Ramanathashtakam 2
रामनाथाष्टकम् २ एक प्राचीन स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में विभाजित है। प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के एक विशेष रूप या गुण का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली तरीका है।
रामनाथाष्टकम् २ के रचयिता भद्रगिरी अच्युत दास जी हैं। उन्होंने इस स्तोत्र की रचना 18वीं शताब्दी में की थी।
रामनाथाष्टकम् २ के कुछ प्रमुख श्लोक और उनके अर्थ निम्नलिखित हैं:
पहला श्लोक
कोटी सूर्यसमानकान्ति सुशोभितानन मण्डलं कञ्जलोचनमद्भुतं सुरपुष्पहारमगोचरम् । क्षीरसागरमन्थनोत्कट घोरविषसंसेवितं रामनाथ विलोलताण्डव नर्तनप्रिय रक्ष माम् ॥ १॥
अर्थ:
कोटि सूर्यों के समान कांति से सुशोभित मुखमंडल, कमल के समान नेत्र, अद्भुत रूप, सुरों द्वारा अर्पित पुष्पहार, अगोचर; क्षीरसागर के मंथन से उत्पन्न घोर विष से संसेवित, रामनाथ, विलोलताण्डव नृत्यप्रिय, मुझे रक्ष।
Ramanathashtakam 2
दूसरा श्लोक
दक्षयागविघातकं शिवमीप्सितार्थप्रदायिनं भस्मरागविभूषितं नवबिल्वपत्रसमर्चितम् । देवतासुरवन्दिताङ्घ्रितरोरुहं परमेश्वरं रामनाथ विलोलताण्डव नर्तनप्रिय रक्ष माम् ॥ २॥
अर्थ:
दक्षयज्ञ का विघ्न करने वाले, शिव की इच्छितार्थ को प्रदान करने वाले, भस्म से विभूषित, नवीन बिल्वपत्रों से पूजित, देवता और असुरों द्वारा वंदित चरण कमलों पर विराजमान परमेश्वर, रामनाथ, विलोलताण्डव नृत्यप्रिय, मुझे रक्ष।
तीसरा श्लोक
नारदादिमुनीन्द्रगाथित रम्य पुण्यकथा नकम वेदगम्यमनामयं गजवक्त्रषण्मुखमण्डितम । लोचलत्रयमुग्रतेजसमुद्भवं त्रिपुरान्तकं रामनाथ विलोलताण्डव नर्तनप्रिय रक्ष माम् ॥ ३॥
अर्थ:
नारद आदि मुनिराजों द्वारा गाए गए, रम्य और पुण्य कथाओं से पूर्ण, वेद द्वारा गम्य, अनामय, गज के समान मुख और सिंह के समान मस्तक से सुशोभित, तीनों लोकों के तेज से उत्पन्न, त्रिपुरासुर का नाश करने वाले, रामनाथ, विलोलताण्डव नृत्यप्रिय, मुझे रक्ष।
रामनाथाष्टकम् २ एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को शांति, ज्ञान और मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
रामनाथाष्टकम् २ के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित हैं:
- यह स्तोत्र भगवान शिव के विभिन्न रूपों की स्तुति में रचित है।
- यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।
- यह स्तोत्र भगवान शिव के भक्तों को प्रेरित करता है।
रामनाथाष्टकम् २ एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत मूल्यवान है।
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