मंगलाचरणम् 2 एक संस्कृत श्लोक है जो भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है। यह श्लोक 12 अक्षरों का है और इसे "द्वादशाक्षरी मंगलाचरणम्" भी कहा जाता है।
मंगलाचरणम् 2 की रचना 12वीं शताब्दी के कवि जयदेव ने की थी। यह श्लोक "गीत गोविन्द" नामक ग्रन्थ में मिलता है।
मंगलाचरणम् 2 के कुछ महत्वपूर्ण अक्षर इस प्रकार हैं:
mangalaacharanam 2
- अक्षर 1:सु - सुख का प्रतीक
- अक्षर 2:ख - क्षेम का प्रतीक
- अक्षर 3:ल - लाभ का प्रतीक
- अक्षर 4:स - सिद्धि का प्रतीक
- अक्षर 5:त - त्रैलोक्य का प्रतीक
- अक्षर 6:व - वीरता का प्रतीक
- अक्षर 7:स - सर्वज्ञता का प्रतीक
- अक्षर 8:न - निष्ठा का प्रतीक
- अक्षर 9:म - मोक्ष का प्रतीक
- अक्षर 10:म - मंगल का प्रतीक
- अक्षर 11:न - नारायण का प्रतीक
- अक्षर 12:म - माधव का प्रतीक
मंगलाचरणम् 2 का अर्थ इस प्रकार है:
सुख, क्षेम, लाभ, सिद्धि, त्रैलोक्य, वीरता, सर्वज्ञता, निष्ठा, मोक्ष, मंगल, नारायण, माधव - ये सब भगवान विष्णु के गुण हैं। अतः, भगवान विष्णु की स्तुति करने से हमें सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
मंगलाचरणम् 2 एक सुंदर और भावपूर्ण श्लोक है जो भगवान विष्णु की महिमा को दर्शाता है। यह श्लोक भक्तों को भगवान विष्णु में भक्ति उत्पन्न करता है।
मंगलाचरणम् 2 का पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह श्लोक भक्तों को भगवान विष्णु के प्रति भक्ति उत्पन्न करता है और उन्हें भगवान विष्णु के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
मंगलाचरणम् 2 के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:
- यह श्लोक 12वीं शताब्दी के कवि जयदेव द्वारा रचित है।
- यह श्लोक 12 अक्षरों का है।
- यह श्लोक भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है।
- यह श्लोक भक्तों को भगवान विष्णु में भक्ति उत्पन्न करता है।
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