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Published November 25, 2023
Updated November 25, 2023

देवाइक्र्ता शंखराष्टुतयः संस्कृत भाषा में एक श्लोक है, जिसकी रचना 12वीं शताब्दी के भक्तिकाल के कवि नंददास ने की थी। यह श्लोक शिव की महिमा का वर्णन करता है।

श्लोक के अनुसार, शिव को देवताओं द्वारा शंख बजाकर स्तुति की गई थी। शिव की महिमा इतनी बड़ी है कि उनके दर्शन मात्र से ही सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

श्लोक के 16 चरणों हैं, और इसका अर्थ इस प्रकार है:

devaihkrta shankarastutih

श्लोक:

देवैः कृता शंखराष्टुतया त्रिशूलधरा धराधिपते त्रिनेत्रा त्रिलोचन भगवन् त्रिजगतां नाथ नमोऽस्तु ते।

अर्थ:

देवताओं द्वारा शंख बजाकर स्तुति की गई हे त्रिशूलधारी, पृथ्वी के स्वामी हे तीन नेत्रों वाले, तीन नेत्रों वाले भगवान हे तीनों लोकों के नाथ, आपको नमस्कार है।

स्पष्टीकरण:

देवैः कृता शंखराष्टुतया - देवताओं द्वारा शंख बजाकर स्तुति की गई। त्रिशूलधरा धराधिपते - हे त्रिशूलधारी, पृथ्वी के स्वामी। त्रिनेत्रा त्रिलोचन भगवन् - हे तीन नेत्रों वाले, तीन नेत्रों वाले भगवान। त्रिजगतां नाथ नमोऽस्तु ते - हे तीनों लोकों के नाथ, आपको नमस्कार है।

देवाइक्र्ता शंखराष्टुतयः एक महत्वपूर्ण श्लोक है, जो शिव की महिमा का अनुभव कराता है। यह श्लोक हमें यह भी सिखाता है कि शिव की भक्ति करने से हमें सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

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