Mrityunjaygarbhitastotram
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र मृत्युंजय स्तोत्र के आधार पर रचित है, लेकिन इसमें कुछ अतिरिक्त मंत्रों को शामिल किया गया है।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् की रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी। यह स्तोत्र पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में मिलता है।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का पाठ इस प्रकार है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
ॐ नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय।।
अमृतं तत्त्वं शिवम् सर्वभूतशरीरम। सर्वव्यापी शिवस्य नास्ति विना शिवोऽस्ति।।
सर्वप्राणिनां नाथो सर्वदेवानामपि। सर्वज्ञानमयः शिवः सर्वशक्तिमयः शिवः।।
सर्वत्र शिवो भासते सर्वत्र शिवो निवासते। सर्वत्र शिवो रमते सर्वत्र शिवो भवति।।
ॐ शांते शांते शांते।।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का अर्थ है:
"हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित और पोषक हैं। जैसे ककड़ी की डंठल से बंधे हुए ककड़ी का फल बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु से मुक्त हो जाएं, लेकिन अमरता न प्राप्त करें।"
"हम भगवान शिव को प्रणाम करते हैं। भगवान शिव ही अमृत हैं, वे ही समस्त प्राणियों के शरीर हैं। वे ही सर्वव्यापी हैं, उनसे परे कोई नहीं है।"
"वे ही समस्त प्राणियों के नाथ हैं, वे ही समस्त देवताओं के भी नाथ हैं। वे ही सर्वज्ञानमय हैं, वे ही सर्वशक्तिमय हैं।"
"वे ही सर्वत्र विद्यमान हैं, वे ही सर्वत्र निवास करते हैं। वे ही सर्वत्र रमते हैं, वे ही सर्वत्र बन जाते हैं।"
"ॐ शांति, शांति, शांति।"
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मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का जाप करने से भी कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सभी प्रकार के भय और परेशानियों से मुक्ति
- सभी प्रकार के पापों से मुक्ति
- सभी प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त करना
- मोक्ष की प्राप्ति
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का जाप करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- स्तोत्र का जाप एक पवित्र स्थान पर करें।
- स्तोत्र का जाप करते समय शुद्ध रहें।
- स्तोत्र का जाप एकाग्रचित होकर करें।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का जाप करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
- एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं।
- भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठें।
- स्तोत्र का जाप शुरू करें।
- स्तोत्र का जाप 108 बार या अपनी सुविधानुसार करें।
- स्तोत्र का जाप करने के बाद, भगवान शिव को धन्यवाद दें।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो सभी भक्तों के लिए लाभदायक है।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् और मृत्युंजय स्तोत्र में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
- मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् में मृत्युंजय स्तोत्र के अतिरिक्त कुछ अतिरिक्त मंत्र शामिल हैं।
- मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् में भगवान शिव की महिमा का और अधिक विस्तार से वर्णन किया गया है।
मृत्युंजयगर्भितस्तोत्रम् का जाप करने से भी मृत्युंजय स्तोत्र का जाप करने से प्राप्त होने वाले सभी लाभ प्राप्त होते हैं।
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