Govindadevashtakam, एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के अवतार गोविंददेव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी के वैष्णव संत और विद्वान विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर द्वारा रचित था।
स्तोत्र में, ठाकुर कृष्ण के रूप, गुणों और लीलाओं का वर्णन करते हैं। वे कृष्ण को सर्वोच्च भगवान के रूप में स्वीकार करते हैं, जो समस्त सृष्टि के सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारक हैं।
स्तोत्र के आठ श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में कृष्ण के एक विशेष पहलू की स्तुति की गई है।
Govindadevashtakam (Vishwanathchakravartin Thakkurvirachitam)
प्रथम श्लोक में, ठाकुर कृष्ण के रूप की स्तुति करते हैं। वे उन्हें "श्यामसुंदर" कहते हैं, जिसका अर्थ है "श्याम रंग का सुंदर"। वे कृष्ण के रूप को "अविनाशी", "अनन्त" और "अद्वितीय" कहते हैं।
दूसरे श्लोक में, ठाकुर कृष्ण के गुणों की स्तुति करते हैं। वे उन्हें "महान करुणामय", "ज्ञानी" और "दयालु" कहते हैं। वे कृष्ण को "दुष्टों का नाश करने वाला" और "भक्तों का रक्षक" कहते हैं।
तीसरे श्लोक में, ठाकुर कृष्ण की लीलाओं की स्तुति करते हैं। वे उन्हें "अद्भुत लीलाओं का रचयिता" कहते हैं। वे कृष्ण की लीलाओं को "अनंत" और "अद्वितीय" कहते हैं।
चौथे श्लोक में, ठाकुर कृष्ण की भक्ति के महत्व की स्तुति करते हैं। वे कहते हैं कि कृष्ण की भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है। वे कृष्ण की भक्ति को "अद्वितीय" और "अतिशय शक्तिशाली" कहते हैं।
पांचवें श्लोक में, ठाकुर कृष्ण के भक्तों के लिए कृष्ण की कृपा की स्तुति करते हैं। वे कहते हैं कि कृष्ण अपने भक्तों पर अत्यंत कृपालु हैं। वे कृष्ण को "भक्तों का आश्रय" और "भक्तों का रक्षक" कहते हैं।
छठे श्लोक में, ठाकुर कृष्ण के भक्तों के लिए कृष्ण की आशीषों की स्तुति करते हैं। वे कहते हैं कि कृष्ण अपने भक्तों को सभी प्रकार के सुखों से संपन्न करते हैं। वे कृष्ण को "भक्तों का कल्याणकारी" और "भक्तों का हितकारी" कहते हैं।
सातवें श्लोक में, ठाकुर कृष्ण की भक्ति के लिए अपने स्वयं के प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति करते हैं। वे कृष्ण के भक्त बनने की इच्छा व्यक्त करते हैं।
आठवें श्लोक में, ठाकुर कृष्ण की स्तुति करते हुए स्तोत्र का समापन करते हैं। वे कृष्ण को "सर्वोच्च भगवान" कहते हैं, और उनकी स्तुति करते हुए अपना सिर झुकाते हैं।
Govindadevashtakam एक लोकप्रिय स्तोत्र है जो अक्सर कृष्ण भक्तों द्वारा पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र कृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है।
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