KARMASU

Version
File Size 0.00 KB
Downloads 740
Files 1
Published October 10, 2023
Updated October 10, 2023

अलभ्य श्रीगायत्रीकवचम्, गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक अर्थ और महत्व को समझने में मदद करने वाला एक संस्कृत स्तोत्र है। यह स्तोत्र गायत्री मंत्र के प्रत्येक अक्षर का वर्णन करता है और यह भी बताता है कि गायत्री मंत्र कैसे मनुष्य को आध्यात्मिक विकास के मार्ग पर ले जा सकता है।

अलभ्य श्रीगायत्रीकवचम् का पाठ इस प्रकार है:

श्लोक 1

ॐ नमो गायत्र्यै त्रिगुणात्मिकायै ब्रह्मारूपायै च विष्णुरूपिण्यै रुद्ररूपायै च त्रिगुणात्मकायै महामायास्वरूपिण्यै नमो नमः ।

अर्थ

हे गायत्री! हे त्रिगुणात्मिका! हे ब्रह्मरूपिणी! हे विष्णुरूपिणी! हे रुद्ररूपिणी! हे त्रिगुणात्मकि! हे महामायास्वरूपिणी! आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 2

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

अर्थ

हे गायत्री! हम उस परमात्मा का ध्यान करते हैं, जो पृथ्वी, आकाश, और स्वर्ग में व्याप्त हैं। वह परमात्मा सबसे श्रेष्ठ हैं, और उनका प्रकाश दिव्य है। वह हमारे बुद्धि को प्रेरित करें।

श्लोक 3

ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः

अर्थ

हे गायत्री! आप शांति, प्रेम, और आनंद की देवी हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 4

ॐ सर्वलोकपालिनी सर्वभूतात्मिका सर्वहितकारिणी सर्वमंगलदायिनी सर्वज्ञरूपिणी सर्वशक्तिरूपिणी सर्वमायास्वरूपिणी नमो नमः ।

अर्थ

हे गायत्री! आप सभी लोकों की पालनहार हैं, आप सभी प्राणियों की आत्मा हैं, आप सभी के लिए लाभकारी हैं, आप सभी मंगलों को देने वाली हैं, आप सर्वज्ञ हैं, आप सर्वशक्तिमान हैं, और आप महामाया हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 5

ॐ सर्वदुःखनाशिनी सर्वसुखप्रदा सर्वजनवन्दिता सर्वलोकप्रिया सर्वव्यापिनी सर्वशक्तिमाता सर्वमायास्वरूपिणी नमो नमः ।

अर्थ

हे गायत्री! आप सभी दुखों को दूर करने वाली हैं, आप सभी सुखों को देने वाली हैं, आप सभी लोगों द्वारा पूजनीय हैं, आप सभी लोकों की प्रिय हैं, आप सर्वव्यापी हैं, आप सर्वशक्तिमान हैं, और आप महामाया हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 6

ॐ अजरामररूपिणी सर्वगुणसम्पन्ना सर्वमोहान्धकारनाशिनी सर्वपापनाशिनी सर्वदुःखनाशिनी सर्वकामनापूर्तिकारिणी नमो नमः ।

अर्थ

हे गायत्री! आप अजर हैं, आप अमर हैं, आप सभी गुणों से संपन्न हैं, आप सभी मोह और अंधकार को दूर करने वाली हैं, आप सभी पापों को दूर करने वाली हैं, आप सभी दुखों को दूर करने वाली हैं, और आप सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 7

ॐ सर्वलोकपूजिनी सर्वदेवप्रिया सर्वगुरुस्वरूपिणी सर्वज्ञानदायिनी सर्वसाधुजनवन्दिता सर्वमायास्वरूपिणी नमो नमः ।

अर्थ

हे गायत्री! आप सभी लोकों द्वारा पूजनीय हैं, आप सभी देवताओं की प्रिय हैं, आप सभी गुरुओं के रूप हैं, आप सभी ज्ञान को देने वाली हैं, आप सभी साधुओं द्वारा पूजनीय हैं, और आप महामाया हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

श्लोक 8

ॐ सर्वशत्रुसंहारिणी सर्वरोगनाशिनी सर्वकलहनाशिनी सर्वभयविनाशिनी सर्वप्राप्तिकारिणी सर्वकामनापूर्ति

Download
or download free
[free_download_btn]
[changelog]

Categories & Tags

Similar Downloads

No related download found!
KARMASU

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *