नामयुगलाशतकम एक संस्कृत भजन है जो भगवान कृष्ण और राधा के नामों की महिमा का वर्णन करता है। यह भजन 16वीं शताब्दी के वैष्णव संत और कवि वल्लभाचार्य द्वारा लिखा गया था।
नामयुगलाशतकम के दस श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण और राधा के नामों के एक अलग पहलू का वर्णन किया गया है।
नामयुगलाशतकम का पहला श्लोक इस प्रकार है:
कृष्णस्य नामे राधा, राधानाम कृष्णे स्थिते। तयोः नामे द्वये, सर्वं रहस्यं समुच्छितम्।
इस श्लोक में, वल्लभाचार्य कहते हैं कि भगवान कृष्ण और राधा के नाम एक ही हैं। कृष्ण का नाम राधा में समाहित है, और राधा का नाम कृष्ण में समाहित है। इसलिए, भगवान कृष्ण और राधा के नामों में ही सभी रहस्य समाहित हैं।
नामयुगलाशतकम के सभी दस श्लोकों का अर्थ है:
- श्लोक 1: भगवान कृष्ण और राधा के नाम एक ही हैं।
- श्लोक 2: भगवान कृष्ण और राधा के नामों में ही सभी रहस्य समाहित हैं।
- श्लोक 3: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से मोक्ष प्राप्त होता है।
- श्लोक 4: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं।
- श्लोक 5: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों को प्रेम और भक्ति की प्राप्ति होती है।
- श्लोक 6: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है।
- श्लोक 7: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों को मोक्ष प्राप्त होता है।
- श्लोक 8: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों को भगवान के साथ एकता प्राप्त होती है।
- श्लोक 9: भगवान कृष्ण और राधा के नामों का जाप करने से भक्तों को सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
नामयुगलाशतकम एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में भगवान कृष्ण और राधा के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन भगवान कृष्ण और राधा के नामों की महिमा को दर्शाता है।
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