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Published October 25, 2023
Updated October 25, 2023

त्रिभंगिपंचाकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के पांच रूपों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र पांच श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक में एक रूप का वर्णन है।

स्तोत्र का पहला श्लोक भगवान शिव के त्रिभंग रूप का वर्णन करता है:

त्रिभंग पदं त्रिलोचनं त्रिशूलधृक् सर्वाधारम्। त्रिभुवननाथं शंभुं भजे त्रिभंगिं शिवं हरिं॥

इस श्लोक का अर्थ है:

मैं उस त्रिभंग शिव को नमस्कार करता हूं, जिसके तीन पैर हैं, तीन आंखें हैं, और जो त्रिशूल धारण करते हैं। वे सभी जीवों का आधार हैं, और वे ब्रह्मांड के स्वामी हैं।

स्तोत्र का दूसरा श्लोक भगवान शिव के नटराज रूप का वर्णन करता है:

नटराजं शशिशेखरं नीलकंठं त्रिनेत्रम्। त्रिपुरांतकं भजे शिवं नृत्यरूपं हरिं॥

इस श्लोक का अर्थ है:

मैं उस नटराज शिव को नमस्कार करता हूं, जिनके सिर पर चंद्रमा है, जिनकी गर्दन नीली है, और जिनके तीन नेत्र हैं। वे त्रिपुरासुर के संहारकर्ता हैं, और वे नृत्य के रूप में शिव हैं।

स्तोत्र का तीसरा श्लोक भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप का वर्णन करता है:

अर्धनारीश्वरं भजे शिवं शंकरं हरिं। पुरुषं स्त्रियं समं शिवं अर्धनारीश्वरं॥

इस श्लोक का अर्थ है:

मैं उस अर्धनारीश्वर शिव को नमस्कार करता हूं, जो शिव और शक्ति का एक रूप हैं। वे पुरुष और महिला दोनों हैं, और वे शिव के अर्धनारीश्वर रूप हैं।

स्तोत्र का चौथा श्लोक भगवान शिव के लिंग रूप का वर्णन करता है:

लिंग रूपं भजे शिवं शंकरं हरिं। योनिं लिंगं समं शिवं लिंगरूपं हरिं॥

इस श्लोक का अर्थ है:

मैं उस लिंग शिव को नमस्कार करता हूं, जो शिव और शक्ति का एक रूप हैं। वे योनि और लिंग दोनों हैं, और वे लिंग रूप शिव हैं।

स्तोत्र का पांचवां श्लोक भगवान शिव के शिवलिंग रूप का वर्णन करता है:

शिवलिंगं भजे शिवं शंकरं हरिं। लिंगं शिवं परमं शिवं शिवलिंगं हरिं॥

इस श्लोक का अर्थ है:

मैं उस शिवलिंग शिव को नमस्कार करता हूं, जो शिव का सबसे पवित्र रूप है। वे शिव हैं, और वे शिवलिंग हैं।

त्रिभंगिपंचाकम एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति गहरा प्रेम और भक्ति विकसित करने में मदद करता है।

त्रिभंगिपंचाकम के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • यह स्तोत्र भगवान शिव के पांच रूपों की स्तुति करता है।
  • यह स्तोत्र पांच श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक में एक रूप का वर्णन है।
  • यह स्तोत्र भगवान शिव के त्रिभंग, नटराज, अर्धनारीश्वर, लिंग और शिवलिंग रूपों का वर्णन करता है।

त्रिभंगिपंचाकम एक बहुत ही महत्वपूर्ण और लोकप्रिय स्तोत्र है। यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए पढ़ने और ध्यान करने के लिए उपयुक्त है।

त्रिभङ्गीपञ्चकम् tribhangipanchakam

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