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Published October 30, 2023
Updated July 29, 2024

नामरत्नाख्यस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17 वीं शताब्दी के वैष्णव संत और दार्शनिक श्रीरघुनाथजी द्वारा लिखा गया था।

स्तोत्र का प्रारंभ भगवान श्रीकृष्ण के नामों की महिमा के वर्णन से होता है। स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण के नामों को रत्नों के रूप में बताया गया है, जो भक्तों के जीवन को आनंद और समृद्धि से भर देते हैं।

नामरत्नाख्यस्तोत्रम् का पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को बढ़ावा देता है।

नामरत्नाख्यस्तोत्रम् के 108 श्लोक इस प्रकार हैं:

naamaratnaakhyastotram

1. नमस्ते विट्ठलाय नमः कृपासिंधवे नमः । भक्तवश्याय नमः अतिसुंदराय नमः ॥ १ ॥

अर्थ:

हे विट्ठल! आपको मेरा नमस्कार है। हे कृपा के सागर! आपको मेरा नमस्कार है। हे भक्तों के वश में! आपको मेरा नमस्कार है। हे अति सुंदर! आपको मेरा नमस्कार है।

2. नमस्ते कृष्णाय नमः माधवाय नमः । गोविंदाय नमः गोपालाय नमः ॥ २ ॥

अर्थ:

हे कृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है। हे माधव! आपको मेरा नमस्कार है। हे गोविंद! आपको मेरा नमस्कार है। हे गोपाल! आपको मेरा नमस्कार है।

3. नमस्ते बालकृष्णाय नमः वासुदेवाय नमः । नारायणाय नमः मधुसूदनाय नमः ॥ ३ ॥

अर्थ:

हे बालकृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है। हे वासुदेव! आपको मेरा नमस्कार है। हे नारायण! आपको मेरा नमस्कार है। हे मधुसूदन! आपको मेरा नमस्कार है।

4. नमस्ते केशवाय नमः पद्मनाभय नमः । दामोदराय नमः संकर्षणाय नमः ॥ ४ ॥

अर्थ:

हे केशव! आपको मेरा नमस्कार है। हे पद्मनाभ! आपको मेरा नमस्कार है। हे दामोदर! आपको मेरा नमस्कार है। हे संकर्षण! आपको मेरा नमस्कार है।

5. नमस्ते हृषीकेशाय नमः अर्जुनवल्लभाय नमः । अष्टांगविद्याप्रदाय कृष्णाय नमः ॥ ५ ॥

अर्थ:

हे हृषीकेश! आपको मेरा नमस्कार है। हे अर्जुनवल्लभ! आपको मेरा नमस्कार है। हे अष्टांगविद्याप्रदा! हे कृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है।

6. नमस्ते श्रीकृष्णाय नमः चतुर्भुजाय नमः । पाण्डववल्लभाय कृष्णाय नमः ॥ ६ ॥

अर्थ:

हे श्रीकृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है। हे चतुर्भुज! आपको मेरा नमस्कार है। हे पाण्डववल्लभ! हे कृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है।

7. नमस्ते द्वारकाधीशाय नमः रणधीराय नमः । धर्मराजाय कृष्णाय नमः ॥ ७ ॥

अर्थ:

हे द्वारकाधीश! आपको मेरा नमस्कार है। हे रणधीर! आपको मेरा नमस्कार है। हे धर्मराज! हे कृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है।

8. नमस्ते सर्वाधाराय नमः सर्वलोकनमस्कारे । सर्वेश्वराय कृष्णाय नमः ॥ ८ ॥

अर्थ:

हे सर्वाधार! आपको मेरा नमस्कार है। आपको सभी लोकों में नमस्कार है। हे सर्वेश्वर! हे कृष्ण! आपको मेरा नमस्कार है।

नामरत्नाख्यस्तोत्रम् एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है।

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