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Guru Purnima 2024: 20 या 21 जुलाई? कब है गुरु पूर्णिमा ? 

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई दिन शनिवार को शाम 05 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि की समाप्ति अगले दिन 21 जुलाई, 2024 दिन रविवार को दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर होगी। उदयातिथि को देखते हुए गुरु पूर्णिमा का पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा। Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष, गुरु पूर्णिमा 21 जुलाई 2024 को रविवार के दिन मनाई जाएगी।……Guru Purnima Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का महत्व Guru Purnima गुरु पूर्णिमा के उत्सव Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का संदेश Guru Purnima गुरु पूर्णिमा हमें ज्ञान, शिक्षा और गुरुओं के महत्व को याद दिलाता है। यह हमें सिखाता है कि हमेशा अपने गुरुओं का सम्मान करें और उनसे ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें। भगवान विष्णु के मंत्र 1. ॐ नमोः नारायणाय।। 2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय।। 3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।। 4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्।।

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Kokila Vrat 2024 Date: जुलाई में कब रखा जाएगा Kokila Vrat 2024? नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले कोकिला व्रत ही किया था. इस व्रत के पुण्य प्रताप से माता सती और महादेव परिणय सूत्र में बंधे थे. धार्मिक मान्यता है कि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत करने से विवाहित महिलाओं को सुख-सौभाग्य और वंश में वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. यह पावन दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती को समर्पित है। जो व्यक्ति विधि-विधान के साथ ये व्रत रखता है भगवान उसके ऊपर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। Kokila Vrat Kab Hai 2024: हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर कोकिला व्रत किया जाता है. यह व्रत देवों के देव भगवान शिव और उनकी अर्धांगिनी माता पार्वती को समर्पित माना गया है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है. कोकिला व्रत करने से अविवाहित महिलाओं को मनचाहा वर मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के पुण्य प्रताप से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है. अगर आप भी मनचाहा वर पाना चाहती हैं तो ऐसे में इस साल कोकिला व्रत कब रखा जाएगा, यह पता होना आपके लिए जरूरी है. इस साल कोकिला व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. कब है कोकिला व्रत 2024? (Kokila Vrat 2024 date) कोकिला व्रत इस साल 20 जुलाई, 2024 को रखा जाएगा।आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई को सुबह 5:59 बजे शुरू होगी और 21 जुलाई को सुबह 4:43 बजे समाप्त होगी।व्रत का संकल्प 20 जुलाई को सुबह 5:36 बजे से 6:21 बजे के बीच लिया जा सकता है।भगवान शिव की पूजा 20 जुलाई को प्रदोष काल में शाम 4:33 बजे से 8:08 बजे के बीच की जा सकती है। Kokila Vrat 2024 शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत का महत्व Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत की पूजा विधि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के नियम यह भी ध्यान रखें (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Skanda Sashti Vrat 2024: स्कंद षष्ठी पर इस शुभ मुहूर्त में विधान से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली!

Skanda Sashti स्कंद षष्ठी, जिसे षष्ठी या कुमार षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, का जन्मोत्सव है। यह त्योहार प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। स्कंद षष्ठी 2024 तिथियां और समय दिनांक तिथि प्रारंभ तिथि समाप्त हिन्दू मास जनवरी 16, 2024, मंगलवार 02:16 AM, जनवरी 16 11:57 PM, जनवरी 16 पौष फरवरी 14, 2024, बुधवार 12:09 AM, फरवरी 14 10:12 AM, फरवरी 15 माघ मार्च 15, 2024, शुक्रवार 11:25 PM, मार्च 14 10:09 PM, मार्च 15 फाल्गुन अप्रैल 13, 2024, शनिवार 12:04 AM अप्रैल 13 11:43 AM, अप्रैल 14 चैत्र मई 13, 2024, सोमवार 02:03 AM, मई 13 02:50 AM, मई 14 वैशाख जून 11, 2024, मंगलवार 05:27 PM, जून 11 07:16 PM, जून 12 ज्येष्ठ जुलाई 11, 2024, बृहस्पतिवार 10:03 AM, जुलाई 11 12:32 PM, जुलाई 12 आषाढ़ अगस्त 10, 2024, शनिवार 03:14 AM, अगस्त 10 05:44 AM, अगस्त 11 श्रावण सितम्बर 9, 2024, सोमवार 07:58 PM, सितम्बर 08 09:53 PM, सितम्बर 09 भाद्रपद अक्टूबर 8, 2024, मंगलवार 11:17 AM, अक्टूबर 08 12:14 PM, अक्टूबर 09 आश्विन नवम्बर 7, 2024, बृहस्पतिवार 12:41 AM, नवम्बर 07 12:34 AM, नवम्बर 08 कार्तिक दिसम्बर 6, 2024, शुक्रवार 12:07 PM, दिसम्बर 06 11:05 PM, दिसम्बर 07 मार्गशीर्ष Skanda Sashti Vrat स्कंद षष्ठी पर ऐसे करें पूजा इन बातों का रखें खास ध्यान Skanda Sashti Vrat महत्व:भगवान कार्तिकेय की पूजा: स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय की पूजा करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।बुद्धि और ज्ञान: भगवान कार्तिकेय को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान और विद्या प्राप्ति में सहायता मिलती है।विजय: भगवान कार्तिकेय को देवसेनापति भी कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से विजय प्राप्ति में सहायता मिलती है।कष्टों का नाश: स्कंद षष्ठी व्रत रखने और भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से समस्त कष्टों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।यह भी जानें: स्कंद षष्ठी के दिन कुछ लोग 24 घंटे का निर्जला व्रत भी रखते हैं।स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। योगिनी एकादशी : ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति का व्रत  स्कंद षष्ठी के पीछे का इतिहास भगवान कार्तिकेयन को दक्षिण भारत में हिंदुओं द्वारा भगवान गणेश के छोटे भाई के रूप में माना जाता है, हालांकि उन्हें उत्तर भारत में हिंदुओं का बड़ा भाई माना जाता है। भगवान कार्तिकेय के जन्म और सुरपद्म की हत्या के आसपास एक पौराणिक कथा है। एक बार, तीन राक्षसों, सुरपदमन, सिम्हामुखन और तारकासुरन ने दुनिया भर में तबाही मचाई। सुरपदमन को भगवान शिव से वरदान मिला था कि शिव की क्षमताएं ही उन्हें नष्ट कर देंगी। इससे उसकी ताकत इतनी बढ़ गई कि वह और उसके भाई-बहन मानवता और देवों के लिए खतरा बन गए। जैसा कि देवता इन राक्षसों से खुद को मुक्त करना चाहते हैं, वे भगवान शिव के पास जाते हैं, जो केवल उस राक्षस को हरा सकते हैं। हालाँकि, मिशन उनके लिए और अधिक कठिन हो गया क्योंकि शिव एक गहरी एकाग्रता में लीन थे। परिणामस्वरूप, देवों ने शिव के कामुक जुनून को उत्तेजित करने और इस तरह उन्हें ध्यान से विचलित करने के लिए प्रेम के देवता, मनमाता को भेजा। ममता की एकाग्रता तब भंग हुई जब उन्होंने अपना पुष्पसारम (फूलों का बाण) भगवान शिव की ओर छोड़ा। इससे शासक भड़क गया और उसने मिनामाता को जलाकर राख कर दिया। बाद में, सभी देवों के कहने पर, शिव ने मनमाता को पुनर्जीवित किया और अपनी सभी दानव-हत्या क्षमताओं से संपन्न एक बच्चे को जन्म देने के लिए चुना। भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से छह चिंगारी निकाली, जिन्हें अग्नि के देवता सरवण नदी के ठंडे पानी में ले गए, जहां छह चिंगारी छह पवित्र बच्चों के रूप में प्रकट हुईं। कार्तिका बहनें (नक्षत्र कार्तिका या प्लीएड्स के छह सितारों में से) नाम की छह कन्याओं ने इन शिशुओं की देखभाल करने की सहमति दी। जब माता पार्वती ने आकर तालाब में पल रहे छह बच्चों को दुलार किया, तो वे छह मुख, बारह हाथ और दो पैरों वाले एक बच्चे में मिल गए। इस भव्य आकृति को कार्तिकेय नाम दिया गया था। माता पार्वती ने उनकी योग्यता, पराक्रम और तमिल में वेल नामक भाला प्रदान किया। जैसे-जैसे वह बड़े होते गए कार्तिकेयन एक दार्शनिक और योद्धा के रूप में विकसित हुए। वह ज्ञान और करुणा का अवतार बन गया और युद्ध की एक विशाल समझ रखता था। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने सुरपद्मन और उनके भाइयों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। भगवान ने सुरपदमन के भाइयों सिम्हामुखन और तारकासुरन की हत्या राक्षसों के शहर जाने के रास्ते में की थी। फिर भगवान और शैतान के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसके दौरान उन्होंने सुरपद्मन के वेल को काट दिया। सुरपद्मन की लाश से एक मोर और एक मुर्गा निकला, पूर्व सिद्धांत के वाहन (वाहन) के रूप में सेवा कर रहा था और बाद में उसके झंडे पर बुराई पर विजय के संकेत के रूप में था। कार्तिकेय ने Skanda Sashti Vrat षष्ठी को सुरपद्म को हराया। इसके अतिरिक्त, यह माना जाता है कि जब सुरपद्मन को गंभीर चोटें आईं, तो उसने भगवान से उसे बख्शने की भीख मांगी। इसलिए मुरुगा ने उसे इस शर्त पर मोर में बदल दिया कि वह सदा के लिए उसका वाहन बना रहेगा। स्कंद षष्ठी मंत्र: स्कंद षष्ठी व्रत में शक्तिशाली स्कंद षष्ठी मंत्र का जाप करें। निम्न शक्तिशाली स्कंद षष्ठी मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें:- ॐ सरवणभावाय नमः थुथिपोर्कु वल्विनाइपोम थूनबम्पोम नेन्जिल पाथिपोर्कु सेल्वम पलिथुक कैथीथोंगम निश्चयियम कैकूडम निमलार अरुल कण्थर षष्ठी कवचम ठनै स्कंद षष्ठी: निष्कर्ष स्कंद षष्ठी तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है। इन दिनों, तिरुचेंदूर में भगवान सुब्रमण्य को समर्पित मंदिर में एक भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है, और त्योहार को पूरा करने के लिए, सूरा संहार, या भगवान स्कंद द्वारा राक्षसों के वध की घटना को आज भी दोहराया जाता है। इस दिन, भक्त इस भव्य आयोजन को देखने के लिए आते हैं और भगवान स्कंद का आशीर्वाद लेते हैं।

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Sawan 2024: सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना

Sawan सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। Sawan सावन 2024 में शिवलिंग पूजा की विधि दी गई है: सामग्री: विधि: Sawan शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। कुछ विशेष बातें: इन उपायों से आपकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी और भगवान शिव आप पर सदैव अपनी कृपा रखेंगे। सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ? अतिरिक्त जानकारी: Sawan सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से आपको निश्चित रूप से शुभ फल प्राप्त होंगे। डिस्क्लेमर  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

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Sawan 2024:सावन में इस प्रकार रखे व्रत नोट कर लें इस बार कब-कब पड़ेंगे सोमवार

सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा करना और व्रत रखना महाफल माना जाता है। साल 2024 में सावन मास 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त तक चलेगा। इस साल सावन में 5 सोमवार आएंगे। Sawan 2024 सावन सोमवार व्रत विधि: सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराएं। बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल और भांग अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। दिन भर फलाहार करें। शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करें। Sawan पहला सावन सोमवार सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई के दिन ही मनाया जाएगा, इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूध, बेलपत्र और धतूरा जरूर चढ़ाएं और इसके बाद शिवलिंग की परिक्रमा करें. Sawan दूसरा सावन सोमवार सावन का दूसरा सोमवार 29 जुलाई को मनाया जाएगा. इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चे दूध का अभिषेक करना चाहिए, इससे भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते हैं. शिवलिंग की पूजा के जान लीजिए नियम MAHASHIVRATRI Sawan तीसरा सावन सोमवार सावन का तीसरा सोमवार 5 अगस्त को पड़ रहा है. सावन के तीसरे सोमवार में आप किसी प्रसिद्ध शिव मंदिर में जा सकते हैं या घर में ही मिट्टी की शिवलिंग बनाकर या अपने घर के शिवलिंग की ही विधि-विधान से पूजा अर्चना करके भोलेनाथ का आशीर्वाद पा सकते हैं. Sawan चौथा सावन सोमवार सावन का चौथा सोमवार 12 अगस्त के दिन पड़ रहा है. कहते सावन के चौथे सोमवार पर शिवलिंग पर घी अर्पित करना चाहिए, इसके बाद शुद्ध जल या गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी दुखों और कष्टों का नाश होता है. Sawan पांचवा सावन सोमवार सावन का पांचवा और आखिरी सोमवार 29 अगस्त के दिन मनाया जाएगा. कहते हैं सावन के आखिरी सोमवार के दिन शाम के समय शिवजी और पार्वती जी की आरती करने के साथ ही ओम गौरी शंकराय नमः  और ॐ नमः पार्वती पतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए : What should be done in the month of Ashadh

आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए आषाढ़ मास, हिंदू पंचांग का चौथा महीना, भगवान विष्णु और देवराज इंद्र की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक यह महीना, धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और व्रतों के आयोजन के लिए प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं कि आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए: धार्मिक महत्व: त्यौहार और उत्सव: अन्य गतिविधियां: आषाढ़ मास में कुछ महत्वपूर्ण बातें: यह माना जाता है कि आषाढ़ मास में किए गए सभी कार्य शुभ फल देते हैं। इस पवित्र महीने में किए गए धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और दान पुण्य, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाते हैं।

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Vat Savitri Vrat Date 2024: कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त, विधि और व्रत का महत्व

वट सावित्री व्रत, जिसे वट पूर्णिमा या सावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है, जेष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। वट सावित्री व्रत जेष्ट कृष्ण पक्ष के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. हिंदू धर्म में विवाहित स्त्रियां अपने पति की दिर्घआयु के लिए विभिन्न प्रकार के व्रतों का पालन करती है. वट सावित्री व्रत भी सौभाग्य प्राप्ति के लिए एक बड़ा व्रत माना जाता है. इसके साथ सत्यवान सावित्री की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. जिसमें सावित्री ने अपने चतुराई और धर्म के साथ यमराज से लड़कर अपने पति सत्यवान के प्राण बचाकर वापस ले आई थी. वट सवित्री व्रत तिथि और मुहूर्त Vat Savitri Vrat Date 2024 पंचांग के अनुसार, इस साल वट सावित्री व्रत इस साल अमावस्या को गुरुवार, 6 जून 2024 को मनाया जाएगा. व्रत मुहूर्त की 05 जून 2024 को शाम 07:54 बजे से शुरू होकर 06 जून 2024 को शाम 06:07 बजे समाप्त हो जाएगा. पूजा विधि व्रत का महत्व: यह व्रत सावित्री और सत्यवान की अटूट प्रेम और पतिव्रता की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। उनकी पतिव्रता और अटूट श्रद्धा के कारण ही यह व्रत महिलाओं के लिए पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत की विधि: वट वृक्ष पूजन मंत्र वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ का पूजन किया जाता है और पूजन के बाद कथा सुनने के साथ कुछ मंत्रों का जाप करना भी फलदायी माना गया है. अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते। पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।। यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले। तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।। वट सावित्री व्रत का महत्व हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना गया है. बरगद का वृक्ष एक दीर्घजीवी यानी लंबे समय तक जीवित रहने वाला विशाल वृक्ष है. इसलिए इसे अक्षय वृक्ष भी कहते हैं. पुराणों के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों देवताओं का वास है. इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मान्यता है कि जो भी सुहागन स्त्री वट सावित्री व्रत करती है. उसे अखंड सौभाग्य का फल मिलता है और उसके सभी कष्ट दूर होते हैं.

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Akshaya Tritiya 2024:अक्षय तृतीया पर करें ये 6 शुभ काम, पाएंगे धन और रहेगा मंगल ही मंगल

अक्षय तृतीया का महत्व अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था। इसी दिन सूर्यदेव ने भी गंगा नदी को स्वर्ग से धरती पर उतारा था। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल अक्षय होता है, अर्थात कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया का पर्व इस बार 10 मई दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा, यह पर्व हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ व धार्मिक कार्यों का अक्षय फल मिलता है। साथ ही इस दिन शुभ व मांगलिक कार्य करने के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं है। अक्षय तृतीया पर इस बार गजकेसरी योग, रवि योग समेत कई शुभ फलदायी योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व भी बढ़ गया है। अक्षय तृतीया पर वैसे तो कई शुभ कार्य किए जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे कार्य हैं, जिनको हर व्यक्ति को करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में मंगल ही मंगल और सुख-शांति बनी रहती है और पूरे साल धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है। अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें और पीले फूल अर्पित करें और माता लक्ष्मी को सफेद व गुलाबी रंग के फूल अर्पित करें। इसके बाद घी के 9 दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करें। अक्षय तृतीया के दिन करें ये पाठ अक्षय तृतीया के दिन विष्णु सहस्त्रनाम और श्री सूक्त का पाठ अवश्य करना चाहिए। साथ ही पास के किसी धार्मिक स्थल पर पूरे परिवार के साथ दर्शन करने भी अवश्य जाएं। ऐसा करने से आपके जीवन में धन, पद, यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। वहीं जो लोग किसी रोग से काफी लंबे समय से पीड़ित हैं, वे अक्षय तृतीया के दिन रामरक्षा स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।

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Akshaya Tritiya 2024:अक्षय तृतीया पाएंगे धन और रहेगा मंगल ही मंगल

अक्षय तृतीया हिन्दू पंचांग का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 10 मई 2024 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया का महत्व अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था। इसी दिन सूर्यदेव ने भी गंगा नदी को स्वर्ग से धरती पर उतारा था। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल अक्षय होता है, अर्थात कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन किए जाने वाले प्रमुख कार्य अक्षय तृतीया की कथा अक्षय तृतीया के साथ कई कथाएं जुड़ी हुई हैं। अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त अक्षय तृतीया के दिन का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है: अक्षय तृतीया के दिन कुछ महत्वपूर्ण बातें अक्षय तृतीया का पर्व अक्षय तृतीया का पर्व पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। दान-पुण्य करते हैं और सोना-चांदी खरीदते हैं। अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं मैं आपको और आपके परिवार को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। इस शुभ दिन पर आप सभी की मनोकामनाएं पूरी हों। #AkshayaTritiya #AuspiciousAkshayaTritiya #CelebrationAkshayaTritiya #BenefitsOfAkshayaTritiya

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राम नवमी के दिन करें ये काम, बरसेगी मां दुर्गा की कृपा ramnavmi

हिंदू धर्म में भगवान राम के प्रति लोगों में अटूट श्रद्धा और भक्ति है. राम नवमी का पर्व भगवान राम को समर्पित है, यह पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. प्रत्येक वर्ष चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है. भगवान राम की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु रामनवमी पर भगवान राम की विशेष पूजा अर्चना करते हैं. इस साल 2024 में रामनवमी 17 अप्रैल को मनाई जाएगी. राम नवमी का महत्व: राम नवमी की पूजा: राम नवमी का व्रत: राम नवमी को शाम के समय किए जाने वाले कुछ उपाय धन लाभ के लिए धन लाभ के लिए राम नवमी की शाम को एक लाल कपड़ा लें और उस लाल कपड़े में 11 गोमती चक्र, 11 कौड़ी, 11 लौंग और 11 बताशे बांधकर मां लक्ष्मी और भगवान राम को अर्पित करें. एक कटोरी में जल लेकर रामरक्षा मंत्र ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्रीं नम:’ का 108 बार जाप करें. इस अभिमंत्रित जल को घर के सभी कोने में छिड़क दें. संतान प्राप्ति के लिए एक नारियल लें और उसको लाल कपड़े में लपेटकर मां सीता को अर्पित कर दें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें. सुख-शांति के लिए दरबार के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं और ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का 108 बार जाप करें. रोग मुक्त होने के लिए राम नवमी की शाम को किसी भी हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और ‘ॐ हनुमते नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए रामनवमी को शाम के समय भगवान राम और माता सीता को हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें और ‘ॐ जय सीता राम’ का 108 बार जाप करें. रामनवमी के दिन न करें ये काम अगर आप चाहते हैं कि आपके द्वारा रामनवमी पर किए गए उपाय का परिणाम आपको जल्दी मिले तो रामनवमी के दिन कुछ काम आपको बिल्कुल नहीं करने चाहिए. जैसे राम नवमी के दिन किसी भी तरह के तामसिक भोजन, मांस, मदिरा आदि का सेवन बिल्कुल भी न करें. मन को शुद्ध रखें, किसी का बुरा न सोचें, क्रोध, झूठ और हर तरह की बुराई से दूर रहें और किसी को भी को नुकसान न पहुंचाएं, सभी के साथ प्रेम पूर्वक रहें.

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महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को ये चीजें करें अर्पित, जीवन में नहीं आएंगी मुश्किलें

महाशिवरात्रि पूजा विधि: महाशिवरात्रि भगवान शिव का सबसे पवित्र त्यौहार है, जो हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 2024 में 8 मार्च दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन लोग व्रत रखकर भगवान शिव की विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और घर परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रार्थना करते हैं. इस दिन महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, धतूरा, अक्षत्, चंदन आदि अर्पित किए जाते हैं ताकि भोलेनाथ को जल्दी प्रसन्न किया जा सके और महादेव प्रसन्न होकर हमारी मनोकामनाओं को पूरा करें. महाशिवरात्रि के अवसर पर आप भगवान भोलेनाथ को उनके प्रिय भोग लगाकर भी उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. उनको भोग अर्पित करने से सुख, संतान की प्राप्ति होती है और दुख दूर होते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को भांग जरूर अर्पित करें. भगवान शिव को भांग इसलिए चढ़ाई जाती है कि जब शिव ने विष का पान किया था. तब उनके उपचार के लिए कई तरह की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया गया था जिसमें भांग भी शामिल थी. इस वजह से हर साल शिवरात्रि के मौके पर भांग के पत्ते या भांग को पीसकर दूध या जल में घोलकर भोलनाथ का अभिषेक किया जाता है. इससे लोगों को रोग दोष के छुटकारा मिलता है. पूजन सामग्री: पूजन विधि: व्रत विधि: महाशिवरात्रि पूजा के लाभ: महत्वपूर्ण बातें: यह भी ध्यान रखें: दूर होंगे कष्ट जीवन में कष्टों के निवारण के लिए शिवलिंग पर आक का फूल भी अर्पित किया जाता है. आक का फूल और पत्ता दोनों ही भगवान भोलेनाथ को बेहद प्रिय है. मान्यता है कि जो भक्त भगवान शिव को आक के पुष्प और पत्ते अर्पित करते हैं. भगवान शिव उसके दैहिक, दैविक और भौतिक सभी तरह के कष्ट हर लेते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. भोलेनाथ जरूर चढ़ाएं भस्म भगवान शिव की पूजा में भस्म का उपयोग करना बहुत शुभ माना जाता है. महाशिवरात्रि के दिन विशेष तौर पर इसे शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी का प्रमुख वस्त्र भस्म को भी माना जाता है, क्योंकि उनका पूरा शरीर भस्म से ढका रहता है. इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर भस्म जरूर चढ़ाएं.

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बसंत पंचमी के दिन ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा, देवी सरस्वती होंगी प्रसन्न

सनातन धर्म में ज्ञान की देवी मां सरस्वती के लिए बसंत पंचमी vasant panchami का दिन बेहद खास माना जाता है। इसे श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल बसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी को मनाया जाएगा। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन विधिपूर्वक मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बसंत पंचमी पूजा सामग्री बसंत पंचमी 2024 का शुभ मुहूर्त दैनिक पंचांग के मुताबिक, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से होगा और इसके अगले दिन यानी 14 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर तिथि का समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस बार बसंत पंचमी 14 फरवरी को मनाई जाएगी। आप बसंत पंचमी के दिन सुबह 7 बजकर 01 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक के बीच में मां सरस्वती की पूजा कर सकते हैं।

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