विष्णुस्तुति भगवान विष्णु की स्तुति करने वाला एक धार्मिक पाठ है। यह पाठ संस्कृत में लिखा गया है और इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन किया गया है।
विष्णुस्तुति के कई अलग-अलग रूप हैं। कुछ विष्णुस्तुति छोटी होती हैं और कुछ लंबी होती हैं। कुछ विष्णुस्तुति में केवल कुछ श्लोक होते हैं, जबकि कुछ में कई सौ श्लोक होते हैं।
विष्णुस्तुति का उद्देश्य भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना और उनकी भक्ति करना है। विष्णुस्तुति करने से भक्तों को मानसिक शांति और सुख प्राप्त होता है।
विष्णुस्तुति के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
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- श्री विष्णु स्तवनम्: यह विष्णुस्तुति का एक प्रसिद्ध रूप है। इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन किया गया है।
- नारायण स्तुति: यह विष्णुस्तुति का एक अन्य प्रसिद्ध रूप है। इसमें भगवान विष्णु के नारायण रूप की स्तुति की गई है।
- विष्णु सहस्रनाम: यह विष्णुस्तुति का एक विशेष रूप है। इसमें भगवान विष्णु के एक हजार नामों का उल्लेख किया गया है।
विष्णुस्तुति हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह पाठ भगवान विष्णु की भक्ति और उनके प्रति समर्पण को व्यक्त करता है।
विष्णुस्तुति के कुछ श्लोक निम्नलिखित हैं:
- श्लोक 1:
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वलौकेक नाथम्।।
अर्थ:
जो विश्व का आधार हैं, आकाश के समान नीले वर्ण के हैं, और प्रसन्न मुख वाले हैं, ऐसे सर्वलोकनाथ भगवान विष्णु का मैं ध्यान करता हूँ।
- श्लोक 2:
यत्ते पदं रजतगिरिं परिपृच्छति गन्धर्वेन्द्रः। यत्ते पदं शैलेन्द्रं परिपृच्छति नृपेन्द्रः। यत्ते पदं नदीनां तीरे तीर्थं परिपृच्छति। तं पदं शरणागतस्य देहि शरणं देव।
अर्थ:
जिस पद को गंधर्वराज रजतगिरि से पूछते हैं, जिस पद को नृपराज शैलेन्द्र से पूछते हैं, जिस पद को नदियों के तट पर तीर्थयात्री पूछते हैं, हे देव, उस पद को मुझे भी शरण में दीजिए।
- श्लोक 3:
त्वमेव माता च पिता च त्वमेव बन्धुश्च सखा। त्वमेव विद्या द्रव्यं च त्वमेव सर्वम् मम।
अर्थ:
आप ही मेरे माता-पिता हैं, आप ही मेरे भाई-बहन हैं, आप ही मेरे मित्र हैं। आप ही मेरे ज्ञान और धन हैं, आप ही मेरे लिए सब कुछ हैं।
विष्णुस्तुति एक शक्तिशाली धार्मिक पाठ है जो भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
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