Ganesh Stotram

Shri Vishnu krutam-Ganesh Stotram : श्रीविष्णु कृतं गणेश स्तोत्र….

श्रीविष्णु कृतं गणेश स्तोत्र हिंदी:Shri Vishnu krutam-Ganesh Stotram ॥ श्रीविष्णुरुवाच ॥ ईश त्वां स्तोतुमिच्छामि ब्रह्मज्योतिः सनातनम् ।निरुपितुमशक्तोsहमनुरुपमनीहकम् ॥ १ ॥ प्रवरं सर्वदेवानां सिद्धानां योगिनां गुरुम् ।सर्वस्वरुपं सर्वेशं ज्ञानराशिस्वरुपिणम् ॥ २ ॥ अव्यक्तमक्षरं नित्यं सत्यमात्मस्वरुपिणम् ।वायुतुल्यातिनिर्लिप्तं चाक्षतं सर्वसाक्षिणम् ॥ ३ ॥ संसारार्णवपारे च मायापोते सुदुर्लभे ।कर्णधारस्वरुपं च भक्तानुग्रहकारकम् ॥ ४ ॥ वरं वरेण्यं वरदं वरदानामपीश्र्वरम् ।सिद्धं सिद्धिस्वरुपं च सिद्धिदं सिद्धिसाधनम् ॥ ५ ॥ ध्यानातिरिक्तं ध्येयं च Ganesh Stotram ध्यानासाध्यं च धार्मिकम् ।धर्मस्वरुपं धर्मज्ञं धर्माधर्मफलप्रदम् ॥ ६ ॥ बीजं संसारवृक्षाणामङकुरं च तदाश्रयम् ।स्त्रीपुत्रपुंसकानां च रुपमेतदतीन्द्रियम् ॥ ७ ॥ सर्वाद्यमग्रपूज्यं च सर्वपूज्यं गुणार्णवम् ।स्वेच्छया सगुणं ब्रह्म निर्गुणं चापि स्वेच्छया ॥ ८ ॥ स्वयं प्रकृतिरुपं च प्राकृतं प्रकृतेः परम् ।त्वां स्तोतुमक्षमोsनन्तः सहस्त्रवदनेन च ॥ ९ ॥ न क्षमः पञ्चवक्त्रश्र्च न क्षमश्र्चतुराननः ।सरस्वती न शक्ता च न शक्तोsहं तव स्तुतौ ।न शक्ताश्र्च चतुर्वेदाः के वा ते वेदवादिनः ॥ १० ॥ इत्येवं स्तवनं कृत्वा सुरेशं सुरसंसदि ।सुरेशश्र्च सुरैः सार्द्धं विरराम रमापतिः ॥ ११ ॥ इदं विष्णुकृतं स्तोत्रं Ganesh Stotram गणेशस्य च यः पठेत् ।सायंप्रातश्र्च मध्याह्ने भक्तियुक्तः समाहितः ॥ १२ ॥ तद्विघ्ननिघ्नं कुरुते विघ्नेशः सततं मुने ।वर्धते सर्वकल्याणं कल्याणजनकः सदा ॥ १३ ॥ यात्राकाले पठित्वा तु यो याति भक्तिपूर्वकम् ।तस्य सर्वाभीष्टसिद्धिर्भवत्येव न संशयः ॥ १४ ॥ तेन दृष्टं च दुःस्वप्नं सुस्वप्नमुपजायते ।कदापि न भवेत्तस्य ग्रहपीडा च दारुणा ॥ १५ ॥ भवेद् विनाशः शत्रूणां बन्धूनां च विवर्धनम् । शश्र्वदिघ्नविनाशश्र्च शश्र्वत् सम्पद्विवर्धनम् ॥ १६ ॥ स्थिरा भवेद् गृहे लक्ष्मीः पुत्रपौत्रविवर्धिनी ।सर्वैश्र्वर्यमिह प्राप्य ह्यन्ते विष्णुपदं लभेत् ॥ १७ ॥ फलं चापि च तीर्थानां यज्ञानां यद् भवेद् ध्रुवम् ।महतां सर्वदानानां श्रीगणेशप्रसादतः ॥ १८ ॥ ॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते श्रीविष्णुकृतं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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Rishta

Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : सपने में शादी का रिश्ता आना क्या यह कोई इशारा है या सिर्फ कल्पना ?

Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : दुनिया भर में सपनों को लेकर कई रहस्यमयी धारणाएं और कहानियां प्रचलित हैं। जब हम गहरी नींद के आगोश में होते हैं, तो हमारा अवचेतन मन (Subconscious mind) एक अलग ही ब्रह्मांड में सफर कर रहा होता है। स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हम नींद में जो भी दृश्य या घटनाएं देखते हैं, उनका हमारे वास्तविक जीवन, हमारी आंतरिक भावनाओं और आने वाले भविष्य से बहुत ही गहरा और सीधा संबंध होता है। नींद में देखे जाने वाले इन्हीं अत्यधिक भावनात्मक और रहस्यमयी सपनों में से एक है—विवाह या रिश्ते की बात तय होते हुए देखना। अक्सर जब किसी इंसान को सोते समय सपने में shadi ka rishta आता हुआ दिखाई देता है, तो सुबह आंख खुलते ही उसके मन में ढेरों सवाल उठने लगते हैं। इंसान यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या सच में उसके घर शहनाई बजने वाली है? या फिर यह भविष्य में आने वाली किसी बड़ी अनहोनी या बदलाव का कोई गुप्त ईश्वरीय इशारा है? आज हम आपको मनोविज्ञान और प्राचीन स्वप्न विज्ञान के आधार पर बहुत ही गहराई से बताएंगे कि इस तरह के सपनों का असली अर्थ क्या होता है। Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : सपने में शादी का रिश्ता आना क्या यह कोई इशारा है….. मनोविज्ञान और स्वप्न शास्त्र का नजरिया : The Perspective of Psychology and Dream Interpretation स्वप्न शास्त्र के अनुसार, विवाह का प्रस्ताव, सगाई, या शादी की तैयारियों से जुड़े सपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बड़े बदलावों को दर्शाते हैं। इसे एक बेहद ही शुभ, फलदायी और कीमती सपना माना गया है। यदि आप अपने वर्तमान जीवन में किसी भारी मानसिक तनाव या परेशानी से जूझ रहे हैं, तो सपने में shadi ka rishta आना इस बात का एक बहुत ही मजबूत और स्पष्ट संकेत है कि जल्द ही आपकी सभी परेशानियां जड़ से खत्म होने वाली हैं। मनोवैज्ञानिकों का भी यह मानना है कि ऐसे सपने सिर्फ शादी तक सीमित नहीं होते; बल्कि यह आपके व्यवसाय, ठप्प पड़े व्यापार, डूबते करियर और नौकरी में अचानक होने वाले किसी बड़े धन लाभ का भी एक सीधा इशारा हो सकते हैं। विभिन्न अवस्थाओं में इस सपने का सटीक और अचूक मतलब : The precise and unerring meaning of this dream across various scenarios. 1. अविवाहित (कुंवारे) लोगों के लिए एक वरदान: अगर आपकी उम्र हो चुकी है, आपकी अभी तक शादी नहीं हुई है और आप विवाह के योग्य हैं, तो आपके लिए यह सपना साक्षात खुशियों का खजाना है। एक अविवाहित व्यक्ति द्वारा सपने में shadi ka rishta तय होते हुए देखना यह प्रमाणित करता है Rishta कि उसके जीवन में बहुत ही जल्द मंगल कार्य होने वाले हैं। अगर आप काफी लंबे समय से मन ही मन अपने लिए एक अच्छे और सुयोग्य जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, तो भगवान ने आपको यह स्पष्ट इशारा दे दिया है कि आपकी यह खोज अब सफलता के साथ पूरी होने वाली है। 2. पहले से शादीशुदा लोगों के लिए चेतावनी: वहीँ दूसरी ओर, सपनों की दुनिया के कुछ कड़े नियम भी होते हैं। यदि कोई व्यक्ति जो पहले से ही विवाहित है और वह ऐसा सपना देखता है, तो स्वप्न शास्त्र इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखता है। Rishta एक शादीशुदा इंसान के सपने में shadi ka rishta आना बिल्कुल भी अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। यह सपना भविष्य में आने वाली किसी बड़ी पारिवारिक उलझन, कलह, या किसी बड़ी परेशानी की ओर इशारा करता है। इसलिए अगर आपको ऐसा सपना आए, तो भविष्य के बड़े फैसले बहुत ही धैर्य और सोच-समझकर लेने चाहिए। 3. बड़े भाई के लिए प्रस्ताव आना: सपनों का सटीक अर्थ इस बात पर भी बहुत निर्भर करता है कि आप सपने में किस व्यक्ति को देख रहे हैं। अगर आप नींद में देखते हैं कि आपके बड़े भाई के लिए shadi ka rishta आया है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। हमारे प्राचीन ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र इसे एक अशुभ संकेत मानते हैं। यह सपना आपके परिवार में किसी गंभीर परेशानी, अचानक होने वाली अनहोनी या किसी बहुत दुखद समाचार के आने का पूर्व संकेत हो सकता है। 4. किसी करीबी दोस्त के लिए प्रस्ताव आना: इसके बिल्कुल विपरीत, अगर आप सपने में यह दृश्य देखते हैं कि आपके किसी बहुत करीबी दोस्त के लिए shadi ka rishta आ रहा है, तो यह बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। यह सपना इस बात की पूरी गारंटी देता है कि जल्द ही आपके या आपके उस दोस्त के जीवन में किसी नए और लाभदायक कार्य की शुरुआत होने वाली है, जो भविष्य में मनचाहे परिणाम देगा। सपनों में आपकी भावनाएं क्या इशारा करती हैं : What do your emotions in dreams indicate ? 1. प्रस्ताव को खुशी-खुशी स्वीकार कर लेना: सपनों में आपकी खुद की भावनाएं (Emotions) और प्रतिक्रिया क्या थीं, यह बात सपनों के अर्थ को पूरी तरह बदल सकती है। यदि सपने में कोई प्रस्ताव आता है और आप बिना किसी डर या झिझक के उस shadi ka rishta को सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं, तो मनोविज्ञान कहता है कि आपका आत्मविश्वास अब चरम पर है। आप जीवन की नई जिम्मेदारियों और चुनौतियों को उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार, मजबूत और मानसिक रूप से परिपक्व (Mature) हो चुके हैं। 2. अनजान व्यक्ति द्वारा प्रस्ताव लाना: अगर आपके सपने में कोई ऐसा बिल्कुल अनजान चेहरा आपके लिए shadi ka rishta लेकर आता है जिसे आपने असल जिंदगी में कभी नहीं देखा, तो इसे ब्रह्मांड का एक बहुत ही रहस्यमयी इशारा समझें। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपकी जिंदगी में अचानक कोई ऐसा नया अवसर (Opportunity) या अनदेखा बदलाव आने वाला है जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। 3. रिश्ते से बुरी तरह घबराना या उसका टूट जाना: अगर सपने में प्रस्ताव आते ही आपको भयंकर डर लगने लगे, या आप घबराकर प्रस्ताव को ठुकरा दें, तो इसका मतलब है कि आप अंदर से डरे हुए हैं और नई जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। इसके अलावा, यदि आप देखते हैं कि बात पक्की होने से ठीक

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Vishnu Stotra

Shri Vishnu Stotra : श्री विष्णु स्तोत्र….

Vishnu Stotra: श्री विष्णु स्तोत्र: श्री विष्णु स्तोत्र हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और सम्मानित मंत्रों में से एक है। यह पूजा का एक शक्तिशाली और लोकप्रिय माध्यम है जो परम लक्ष्य, मोक्ष और सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से मानवीय समस्याओं से छुटकारा मिलता है। भगवान की महिमा अपार है। वे गुणों, ज्ञान और वैराग्य से भरपूर हैं। भगवान की पूजा करने से हम दुनिया के प्रति अपने मोह से मुक्त हो जाते हैं – हमें एक तरह की मुक्ति या आज़ादी का अनुभव होता है। Vishnu Stotra जैसे नदी समुद्र में मिलकर अपनी पहचान खो देती है, वैसे ही जब हम परमात्मा में विलीन हो जाते हैं, तो हम परम स्वरूप को प्राप्त कर लेते हैं। दिव्य रूपों का ध्यान करने और भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण करने से हमारी इंद्रियां और क्षमताएं उच्च स्तर पर पहुंच जाती हैं; हम आध्यात्मिकता की राह पर चल पड़ते हैं। श्री विष्णु स्तोत्र के लाभ: भगवान विष्णु ब्रह्मांड के सर्वोच्च देवता हैं और अन्य सभी देवता उन्हीं से उत्पन्न हुए हैं। यदि शुद्ध हृदय से जप किया जाए, तो भगवान विष्णु के 1000 नामों में अपार शक्ति होती है।जो लोग नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन पर सौभाग्य की कृपा होती है, जिससे उन्हें जीवन में – चाहे वह पेशेवर हो या व्यक्तिगत – अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है। श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने से विचारों को शांत करने और चिंताओं को कम करने में भी मदद मिलती है। Vishnu Stotra इस मंत्र से मिलने वाली मानसिक शांति व्यक्ति को अपने विचारों को सकारात्मकता की ओर ले जाने में मदद कर सकती है।भक्तों के जीवन से सभी बाधाएं और समस्याएं दूर हो जाती हैं और वे सफलता प्राप्त करने की ओर अग्रसर होते हैं। यह पाठ करने वाले के शरीर और मन के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। श्री विष्णु स्तोत्र उन्हें दुश्मनों के बुरे इरादों से बचाता है।श्री विष्णु स्तोत्र हमारे पापों को धोने में मदद कर सकता है; चाहे वे इस जीवन के हों या पिछले जन्मों के। Vishnu Stotra तब हम ज्ञानी और गुणी व्यक्ति बन जाते हैं जो ईश्वर और धर्म के प्रति समर्पित होते हैं।श्री विष्णु स्तोत्र Vishnu Stotra का पाठ करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह भक्त को परलोक में मोक्ष प्राप्त करने की संभावना के करीब ले जाता है। यह मन को सभी बुरे विचारों से शुद्ध करता है।इससे मन की दृढ़ता, अच्छी याददाश्त, आत्म-सुख (आंतरिक खुशी) और क्रोध, ईर्ष्या व लालच से मुक्ति जैसे लाभ मिलते हैं। Vishnu Stotra यह दुख, शोक और पीड़ा को कम करता है। किसे यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति गहरे दुख में हो और मुश्किलों से बाहर न निकल पा रहा हो, उसे वैदिक नियमों के अनुसार श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री विष्णु स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Vishnu Stotra in Hindi किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुन: पुन: ।यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव: ।। 1 ।। मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। 2 ।। पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।। 3 ।। विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। 4 ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। 5 ।। कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानव: ।अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। 6 ।। संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रात:काले तथैव च ।मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ।। 7 ।। ।। इति श्री विष्णु स्तोत्र संपूर्णम् ।।

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Laghu Stotram

Shri Laghu Stotram : श्री लघु स्तोत्रम्….

श्री लघु स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Shri Laghu Stotram in Hindi आधारे तरुणार्कबिम्बरूचिरं सोमप्रभं वाग्भवंबीजं मनमथमिंद्रगोपकनिभं ह्रत्पंकजे संस्थितम् ।रन्ध्रे ब्रह्मपदे च शाक्तमपरं चन्द्रप्रभाभासुरं येध्यायंति पदत्रयं तव शिवे ते यांति सौख्यं पदम् ।। 1 ।। ॐ अस्य श्रीलघुस्तोत्रस्य वृद्धसारस्वतऋषि: ।त्रिपुराभैरवी देवता । शार्दूलविक्रीडितं छंद: ।मम सर्वकामफलप्राप्त्र्थे जपे विनियोग: । ॐ ऐन्द्रस्येव शरासनस्य दधतो मध्ये ललाटप्रभांशौक्लीं कान्तिमनुष्य गोरिव शिरस्यातन्वती सर्वत: ।एषाऽसौ त्रिपुरा ह्रदि द्युतिरिवोष्मांशो: सदा संस्थिताछिद्यान्न: सहसा पदैस्त्रिभिरघं ज्योतिर्मयी वांगमयी ।। 1 ।। या मात्रा त्रिपुषोलतातनुलसत्तंतुसिथतिस्पर्धिनीवाग्बीजे प्रथमे स्थिता तव सदा तां मन्महे ते वयम् ।शक्ति कुण्डलिनीति विश्वजननव्यापारबद्धोद्यमांज्ञात्वेत्थं न पुन: स्प्रशंति जननीगर्भेर्भकत्वं नरा: ।। 2 ।। दृष्ट्वा संभ्रमकारि वस्तु सहसा ऐं ऐमिति व्याह्रतंयेनाकूतवशादपीह वरदे बिंदु बिनाप्यक्षरम् ।तस्यापि ध्रुवमेव देवितरसा Laghu Stotram जाते तवानुग्रहे वाच:सूक्तिसुधारसद्रवमुचो निर्यान्ति वक्त्रोदरात् ।। 3 ।। यन्नित्ये तव कामराजमपरं मन्त्राक्षरं निष्कलंतत्सारस्वतमित्यवैति विरल: कश्र्चिद्बुधश्रेचद्भुवि ।आख्यां प्रतिपर्व सत्यतपसो यत्कीर्तयन्तो द्विजा:प्रारम्भे प्रणवास्पदं प्रणयितुं नित्योंच्चरंति स्फुटम् ।। 4 ।। यत्सदयो वचसां प्रव्रत्तिकरणे दृष्टप्रभावंबुधैस्तार्तीयं तदहं नमामि मनसा तद्वीजमिंदुप्रभम् ।अस्त्वौर्वोऽपि सरस्वतीमनुगते जाड्यांबुविच्छित्तयेगोशब्दो गिरिवर्तते सुनियतं योगं विना सिद्धित: ।। 5 ।। एकैकं तव देवि जन्म हयनघं सव्यंजनाव्यंजनंकूटस्थं यदि वा प्रथक क्रमगतं यद्वा स्थितं व्युत्क्रमात् ।यं यं काममपेक्ष्य येन विधिना केनापि वा चिन्तितंजप्तं वा सफलीकरोति तरसा तं तं समस्तं न्रणाम् ।। 6 ।। वामे पुस्तकधारिणीमभयदां साक्षस्त्रजं दक्षिणेभक्तेभ्या वरदानपेशलकरां Laghu Stotram कर्पूरकंदोज्ज्वलाम् ।उज्ज्रम्भाम्बुजपत्रकान्तिनयनां स्त्रिग्धप्रभालोकिनीं येत्वामंब न शीलयन्ति मनसा तेषां कवित्वं कुत: ।। 7 ।। ये त्वां पांडुरपुण्डरीकपटलस्पष्टाभिरामप्रभांसिंचंतीममृतद्रवैरिव शिरो ध्यायंति मूर्धि्न स्थिताम् ।अश्रातं विकटं स्फ्टाक्षरपदा निर्यान्ति वक्त्राम्बुजात्तेषांभारति भारती सुरसरित्कल्लोललोलोर्मय: ।। 8 ।। ये सिंदूरपरागपुंजपिहितां त्वत्तेजसा द्यामिमामुर्वींचापि विलीनयावकरसप्रस्तारमगनामिव ।पश्यन्ति क्षणमप्यनन्यमनसस्तेषामनंगज्वरक्लांतास्त्रस्तकुरंगदारकद्रशो वश्या भवानी ध्रुवम् ।। 9 ।। चंचत्कांचनकुण्डलांगदधरामाबद्धकांचिस्रजं ये त्वांचेतसि तदनतेक्षणमपि Laghu Stotram ध्यायन्ति कृत्वा स्थिराम् ।तेषां वेश्मसु विभ्रमादहरह:कारीभवंत्यश्र्चिरंमाद्यत्कुंजकर्णतालतरला: स्थैर्यं भजंति श्रिय: ।। 10 ।। आर्भक्याशशिखण्डमण्डित जटाजूटां न्रमुंडस्त्रजंबंधूकप्रसवारुणांबरधरां प्रेतासनाध्यासिनीम् ।त्वां ध्यायंति चतुर्भुजां Laghu Stotram त्रिनयनामापीनतुंगस्तनीं मध्येनिम्नवलित्रयांकिततनुं त्वद्रूपकं चिन्तये ।। 11 ।। जातोऽप्यल्पहरिच्छिदे क्षितिभुजां सामान्यमात्रे कुलेनि:शेषावनिचक्रवर्तिपदवीं लब्धवा प्रतापोन्नत: ।यद्विद्याधरवृन्दवन्दितपद: श्रीवत्सराजोभवद्देवित्वंचरणांबुजप्रणतित: सोऽयं प्रसादोदय: ।। 12 ।। चण्डी त्वंचरणाम्बुजार्चनकृते बिल्वीदलोल्लुण्ठनात्त्रुट्यत्कंटककोटिभि: परिचयं येषां न जग्मु: करा: ।ते दंडाकुशचक्रचापकुलिशश्रीवत्सवत्सांकितेर्जायन्तेपृथिवीभुज: कथमिवाम्भोजप्रभै: पाणिभि: ।। 13 ।। विप्रा: क्षोणिभुजो विशस्तदितरे क्षीराज्यमध्वासवैस्त्वांदेवि त्रिपुरे परां परकलां संतर्प्य पूजाविधौ ।यां यां प्रार्थयते मन: स्थिरधियां येषां त एव ध्रुवं तांतां सिद्धि मवापनुवन्ति तरसा विघ्नैरविघ्नीकृता: ।। 14 ।। शब्दानां जननि त्वमत्र भुवने वाग्वादिनोत्युच्यसेत्वत्त केशववासवप्रभृतयोप्याविर्भवन्ति ध्रुवम् ।लीयन्ते खलु यत्र कल्पवरिमे Laghu Stotram ब्रह्मादयस्तेऽप्यमी सात्वं काचिदचिन्त्यरूपगहना शक्ति: परा गीयसे ।। 15 ।। देवानां त्रितयं त्रयीहुतभुजां शक्तित्रयं त्रिस्वरास्त्रैलोक्यंत्रिपदी त्रिपुष्करमथो त्रिर्ब्रह्मकर्णास्त्रय: ।यत्किंचिंज्जगति त्रिधा नियमितं वस्तु त्रिवर्गादिकंतत्सर्व त्रिपुरेति नाम भगवत्यन्वेति ते सत्तवत: ।। 16 ।। लक्ष्मीं राजकुले जयं रणमुखे क्षेमकंरीमध्वनिक्रव्यादद्विपसर्पभाजि शबरीकांतारदुर्गे गिरौ ।भूतप्रेतपिशाचज्रम्भकभयं स्मृत्वा महाभैरवीं व्यामोहेत्रिपुरां तरन्ति विपदस्तारांचतां यत्प्लवे ।। 17 ।। या या कुण्डलिनी क्रिया मधुमती काली कलामालिनीमातंगी विजया जया भगवती देवी शिवा शाम्भवी ।शक्ति शंकरवल्लभा त्रिनयना Laghu Stotram वाग्वादिनी भैरवीह्रींकारी त्रिपुरा परापरमयी माता कुमारीत्यसि ।। 18 ।। आईपल्लवितै: परस्परयुतैर्द्वित्रिक्रमाद्यक्षरै: काद्यै:क्षान्तगतै: स्वरादिभिरथ क्षांतैश्र्च तै: सस्वरै: ।नामानि त्रिपुरे भवन्ति खलु या नित्यं तु गुह्यानि तेतेभ्यो भैरवपत्नि विंशतिसहस्त्रेभ्य: परेभ्यो नम: ।। 19 ।। बोद्धव्या निपुणं बुधै: स्तुतिरियं कृत्वा मनस्तदन्तंभारत्यास्त्रिपुरेत्यनन्यमनसा यत्राद्यवृत्ति: स्फुटम् ।एकद्वित्रिपदक्रमेण कथितस्तत्पादसंख्या-क्षरैर्मन्त्रोद्धारविधिर्विशेषसहित: सत्संप्रदायान्वित: ।। 20 ।। सावद्यं निरवद्यमस्तु यदि वा किंवाऽनया चिन्तयानूनं स्तोत्रमिदं पठिष्यति जनो यस्यास्ति भक्तिस्त्वयि ।संचिन्त्यापि लघुत्वमात्मनि दृढ संजायमानं हठात्वद्भक्त्यामुखरीकृतेन रचितं यत्स्यान्मयाऽपि ध्रुवम् ।। 21 ।। आनन्दोद्भवकम्पघूर्णंनयनं निद्राट्टहासादिकंवेदव्याकरणावगाहकवितातर्कोक्तिमुक्तिप्रदम् ।वश्याकर्षपुरप्रवेशनगरक्षोभादिसिद्धयष्टकं लघ्वाचार्यइदं करोति सततं सौभाग्यमारोग्यताम् ।। 22 ।। गौरि त्र्म्बकपत्नि पार्वति सति त्रैलोक्यगाने शिवेशर्वाणि त्रिपुरे भवानि वरदे रुद्राणि कात्यायनि ।भीमे भैरवि चण्डिसर्ववरदे कालेक्षये शूलिनि त्वत्पादप्रणतं ।। इति श्री लघु स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

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Annapurna Stotram

Sri Laghu Annapurna Stotram : श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र…..

श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Laghu Annapurna Stotram in Hindi भगवति भवरोगात् पीडितं दुष्कृतोत्यात् ।सुतदुहितृकलत्र उपद्रवेणानुयातम् ।विलसदमृतदृष्ट्या वीक्ष विभ्रान्तचित्तम् ।सकलभुवनमातस्त्राहि माम् ॐ नमस्ते ॥ १ ॥ माहेश्र्वरीमाश्रितकल्पवल्लीमहंभवोच्छेदकरीं भवानीम् ।क्षुधार्तजायातनयाद्दुपेतस्त्वान्नपूर्णे शरणं प्रपद्दे ॥ २ ॥ दारिद्र्यदावानलदह्यमानम्,पाह्यन्नपूर्णे गिरिराजकन्ये ।कृपाम्बुधौ मज्जय मां त्वदीये,त्वपादपद्मार्पितचित्तवृतिम् ॥ ३ ॥ दूत्थन्नपूर्णास्तुतिरत्नमेतत्,श्लोकत्रयं यः पठतीह भक्त्या ।तस्मै ददात्यन्नसमृद्धिमम्बा,श्रियं च विद्दां च यशश्र्च मुक्तिम् ॥ ४ ॥ ॥ इति श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र संपूर्णम् ॥ श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र विशेषताए: श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र के साथ-साथ यदि अन्नपूर्णा आरती का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, Annapurna Stotram यह अष्टकम शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है Annapurna Stotram साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र के पाठ के साथ साथ अन्नपूर्णा चालीसा  और अन्नपूर्णा अष्टकम का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है | Annapurna Stotram और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही माँ अन्नपूर्ण की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

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Narayana Stotram

Sri Lakshmi Narayana Stotram : श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम्….

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Sri Lakshmi Narayana Stotram in Hindi ध्यानम् – चक्रं विद्या वर घट गदा दर्पणम् पद्मयुग्मंदोर्भिर्बिभ्रत्सुरुचिरतनुं मेघविद्युन्निभाभम् ।गाढोत्कण्ठं विवशमनिशं पुण्डरीकाक्षलक्ष्म्योरेकीभूतं वपुरवतु वः पीतकौशेयकान्तम् ॥ १ ॥ शंखचक्रगदापद्मकुंभाऽऽदर्शाब्जपुस्तकम् ।बिभ्रतं मेघचपलवर्णं लक्ष्मीहरिं भजे ॥ २ ॥ विद्युत्प्रभाश्लिष्टघनोपमानौशुद्धाशयेबिंबितसुप्रकाशौ ।चित्ते चिदाभौ कलयामि लक्ष्मी-नारायणौ सत्त्वगुणप्रधानौ ॥ ३ ॥ लोकोद्भवस्थेमलयेश्वराभ्यांशोकोरुदीनस्थितिनाशकाभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ४ ॥ सम्पत्सुखानन्दविधायकाभ्यांभक्तावनाऽनारतदीक्षिताभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां Narayana Stotram नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ५ ॥ दृष्ट्वोपकारे गुरुतां च पञ्च-विंशावतारान् सरसं दधत्भ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां Narayana Stotram नतिरस्तु लक्ष्मीनारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ६ ॥ क्षीरांबुराश्यादिविराट्भवाभ्यांनारं सदा पालयितुं पराभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ७ ॥ दारिद्र्यदुःखस्थितिदारकाभ्यांदयैवदूरीकृतदुर्गतिभ्याम्नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ८ ॥ भक्तव्रजाघौघविदारकाभ्यांस्वीयाशयोद्धूतरजस्तमोभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ९ ॥ रक्तोत्पलाभ्राभवपुर्धराभ्यांपद्मारिशंखाब्जगदाधराभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ १० ॥ अङ्घ्रिद्वयाभ्यर्चककल्पकाभ्यांमोक्षप्रदप्राक्तनदंपतीभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ११ ॥ इदं तु यः पठेत् स्तोत्रं लक्ष्मीनारयणाष्टकम् ।ऐहिकामुष्मिकसुखं भुक्त्वा स लभतेऽमृतम् ॥ १२ ॥ ।। इति श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

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Chaturthi

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time : कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सभी कष्टों से मुक्ति का अचूक उपाय…..

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time: सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान या नए व्यापार की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। वैदिक पंचांग की सटीक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, हर महीने में दो Chaturthi आती हैं; एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इनमें से शुक्ल पक्ष की तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि हर महीने कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली Chaturthi को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। संकष्टी का शाब्दिक अर्थ ही होता है ‘संकटों को हरने वाली’। Chaturthi इस पवित्र दिन जो भी भक्त पूरे सच्चे मन और गहरी आस्था के साथ भगवान गणेश का उपवास रखता है, उसके जीवन की हर बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और भयंकर से भयंकर समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time : कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त….. कृष्णपिङ्गल संकष्टी का अत्यंत गहरा महत्व : The profound significance of Krishnapingala Sankashti. वर्ष 2026 में आषाढ़ माह (पूर्णिमांत हिंदी पंचांग के अनुसार) या ज्येष्ठ माह (अमावस्यांत पंचांग के अनुसार) में पड़ने वाली यह कृष्णपिङ्गल संकष्टी Chaturthi आपके सभी रुके हुए और बिगड़े कार्यों को पूरा करने का एक अद्भुत आध्यात्मिक अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने वाले इंसान को अपार धन, वैभव, उत्तम स्वास्थ्य और असीम यश की प्राप्ति होती है। इस व्रत को पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु में इस Chaturthi को ‘गणेश संकटहरा’ या ‘संकटहरा चतुर्थी’ के भव्य नाम से भी पुकारा जाता है। Chaturthi वहीं दक्षिण भारत के मलयालम कैलेंडर के अनुसार यह व्रत एदवा (Edava) या मिधुना (Midhuna) महीने में आता है, जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार यह आषाढ़ महीने में ही मनाया जाता है। यह एक ऐसा पावन दिन है जब साक्षात भगवान गणेश पृथ्वी पर अपने भक्तों की हर सच्ची मनोकामना को पूर्ण करते हैं और उनके परिवार में अगाध सुख-शांति का स्थायी निवास बनाए रखते हैं। सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त 2026 (Dates & Timings) सनातन धर्म में किसी भी वैदिक उपवास या अनुष्ठान का पूर्ण और अचूक फल तभी प्राप्त होता है जब वह एकदम सही तिथि और शुभ मुहूर्त में किया जाए। साल 2026 में यह पवित्र Chaturthi 3 जुलाई, दिन शुक्रवार को पूरे भारतवर्ष में अत्यंत अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार तिथियों का विवरण इस प्रकार है: व्रत के लिए Chaturthi तिथि का विधिवत आरंभ 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:20 बजे से होगा। इस पावन तिथि का पूर्ण समापन अगले दिन यानी 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:39 बजे होगा। चूंकि यह एक ऐसा विशेष उपवास है जो हमेशा रात के चंद्रोदय (चांद निकलने के समय) के आधार पर तय किया जाता है, इसलिए जिस रात चंद्रमा के दर्शन चतुर्थी तिथि के दौरान होते हैं, उसी दिन यह व्रत मुख्य रूप से रखा जाता है। 3 जुलाई की रात को चंद्रोदय का शुभ समय रात 09:48 बजे (09:48 PM) रहेगा। प्रातः काल सूर्योदय से शुरू होने वाला यह महान और जाग्रत व्रत रात को चंद्र दर्शन करने और उन्हें पवित्र जल का अर्घ्य देने के बाद ही पूरी तरह से संपन्न माना जाता है। भगवान का विशेष स्वरूप और महा पीठ की पूजा : The Special Form of the Deity and Worship at the Maha Peetha पूरे साल में आने वाली हर संकष्टी का अपना एक अलग तांत्रिक महत्व और भगवान गणेश का एक बहुत ही विशेष स्वरूप होता है। इस शुभ अवसर पर कृष्णपिङ्गल Chaturthi के दिन भगवान गणेश के अत्यंत ही तेजस्वी ‘कृष्ण पिङ्गल महा गणपति’ स्वरूप की आराधना पूरे विधि-विधान से की जाती है। इसके साथ ही, पूजा के दौरान जिस परम पवित्र पीठ का विशेष रूप से आह्वान किया जाता है, उसका नाम ‘श्री शक्ति गणपति पीठ’ (Sri Shakti Ganapathi Peetha) है। मान्यता है कि इस सिद्ध पीठ की पूजा करने से इंसान के पिछले कई जन्मों के भारी से भारी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है। इस दिन मंत्रों के उच्चारण के साथ अभिषेक (Abhishekam) करना पूजा का सबसे मुख्य और अनिवार्य अनुष्ठान माना जाता है। नारद पुराण के अनुसार व्रत कथा की महिमा : Glory of Vrat Katha according to Narad Purana नारद पुराण में बहुत ही स्पष्ट रूप से बताया गया है कि संकष्टी के दिन व्रती को पूरे दिन का निर्जल या फलाहार उपवास रखना चाहिए और शाम के समय व्रत कथा को अनिवार्य रूप से पढ़ना या सुनना चाहिए। अपने घर के पूजा कक्ष में इस विशेष पूजा को संपन्न करने से हर प्रकार के भयंकर नकारात्मक प्रभाव और बुरी शक्तियों का हमेशा के लिए नाश हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि प्रत्येक महीने की संकष्टी की अपनी एक अलग और बेहद रहस्यमयी पौराणिक कथा होती है, जिसे सुने बिना इंसान का व्रत बिल्कुल अधूरा माना जाता है। अचूक और सिद्ध पूजा विधि (Puja Vidhi) यदि आप अपने व्रत का पूरा और चमत्कारी फल पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस पूजा विधि का कड़ाई से पालन करें…. प्रातः काल की दिनचर्या: इस Chaturthi पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन ही मन भगवान का ध्यान करते हुए अपने व्रत का दृढ़ संकल्प लें। गणेश जी को प्रिय वस्तुएं: घर के स्वच्छ पूजा स्थल पर भगवान गणेश की सुंदर मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें उनका सबसे प्रिय और मीठा भोग—मोदक, लड्डू और ताजी हरी दूर्वा घास (Durva grass) अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ अर्पित करें। संध्या काल की पूजा: शाम के समय चंद्रोदय से ठीक पहले एक बार फिर से पूजा की पूरी तैयारी करें। शाम की विशेष पूजा में भगवान गणेश जी की प्रतिमा के ठीक बाजू में माता दुर्गा जी की भी मूर्ति या फोटो रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है; इस दिन उनकी संयुक्त

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Rama Stotram

Shri Rama Stotram : श्री राम स्तोत्र….

श्री राम स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Rama Stotram in Hindi आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम् ।लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ १ ॥ आर्तानामार्तिहन्तारं Shri Rama Stotram भीतानां भीतिनाशनम् ।द्विषतां कालदण्डं तं रामचन्द्रं नमाम्यहम् ॥ २ ॥ नमः कोदण्डहस्ताय Shri Rama Stotram सन्धीकृतशराय च ।खण्डिताखिलदैत्याय रामायाऽऽपन्निवारिणे ॥ ३ ॥ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ ४ ॥ अग्रतः पृष्ठतश्चैव Shri Rama Stotram पार्श्वतश्च महाबलौ ।आकर्णपूर्णधन्वानौ रक्षेतां रामलक्ष्मणौ ॥ ५ ॥ सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।गच्छन् ममाग्रतो नित्यं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ ६ ॥ अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात् ।नश्यन्ति सकला रोगास्सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥ ७ ॥ सत्यं सत्यं पुनस्सत्यमुद्धृत्य भुजमुच्यते ।वेदाच्छास्त्रं परं नास्ति न दैवं केशवात् परम् ॥ ८ ॥ शरीरे जर्जरीभूते व्याधिग्रस्ते कलेवरे ।औषधं जाह्नवीतोयं वैद्यो नारायणो हरिः ॥ ९ ॥ आलोड्य सर्वशास्त्राणि विचार्य च पुनः पुनः ।इदमेकं सुनिष्पन्नं ध्येयो नारायणो हरिः ॥ १० ॥ कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।करोमि यद्यत् सकलं परस्मै Shri Rama Stotram नारायणायेति समर्पयामि ॥ ११ ॥ यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देव नारायण नमोऽस्तु ते ॥ १२ ॥ विसर्गबिन्दुमात्राणि Shri Rama Stotram पदपादाक्षराणि च ।न्यूनानि चातिरिक्तानि क्षमस्व पुरुषोत्तम ॥ १३ ॥ ॥ इति श्री राम स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥ श्री राम स्तोत्र विशेषताएँ: श्री राम स्तोत्र के साथ-साथ यदि राम आरती या राम चालीसा का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्री राम स्तोत्र के पाठ के साथ साथ श्री राम स्तुति का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही राम जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री राम स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

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prayata Stotram

Sri Rama Bhujanga-prayata Stotram : श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम्………

श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Sri Rama Bhujanga-prayata Stotram in Hindi विशुद्धं परं सच्चिदानंदरूपंगुणाधारमाधारहीनं वरेण्यम् ।महांतं विभांतं गुहांतं गुणांतंसुखांतं स्वयं धाम रामं प्रपद्ये ॥ 1 ॥ शिवं नित्यमेकं विभुं तारकाख्यंसुखाकारमाकारशून्यं सुमान्यम् ।महेशं कलेशं सुरेशं परेशंनरेशं निरीशं महीशं प्रपद्ये ॥ 2 ॥ यदावर्णयत्कर्णमूलेऽंतकालेशिवो राम रामेति रामेति काश्याम् ।तदेकं परं तारकब्रह्मरूपंभजेऽहं भजेऽहं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ 3 ॥ महारत्नपीठे शुभे कल्पमूलेसुखासीनमादित्यकोटिप्रकाशम् ।सदा जानकीलक्ष्मणोपेतमेकंसदा रामचंद्रं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ 4 ॥ क्वणद्रत्नमंजीरपादारविंदंलसन्मेखलाचारुपीतांबराढ्यम् ।महारत्नहारोल्लसत्कौस्तुभांगंनदच्चंचरीमंजरीलोलमालम् ॥ 5 ॥ लसच्चंद्रिकास्मेरशोणाधराभंसमुद्यत्पतंगेंदुकोटिप्रकाशम् ।नमद्ब्रह्मरुद्रादिकोटीररत्नस्फुरत्कांतिनीराजनाराधितांघ्रिम् ॥ 6 ॥ पुरः प्रांजलीनांजनेयादिभक्तान्स्वचिन्मुद्रया भद्रया prayata Stotram बोधयंतम् ।भजेऽहं भजेऽहं सदा रामचंद्रंत्वदन्यं न मन्ये न मन्ये न मन्ये ॥ 7 ॥ यदा मत्समीपं कृतांतः समेत्यप्रचंडप्रकोपैर्भटैर्भीषयेन्माम् ।तदाविष्करोषि त्वदीयं स्वरूपंसदापत्प्रणाशं सकोदंडबाणम् ॥ 8 ॥ निजे मानसे मंदिरे सन्निधेहिप्रसीद प्रसीद prayata Stotram प्रभो रामचंद्र ।ससौमित्रिणा कैकयीनंदनेनस्वशक्त्यानुभक्त्या च संसेव्यमान ॥ 9 ॥ स्वभक्ताग्रगण्यैः कपीशैर्महीशै–रनीकैरनेकैश्च राम प्रसीद ।नमस्ते नमोऽस्त्वीश राम प्रसीदप्रशाधि प्रशाधि प्रकाशं प्रभो माम् ॥ 10 ॥ त्वमेवासि दैवं परं मे यदेकंसुचैतन्यमेतत्त्वदन्यं न मन्ये ।यतोऽभूदमेयं वियद्वायुतेजोजलोर्व्यादिकार्यं चरं चाचरं च ॥ 11 ॥ नमः सच्चिदानंदरूपाय तस्मैनमो देवदेवाय prayata Stotram रामाय तुभ्यम् ।नमो जानकीजीवितेशाय तुभ्यंनमः पुंडरीकायताक्षाय तुभ्यम् ॥ 12 ॥ नमो भक्तियुक्तानुरक्ताय तुभ्यंनमः पुण्यपुंजैकलभ्याय तुभ्यम् ।नमो वेदवेद्याय चाद्याय पुंसेनमः सुंदरायेंदिरावल्लभाय ॥ 13 ॥ नमो विश्वकर्त्रे नमो विश्वहर्त्रेनमो विश्वभोक्त्रे नमो विश्वमात्रे ।नमो विश्वनेत्रे नमो विश्वजेत्रेनमो विश्वपित्रे नमो विश्वमात्रे ॥ 14 ॥ नमस्ते नमस्ते समस्तप्रपंच–प्रभोगप्रयोगप्रमाणप्रवीण ।मदीयं prayata Stotram मनस्त्वत्पदद्वंद्वसेवांविधातुं प्रवृत्तं सुचैतन्यसिद्ध्यै ॥ 15 ॥ शिलापि त्वदंघ्रिक्षमासंगिरेणुप्रसादाद्धि चैतन्यमाधत्त राम ।नरस्त्वत्पदद्वंद्वसेवाविधाना–त्सुचैतन्यमेतीति किं चित्रमत्र ॥ 16 ॥ पवित्रं चरित्रं विचित्रं त्वदीयंनरा ये स्मरंत्यन्वहं रामचंद्र ।भवंतं भवांतं भरंतं भजंतोलभंते कृतांतं न पश्यंत्यतोऽंते ॥ 17 ॥ स पुण्यः स गण्यः शरण्यो ममायंनरो वेद यो देवचूडामणिं त्वाम् ।सदाकारमेकं चिदानंदरूपंमनोवागगम्यं परं धाम राम ॥ 18 ॥ प्रचंडप्रतापप्रभावाभिभूत–प्रभूतारिवीर प्रभो रामचंद्र ।बलं ते कथं वर्ण्यतेऽतीव बाल्येयतोऽखंडि चंडीशकोदंडदंडम् ॥ 19 ॥ दशग्रीवमुग्रं सपुत्रं समित्रंसरिद्दुर्गमध्यस्थरक्षोगणेशम् ।भवंतं विना राम वीरो नरो वासुरो वाऽमरो वा जयेत्कस्त्रिलोक्याम् ॥ 20 ॥ सदा राम रामेति रामामृतं तेसदाराममानंदनिष्यंदकंदम् ।पिबंतं नमंतं सुदंतं हसंतंहनूमंतमंतर्भजे तं नितांतम् ॥ 21 ॥ सदा राम रामेति रामामृतं तेसदाराममानंदनिष्यंदकंदम् ।पिबन्नन्वहं नन्वहं नैव मृत्यो–र्बिभेमि प्रसादादसादात्तवैव ॥ 22 ॥ असीतासमेतैरकोदंडभूषै–रसौमित्रिवंद्यैरचंडप्रतापैः ।अलंकेशकालैरसुग्रीवमित्रै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 23 ॥ अवीरासनस्थैरचिन्मुद्रिकाढ्यै–रभक्तांजनेयादितत्त्वप्रकाशैः ।अमंदारमूलैरमंदारमालै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 24 ॥ असिंधुप्रकोपैरवंद्यप्रतापै–रबंधुप्रयाणैरमंदस्मिताढ्यैः ।अदंडप्रवासैरखंडप्रबोधै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 25 ॥ हरे राम सीतापते रावणारेखरारे मुरारेऽसुरारे परेति ।लपंतं नयंतं सदाकालमेवंसमालोकयालोकयाशेषबंधो ॥ 26 ॥ नमस्ते सुमित्रासुपुत्राभिवंद्यनमस्ते सदा कैकयीनंदनेड्य ।नमस्ते सदा वानराधीशवंद्यनमस्ते नमस्ते सदा रामचंद्र ॥ 27 ॥ प्रसीद प्रसीद प्रचंडप्रतापप्रसीद प्रसीद प्रचंडारिकाल ।प्रसीद प्रसीद प्रपन्नानुकंपिन्प्रसीद प्रसीद प्रभो रामचंद्र ॥ 28 ॥ भुजंगप्रयातं परं वेदसारंमुदा रामचंद्रस्य भक्त्या च नित्यम् ।पठन्संततं चिंतयन्स्वांतरंगेस एव स्वयं रामचंद्रः स धन्यः ॥ 29 ॥ ॥ इति श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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Mangalashasanam Stotra

Shri Ram Mangalashasanam Stotra : श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र….

श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Ram Mangalashasanam Stotra in Hindi मंगलं कौशलेन्द्राय महनीयगुणाब्धय ।चक्रवर्तितनूजाय सार्वभौमाय मंगलम् ।। 1 ।। वेदवेदान्तवेदाय मेघश्यामलमूर्तये ।पुंसां मोहनरूपाय पुण्यश्लोकाय मंगलम् ।। 2 ।। विश्वामित्रान्तरंगाय मिथिलानगरीपते: ।भाग्यानां परिपाकाय भव्यरूपाय मंगलम् ।। 3 ।। पितृभक्ताय सततं भ्रातृभि: सह सीतया ।नन्दिताखिललोकाय रामभद्राय मंगलम् ।। 4 ।। त्यक्तसाकेतवासाय Shri Ram Mangalashasanam Stotra चित्रकूटविहारिणे ।सेव्याय सर्वयमिनां धीरोदयाय मंगलम् ।। 5 ।। सौमित्रिणा च जानक्या चापबाणासिधारिणे ।संसेव्याय सदा भक्त्या स्वामिने मम मंगलम् ।। 6 ।। दण्डकारण्यवासाय Shri Ram Mangalashasanam Stotra खरदूषणशत्रवे ।गृधृराजाय भक्ताय मुक्तिदायास्तु मंगलम् ।। 7 ।। सादरं शबरीदत्तफलमूलाभिलाषिणे ।सौलभ्यपरिपूर्णाय सत्त्वोद्रिक्ताय मंगलम् ।। 8 ।। हनुमत्समवेताय हरीशाभीष्टदायिने ।बालिप्रमथनायास्तु महाधीराय मंगलम् ।। 9 ।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लंघितसिन्धवे ।जितराक्षसराजाय रणधीराय मंगलम् ।। 10 ।। विभीषणकृते प्रीत्या लंकाभीष्टप्रदायिने ।सर्वलोकशरण्याय श्रीराघवाय मंगलम् ।। 11 ।। आसाध नगरीं दिव्यामभिषिक्ताय सीतया ।राजाधिराजराजाय रामभद्राय मंगलम् ।। 12 ।। ब्रह्मादिदेवसेव्याय ब्रह्मण्याय महात्मने ।जानकीप्राणनाथाय रघुनाथाय मंगलम् ।। 13 ।। श्रीसौम्यजामातृमुने: कृपयास्मानुपेयुषे ।महते मम नाथाय रघुनाथाय मंगलम् ।। 14 ।। मंगलाशासनपरैर्मदाचार्यपुरोगमै: सर्वैश्च ।पूर्वैराचार्यै: सत्कृतायास्तु मंगलम् ।। 15 ।। रम्यजामातृमुनिना मंगलाशासनं कृतम् ।त्रैलोक्याधिपति: श्रीमान् करोतु मंगलं सदा ।। 16 ।। ।। इति श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Matangi Stotra

Shri Raj Matangi Stotra : श्री राज मातंगी स्तोत्र….

श्री राज मातंगी स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Raj Matangi Stotra in Hindi मातङ्गीं मधुपानमत्तनयनां मातङ्ग सञ्चारिणींकुम्भीकुम्भविवृत्तपीवरकुचां कुम्भादिपात्राञ्चिताम् ।ध्यायेऽहं मधुमारणैकसहजां ध्यातुस्सुपुत्रप्रदां ।शर्वाणीं सुरसिद्धसाध्यवनिता संसेविता पादुकाम् ॥ १ ॥ मातङ्गी महिषादिराक्षसकृतध्वान्तैकदीपो मणिःमन्वादिस्तुत मन्त्रराजविलसत्सद्भक्त चिन्तामणिः ।श्रीमत्कौलिकदानहास्यरचना चातुर्य राकामणिःदेवित्वं हृदये वसाद्यमहिमे मद्भाग्य रक्षामणिः ॥ २ ॥ जयदेवि विशालाक्षि जय सर्वेश्वरि जय ।जयाञ्जनगिरिप्रख्ये महादेव प्रियङ्करि ॥ ३ ॥ महाविश्वेश दयिते जय ब्रह्मादि पूजिते ।पुष्पाञ्जलिं प्रदास्यामि गृहाण कुलनायिके ॥ ४ ॥ जयमातर्महाकृष्णे जय नीलोत्पलप्रभे ।मनोहारि नमस्तेऽस्तु नमस्तुभ्यं वशङ्करि ॥ ५ ॥ जय सौभाग्यदे नॄणां Matangi Stotra लोकमोहिनि ते नमः ।सर्वैश्वर्यप्रदे पुंसां सर्वविद्याप्रदे नमः ॥ ६ ॥ सर्वापदां नाशकरीं सर्वदारिद्र्यनाशिनीम् ।नमो मातङ्गतनये नमश्चाण्डालि कामदे ॥ ७ ॥ नीलाम्बरे नमस्तुभ्यं नीलालकसमन्विते ।नमस्तुभ्यं महावाणि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ८ ॥ महामातङ्गि पादाब्जं तव Matangi Stotra नित्यं नमाम्यहम् ।एतदुक्तं महादेव्या मातङ्गयाः स्तोत्रमुत्तमम् ॥ ९ ॥ सर्वकामप्रदं नित्यं यः पठेन्मानवोत्तमः ।विमुक्तस्सकलैः पापैः समग्रं पुण्यमश्नुते ॥ १० ॥ राजानो दासतां यान्ति नार्यो दासीत्वमाप्नुयुः ।दासीभूतं जगत्सर्वं शीघ्रं तस्य भवेद् ध्रुवम् ॥ ११ ॥ महाकवीभवेद्वाग्भिः साक्षाद् वागीश्वरो भवेत् ।अचलां श्रियमाप्नोति अणिमाद्यष्टकं लभेत् ॥ १२ ॥ लभेन्मनोरथान् सर्वान् त्रैलोक्ये नापि दुर्लभान् ।अन्ते शिवत्वमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥ १३ ॥ ॥ इति श्री राज मातंगी स्तोत्र सपूर्णम् ॥

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Radhakrishna Stotram

Shri Radhakrishna Stotram : श्री राधा कृष्ण स्तोत्र….

श्री राधा कृष्ण स्तोत्र हिंदी पाठ: Shri Radhakrishna Stotram in Hindi वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम् ।सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम् ॥ १ ॥ राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम् ।राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम् ॥ २ ॥ राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम् ।राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम् ॥ ३ ॥ राधाहृत्पद्ममध्ये च Radhakrishna Stotram वसन्तं सन्ततं शुभम् ।राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम् ॥ ४ ॥ ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम् ।तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम् ॥ ५ ॥ निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम् ।नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम् ॥ ६ ॥ यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम् ।योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ॥ ७ ॥ बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम् ।वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम् ॥ ८ ॥ योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ।गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम् ॥ ९ ॥ हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम् ।पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः ॥ १० ॥ ॥ इति श्री राधा कृष्ण स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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