अनघालक्ष्म्याः षोडशनामानि
अनघालक्ष्मी हिन्दू देवी लक्ष्मी का एक रूप है। वह विष्णु की पत्नी और धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं। अनघालक्ष्मी को 16 नामों से जाना जाता है। इन नामों का अर्थ इस प्रकार है:
- अनघा - जिसे कोई कष्ट न हो।
- सौभाग्यवती - जिसे सभी प्रकार के सौभाग्य प्राप्त हों।
- धनवती - जिसे बहुत सारा धन प्राप्त हो।
- सर्वसम्पदावती - जिसे सभी प्रकार की सम्पत्ति प्राप्त हो।
- प्रेमवती - जिसे सभी से प्रेम प्राप्त हो।
- कीर्तिवती - जिसे सभी प्रकार की कीर्ति प्राप्त हो।
- स्वास्थ्यवती - जिसे पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त हो।
- योगक्षेमवती - जिसे सभी प्रकार का सुख-सुविधा प्राप्त हो।
- सौम्यरूपा - जिसका रूप बहुत ही सौम्य हो।
- कल्याणकारी - जिसका दर्शन करने से सभी प्रकार का कल्याण होता हो।
- भवानी - जो सभी प्रकार के भयों से रक्षा करती हो।
- महालक्ष्मी - जो महान लक्ष्मी हैं।
- वैष्णवी - जो विष्णु की पत्नी हैं।
- नारायणप्रिया - जो नारायण की प्रिय हैं।
- पद्ममंजरी - जिनके हाथों में कमल के फूल हैं।
- पद्मावती - जो कमल पर विराजमान हैं।
इन नामों का पाठ करने से अनघालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को धन, समृद्धि, सौभाग्य और सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है।
अनघालक्ष्मी की पूजा विधि
अनघालक्ष्मी की पूजा करने के लिए, किसी भी पवित्र स्थान पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर अनघालक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें। प्रतिमा या तस्वीर के सामने एक दीपक जलाएं और अनघालक्ष्मी के 16 नामों का ध्यानपूर्वक पाठ करें। पाठ करते समय, अपनी आँखें बंद कर लें और अनघालक्ष्मी की आराधना करें।
अनघालक्ष्मी की पूजा करने के लिए कोई विशेष समय निर्धारित नहीं है। आप इसे किसी भी समय कर सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अनघालक्ष्मी की पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
अनघालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ उपाय
- अनघालक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर घर में पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
- अनघालक्ष्मी को रोजाना लाल फूल, गुड़ और चावल अर्पित करें।
- अनघालक्ष्मी के नामों का जाप करें।
- अनघालक्ष्मी की कथा सुनें या पढ़ें।
अनघालक्ष्मी की कृपा से भक्तों को धन, समृद्धि, सौभाग्य और सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है।
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