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Published November 10, 2023
Updated November 10, 2023

Trimurti Stuti:

त्रिमूर्ति स्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं, ब्रह्मा, विष्णु और शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र शिव पुराण में वर्णित है।

त्रिमूर्ति शब्द का अर्थ है "तीन रूप"। यह स्तोत्र ब्रह्मा, विष्णु और शिव को ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में वर्णित करता है।

स्तोत्र का हिंदी अनुवाद:

श्लोक 1

स्तोत्रकार कहते हैं, "मैं ब्रह्मा, विष्णु और शिव की स्तुति करता हूं। वे तीनों देवता ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं।"

श्लोक 2

"हे ब्रह्मा, तुम ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता हो। तुमने ब्रह्मांड की रचना की है।"

श्लोक 3

"हे विष्णु, तुम ब्रह्मांड के पालनकर्ता हो। तुम ब्रह्मांड की रक्षा करते हो।"

श्लोक 4

"हे शिव, तुम ब्रह्मांड के संहारकर्ता हो। तुम ब्रह्मांड का अंत करते हो।"

श्लोक 5

"हे ब्रह्मा, तुम सर्वशक्तिमान हो। तुम सभी प्रकार की शक्तियों से संपन्न हो।"

श्लोक 6

"हे विष्णु, तुम सर्वव्यापी हो। तुम सर्वत्र व्याप्त हो।"

श्लोक 7

"हे शिव, तुम सर्वज्ञ हो। तुम सब कुछ जानते हो।"

Trimurti Stuti:

श्लोक 8

"हे ब्रह्मा, तुम सर्वकल्याणकारी हो। तुम सभी प्रकार की सुखों का प्रदान करने वाले हो।"

श्लोक 9

"हे विष्णु, तुम सर्वरक्षक हो। तुम सभी प्राणियों की रक्षा करने वाले हो।"

श्लोक 10

"हे शिव, तुम सर्वशत्रुविनाशक हो। तुम सभी दुष्टों का नाश करने वाले हो।"

श्लोक 11

"हे ब्रह्मा, तुम मोक्षप्रद हो। तुम सभी प्राणियों को मोक्ष प्रदान करने वाले हो।"

श्लोक 12

"हे विष्णु, तुम मोक्षप्रद हो। तुम सभी प्राणियों को मोक्ष प्रदान करने वाले हो।"

श्लोक 13

"हे शिव, तुम मोक्षप्रद हो। तुम सभी प्राणियों को मोक्ष प्रदान करने वाले हो।"

कुछ विशेष टिप्पणियां:

  • त्रिमूर्ति स्तुति एक महत्वपूर्ण धार्मिक पाठ है जो हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं की महिमा और शक्ति को दर्शाता है।
  • यह स्तोत्र हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय है और इसका पाठ अक्सर मंदिरों और घरों में किया जाता है।
  • स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को तीनों देवताओं की कृपा प्राप्त हो सकती है।

त्रिमूर्ति हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह अवधारणा बताती है कि ब्रह्मांड के सृष्टि, पालन और संहार के लिए तीन देवता जिम्मेदार हैं। यह अवधारणा हिंदू धर्म के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो ब्रह्मांड को एक जटिल और समन्वित व्यवस्था के रूप में देखती है।

दक्षिणामूर्तिस्तोत्रं सूतसंहिता Dakshinamurthy Stotram Sutasamhita

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