गोपालम्।।
अर्थ:
जो गोपबालकों से घिरे हुए हैं, वृन्दावन में वृन्दावन के अधिपति हैं, और मुरली ध्वनि से प्रेरित होकर नृत्य कर रहे हैं, ऐसे कृष्ण को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
- श्लोक 3:
राधिका प्रियतमं कृष्णं वन्दे वन्दे गोपालम्। यं दृष्ट्वा राधिका हर्षवर्धनं भजति सर्वदा।।
अर्थ:
जो राधा की प्रियतम हैं, कृष्ण को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ। जिन्हें देखकर राधा हमेशा हर्षित रहती हैं।
वेणुगोपालस्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो भगवान कृष्ण की भक्ति को बढ़ावा देता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण उपासना का साधन है।
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