राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी के कवि और संत सूरदास द्वारा रचित है।
राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
raagaanaan shreekrshnachandrastavam
राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन
- प्रथम श्लोक: भगवान कृष्ण का वर्णन
राग आनंद भैरवी में श्रीकृष्णचंद्र स्तवन कृष्णचन्द्र श्याम सुन्दर, मोहन मुरारी। गोकुल-नंदन, नन्दलाल, वंशीधर, मुरलीधारी।।
अर्थात्:
श्याम सुंदर कृष्णचंद्र, मोहन मुरारी, गोकुल-नंदन, नन्दलाल, वंशीधर, मुरलीधारी।
- द्वितीय श्लोक: भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन
गोपियों के साथ रास रचाते, मथुरा में कंस को मारते। पाण्डवों का दुःख दूर करते, गीता का ज्ञान देते।।
अर्थात्:
गोपियों के साथ रास रचाते, मथुरा में कंस को मारते। पाण्डवों का दुःख दूर करते, गीता का ज्ञान देते।
- तृतीय श्लोक: भगवान कृष्ण की भक्ति का महत्व
श्रीकृष्ण की भक्ति से, मिलता है मोक्ष का मार्ग। हमें चाहिए श्रीकृष्ण की, सच्ची निष्ठा और श्रद्धा।।
अर्थात्:
श्रीकृष्ण की भक्ति से, मिलता है मोक्ष का मार्ग। हमें चाहिए श्रीकृष्ण की, सच्ची निष्ठा और श्रद्धा।
राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन एक सुंदर और प्रेरणादायक स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र सभी हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक आवश्यक पठन है।
राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:**
- यह स्तोत्र संस्कृत के आनंद भैरवी राग में रचित है।
- प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के एक अलग गुण या विशेषता का वर्णन किया गया है।
- यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की भक्ति के महत्व पर भी जोर देता है।
राग आनंद भैरवी श्रीकृष्णचंद्र स्तवन एक लोकप्रिय स्तोत्र है जो हिंदू धर्म में कई शताब्दियों से प्रचलित है। यह स्तोत्र मंदिरों, घरों, और अन्य धार्मिक स्थलों में गाया और पढ़ा जाता है।
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