श्रीयमुनाष्टक एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसे श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र यमुना नदी की स्तुति करता है। इस स्तोत्र में यमुना नदी को एक पवित्र नदी के रूप में वर्णित किया गया है, जो भगवान कृष्ण और उनके भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
श्रीयमुनाष्टक के छंद निम्नलिखित हैं:
sriyamunashtakam
-
यमुना नदी नमस्ते, नमस्ते, नमस्ते
-
तू श्रीकृष्ण की प्रेयसी, तू भक्तों की शान्ति
-
तू त्रिवेणी संगम की शोभा, तू मोक्ष का द्वार
-
तू ऋषि मुनियों की साधना, तू ब्रह्माण्ड का आधार
-
तू प्रेम की प्रतिमा, तू ज्ञान की धारा
-
तू करुणा की सागर, तू सुख की खान
-
तू भक्तों की रक्षा, तू पापों का नाश
-
तू यमुना नदी, तू सर्वशक्तिमान
श्रीयमुनाष्टक का अर्थ निम्नलिखित है:
-
हे यमुना नदी, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
-
आप श्रीकृष्ण की प्रेयसी हैं, आप भक्तों की शांति हैं।
-
आप त्रिवेणी संगम की शोभा हैं, आप मोक्ष का द्वार हैं।
-
आप ऋषि मुनियों की साधना हैं, आप ब्रह्माण्ड का आधार हैं।
-
आप प्रेम की प्रतिमा हैं, आप ज्ञान की धारा हैं।
-
आप करुणा की सागर हैं, आप सुख की खान हैं।
-
आप भक्तों की रक्षा करती हैं, आप पापों का नाश करती हैं।
-
आप यमुना नदी हैं, आप सर्वशक्तिमान हैं।
श्रीयमुनाष्टक एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र यमुना नदी के प्रति भक्ति और सम्मान व्यक्त करता है। यह स्तोत्र यमुना नदी के महत्व को भी बताता है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को यमुना नदी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
KARMASU