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Published October 24, 2023
Updated October 24, 2023

वरदावल्लभसतोट्रम

वरदावल्लभसतोट्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की प्रशंसा में लिखा गया है। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों और गुणों की वर्णन है।

प्रथम श्लोक:

वरदावल्लभ मधुरसख मधुरवदन
मधुरलीलारत मधुरमनोज्ञ
मधुरवचन मधुरमूर्ति मधुरस्वभाव
मधुराधिप मधुरं नमो नमस्ते॥

अनुवाद:

हे वरदावल्लभ, हे मधुर मित्र, हे मधुरमुख, हे मधुरलीलारत, हे मधुरमनोज्ञ, हे मधुरवचन, हे मधुरमूर्ति, हे मधुरस्वभाव, हे मधुराधिप, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।

वारदावल्लभसतोट्रम का पाठ करने के लाभ:

  • यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र भक्ति और ध्यान को बढ़ावा देता है।
  • यह स्तोत्र ज्ञान और आत्म-ज्ञान को प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र जीवन में शांति और आनंद लाता है।

**वारदावल्लभसतोट्रम का पाठ करने का सबसे अच्छा समय सुबह जल्दी या रात को सोने से पहले है। इस स्तोत्र का पाठ करते समय, मन को भगवान कृष्ण के रूप और गुणों पर केंद्रित करना चाहिए।

चतुःशलोकी

चतुःशलोकी एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की प्रशंसा में लिखा गया है। यह स्तोत्र चार श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों और गुणों की वर्णन है।

प्रथम श्लोक:

कृष्ण कृष्ण मधुरवदन
वृन्दावन बिहारी
गोपियों के मनमोहक
वधूवल्लभ मधुर॥

अनुवाद:

हे कृष्ण, हे मधुरमुख, हे वृन्दावन बिहारी, हे गोपियों के मनमोहक वधूवल्लभ, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।

दूसरा श्लोक:

गोपियों के प्रेम में लीन
नंदलाल नंदलाल
तुम ही हो मेरे प्राण
तुम ही हो मेरे जीवन॥

अनुवाद:

हे गोपियों के प्रेम में लीन नंदलाल, तुम ही मेरे प्राण हो, तुम ही मेरे जीवन हो।

तीसरा श्लोक:

तुम ही हो मेरे ईश्वर
तुम ही हो मेरे गुरु
तुम ही हो मेरे प्रिय
तुम ही हो मेरे जीवन के आधार॥

अनुवाद:

तुम ही मेरे ईश्वर हो, तुम ही मेरे गुरु हो, तुम ही मेरे प्रिय हो, तुम ही मेरे जीवन के आधार हो।

चौथा श्लोक:

हे कृष्ण, मैं तुमसे प्रेम करता हूँ
तुम ही मेरे जीवन का उद्देश्य हो
मैं हमेशा तुम्हारी सेवा करूंगा
और तुम्हारे नाम का जयकार करूंगा॥

अनुवाद:

हे कृष्ण, मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, तुम ही मेरे जीवन का उद्देश्य हो। मैं हमेशा तुम्हारी सेवा करूंगा और तुम्हारे नाम का जयकार करूंगा।

चतुःशलोकी का पाठ करने के लाभ:

  • यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र भक्ति और ध्यान को बढ़ावा देता है।
  • यह स्तोत्र ज्ञान और आत्म-ज्ञान को प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र जीवन में शांति और आनंद लाता है।

**चतुःशलोकी का पाठ करने का सबसे अच्छा समय सुबह जल्दी या रात को सोने से पहले है। इस स्तोत्र का पाठ करते समय, मन को भगवान कृष्ण के रूप और गुणों पर केंद्रित करना चाहिए।

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