Brahmakritam Shivastotram
ब्रह्मकृता शिवस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र ब्रह्मा द्वारा रचित है।
स्तोत्र के 12 श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में 12 पद हैं। प्रत्येक पद में, ब्रह्मा भगवान शिव की एक विशेषता का वर्णन करते हैं।
उदाहरण के लिए, पहले श्लोक में, ब्रह्मा भगवान शिव को सृष्टि के रचयिता के रूप में वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान शिव ने सृष्टि की रचना की है। दूसरे श्लोक में, वे भगवान शिव को संहारक के रूप में वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान शिव सृष्टि का संहार भी करते हैं।
स्तोत्र के अंत में, ब्रह्मा कहते हैं कि जो कोई भी इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
स्तोत्र का हिंदी अनुवाद:
श्लोक 1
ब्रह्मा ने कहा, "हे शिव, तुम ही सृष्टि के रचयिता हो। तुमने सृष्टि की रचना की है। तुम ही ब्रह्मांड के स्वामी हो।"
श्लोक 2
"हे शिव, तुम ही संहारक हो। तुमने सृष्टि का संहार भी किया है। तुम ही सभी प्राणियों के पिता हो।"
श्लोक 3
"हे शिव, तुम ही पालनहार हो। तुमने सृष्टि का पालन भी किया है। तुम ही सभी प्राणियों के रक्षक हो।"
श्लोक 4
"हे शिव, तुम ही सर्वशक्तिमान हो। तुम सब कुछ कर सकते हो। तुम ही सभी प्राणियों के स्वामी हो।"
श्लोक 5
"हे शिव, तुम ही सर्वज्ञ हो। तुम सब कुछ जानते हो। तुम ही सभी प्राणियों के ज्ञान के दाता हो।"
श्लोक 6
Brahmakritam Shivastotram
"हे शिव, तुम ही सर्वव्यापी हो। तुम सर्वत्र व्याप्त हो। तुम ही सभी प्राणियों के हृदयों में निवास करते हो।"
श्लोक 7
"हे शिव, तुम ही सर्वकल्याणकारी हो। तुम सभी प्रकार की सुखों का प्रदान करने वाले हो। तुम ही सभी प्राणियों के कष्टों को दूर करने वाले हो।"
श्लोक 8
"हे शिव, तुम ही सर्वरक्षक हो। तुम सभी प्राणियों की रक्षा करने वाले हो। तुम ही सभी प्राणियों के मार्गदर्शक हो।"
श्लोक 9
"हे शिव, तुम ही सर्वपापनाशक हो। तुम सभी पापों का नाश करने वाले हो। तुम ही सभी प्राणियों को मोक्ष प्रदान करने वाले हो।"
श्लोक 10
"हे शिव, तुम ही सर्वमंगलप्रद हो। तुम सभी प्रकार की मंगलों का प्रदान करने वाले हो। तुम ही सभी प्राणियों के सुख और समृद्धि के दाता हो।"
श्लोक 11
"हे शिव, जो कोई भी तुम्हारी भक्ति करता है, उसे सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। वह सभी प्रकार के दुखों से मुक्त हो जाता है और उसे सभी प्रकार की सुख और मंगल प्राप्त होते हैं।"
श्लोक 12
"हे शिव, मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ कि तुम मुझे अपनी कृपा प्रदान करो।"
कुछ विशेष टिप्पणियां:
- ब्रह्मकृता शिवस्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण धार्मिक पाठ है जो भगवान शिव की महिमा और शक्ति को दर्शाता है।
- यह स्तोत्र शिव भक्तों के बीच लोकप्रिय है और इसका पाठ अक्सर मंदिरों और घरों में किया जाता है।
- स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सकती है।
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