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Published November 4, 2023
Updated July 29, 2024

Ishwarprathna Stotram

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् एक प्रसिद्ध स्तोत्र है जो भगवान शिव की प्रार्थना करती है। यह स्तोत्र स्वामी श्री योगानंद द्वारा रचित है।

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ इस प्रकार है:

श्लोक 1

ईश्वरं शरणं गच्छामि, क्रोधादिपीडितं दीनं। अनाथं पतितं चैव, प्रार्थितं शरणं गच्छामि।

अर्थ:

मैं ईश्वर की शरण जाता हूं, जो क्रोध आदि पीड़ाओं से पीड़ित दीन हैं। मैं अनाथ, पतित और प्रार्थित की भी शरण जाता हूं।

श्लोक 2

अज्ञानं मोहं द्वेषं च, मोक्षार्थं त्वां प्रपद्ये। अज्ञानस्य निवारणाय, मोक्षमार्गे नयस्व मां।

अर्थ:

मोक्ष के लिए मैं आपके चरणों में शरण लेता हूं। अज्ञान के निवारण के लिए, मुझे मोक्ष मार्ग पर ले जाएं।

श्लोक 3

सर्वदुःखस्य निवारणाय, शान्तिं मयि त्वं ददासि। सर्वव्यापी त्वमेव भव, मां च सर्वत्र रक्षसि।

अर्थ:

सभी दुखों के निवारण के लिए, आप मुझे शांति प्रदान करते हैं। आप सर्वव्यापी हैं, आप मुझे सभी जगहों पर सुरक्षित रखते हैं।

श्लोक 4

सर्वत्र त्वमेव भवसि, अहं त्वयि शरणागतः। त्वमेव मम गतिर्भविष्यसि, त्वमेव मामनुग्रहय।

अर्थ:

आप सभी जगहों पर हैं, मैं आपकी शरण में हूं। आप ही मेरी गति होंगे, कृपया मुझे अनुग्रह करें।

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को आध्यात्मिक विकास में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र भक्तों को ईश्वर के करीब आने और उनके दिव्य ज्ञान और कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।

Ishwarprathna Stotram

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ करने के लिए, भक्तों को एक शांत स्थान पर जाना चाहिए और अपनी आँखें बंद करनी चाहिए। फिर, वे स्तोत्र का ध्यान से पाठ कर सकते हैं। वे अपने मन में ईश्वर के बारे में सोच सकते हैं और उनकी प्रार्थना कर सकते हैं।

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ करने के कुछ विशेष लाभ निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति: ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् का नियमित पाठ भक्तों की भक्ति को बढ़ाता है।
  • शांति: ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् मन को शांत करती है और तनाव को दूर करती है।
  • आत्मविश्वास: ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् आत्मविश्वास को बढ़ाती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है।

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ करने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • एक शांत स्थान पर जाएं और अपनी आँखें बंद कर लें।
  • स्तोत्र का ध्यान से पाठ करें और अपने मन में ईश्वर के बारे में सोचें।
  • अपने मन में ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे आपको आध्यात्मिक विकास में मदद करें।
  • प्रतिदिन कम से कम एक बार स्तोत्र का पाठ करें।

ईश्वरप्रार्थना स्तोत्रम् एक शक्तिशाली साधन है जो भक्तों को आध्यात्मिक विकास के अपने मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

ईश्वरस्तोत्रम् २ Ishwar Stotram 2

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