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Published November 22, 2023
Updated November 22, 2023

Mrityrakshakarakam Kavacham

मृत्युरक्षाकरक कवच एक संस्कृत कवच है जो भगवान शिव की कृपा से मृत्यु से बचाव प्रदान करता है। यह कवच 10वीं शताब्दी के कश्मीरी शैव दार्शनिक अभिनवगुप्त द्वारा रचित है।

मृत्युरक्षाकरक कवच में भगवान शिव के कई रूपों का वर्णन किया गया है। इनमें भगवान शिव के निराकार, साकार और अर्धनारीश्वर रूप शामिल हैं।

मृत्युरक्षाकरक कवच के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:

नमस्ते त्रिपुरांतकाय नमस्ते त्रिशूलधारकाय ।

नमस्ते नीललोचनाय नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ १ ॥

सर्वत्र रक्षां कुरु सर्वसौख्यं प्रयच्छ मे ।

मृत्युं नाशय भक्तानां सर्वदा भक्तवत्सल ॥ २ ॥

अर्थ

हे त्रिपुरांतकारी! हे त्रिशूलधारी! हे नीलकंठ! आपको नमस्कार है, आपको नमस्कार है, आपको नमस्कार है ॥ १ ॥

सभी स्थानों पर मेरी रक्षा करो, मुझे सभी सुख प्रदान करो।

हे भक्तवत्सल! अपने भक्तों की मृत्यु को नष्ट करो, सदा ॥ २ ॥

Mrityrakshakarakam Kavacham

मृत्युरक्षाकरक कवच का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह कवच मन को शांत करता है और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।

मृत्युरक्षाकरक कवच के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • यह मन को शांत करता है और चिंता, तनाव और भय को दूर करता है।
  • यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।
  • यह धन, समृद्धि और सफलता को आकर्षित करता है।
  • यह रोगों से बचाता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

मृत्युरक्षाकरक कवच का पाठ किसी भी समय और किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका पाठ करते समय मन को एकाग्र और शुद्ध रखना चाहिए।

मृत्युरक्षाकरक कवच एक शक्तिशाली कवच है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और त्वरित तरीका है।

वेदोक्तानि एकादश शिवनामानि Vedoktani Ekaadash Shivnamani

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