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Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट

Ekadashi Date List 2025:धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत (Ekadashi Date List 2025) करने से साधक को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। वैष्णव समाज के लोग एकादशी के दिन व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। 2025 Ekadashi Vrat Date List: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बता दें कि प्रत्येक महीन में दो बार एकादशी का व्रत आता है एक कृष्ण पक्ष को और दूसरा शुक्ल पक्ष को। दोनों ही एकादशी व्रत का खास महत्व होता है। सालभर में 24 एकादशी आती हैं। मान्यताओं के मुताबिक, पूरे साल में आने वाली सभी Ekadashi Date List 2025 एकादशी व्रत का फल अलग-अलग मिलता है। तो आइए अब जानते हैं साल 2025 में आने वाली सभी एकादशी व्रत की तिथियों की पूरी लिस्ट। Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में पड़ने वाली एकादशी की तिथियां जनवरी 2025 एकादशी January 2025 Ekadashi व्रत डेट फरवरी 2025 एकादशी व्रत मार्च 2025 एकादशी व्रत अप्रैल 2025 एकादशी व्रत मई 2025 एकादशी व्रत जून 2025 एकादशी व्रत जुलाई 2025 एकादशी व्रत अगस्त 2025 एकादशी व्रत सितंबर 2025 एकादशी व्रत अक्टूबर 2025 एकादशी व्रत नवंबर 2025 एकादशी व्रत दिसंबर 2025 एकादशी व्रत Ekadashi Date List 2025:एकादशी व्रत का महत्व एकादशी का व्रत करने से जातक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और घर में सदैव उन्नति, संपन्न, सुख-समृद्धि बनी रहती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना भी जरूर करें अन्यथा आपको पूजा का पूरा फल नहीं मिलेगा। मां लक्ष्मी की उपासना करने से धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।) 

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Saphala Ekadashi 2024: साल की आखिरी एकादशी पर इस विधि से करें पूजा, हर कार्य में मिलेगी सफलता

Saphala Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो हर माह में दो बार आती हैं। Saphala Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो हर माह में दो बार आती हैं। मान्यताओं के अनुसार सभी एकादशी अपना विशेष महत्व रखती हैं, परंतु सफला को सबसे प्रमुख माना गया है। पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की आराधना करने पर सभी कार्यों में सफलता हासिल होती हैं। कहते हैं कि सफला एकादशी पर लंबे समय से रुके हुए कार्यों को करने पर उनमें सफलता अवश्य मिलती हैं। Saphala Ekadashi 2024 धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सफला एकादशी अपने में ही सफलता के अर्थ से परिपूर्ण है, इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना से साधक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं। Saphala Ekadashi 2024:सफला एकादशी तिथि 2024 पौष माह के कृष्ण पक्ष की Saphala Ekadashi 2024 एकादशी तिथि की शुरुआत 25 दिसंबर 2024 को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 27 दिसंबर को रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। शुभ योग Saphala Ekadashi 2024 पंचांग के अनुसार 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी के दिन सुकर्मा योग का निर्माण हो रहा है, जो रात 10 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगा। सफला एकादशी पर स्वाती नक्षत्र भी बनेगा, जो 18:09 मिनट तक रहेगा। Saphala Ekadashi 2024 इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:42 मिनट तक है।  सफला एकादशी पूजा मुहूर्त Saphala Ekadashi puja muhurat सफला एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। आप इस अवधि में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। पूजा विधि Saphala Ekadashi Puja vidhi भगवान विष्णु की आरतीॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥ तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥ तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥ तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥ जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥ डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

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Utpanna Ekadashi Puja Muhurat : उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता की उत्पति मानी जाती है। शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्ण की विधि- विधान से पूजा की जाती है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता उत्पन्न हुईं थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम जाना जाता है। शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं। उत्पन्ना एकादशी तिथि | Utpanna Ekadashi Date पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है. उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त | Utpanna Ekadashi Puja Muhurat पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन करें ये काम Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन न करें ये काम उत्पन्ना एकादशी का महत्व | Utpanna Ekadashi Significance मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि अगले जन्म में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी पर करें मां तुलसी की खास पूजा, घर में बनी रहेगी बरकत

उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2024 Date And Time) के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 26 नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। Utpanna Ekadashi 2024:सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पावन माना गया है। उत्पन्ना एकादशी यह दिन श्री हरि की पूजा के लिए बेहद खास होता है। इस पावन तिथि पर सभी विष्णु भक्त उपवास रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही द्वादशी तिथि पर अपना व्रत खोलते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी तिथि (Utpanna Ekadashi 2024) यानी 26 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन देवी तुलसी की पूजा का भी महत्व है। अगर आप जीवन में आ रही किसी भी समस्या से लगातार परेशान हैं, तो आपको इस एकादशी पर देवी तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। मां तुलसी की पूजा का महत्व उत्पन्ना एकादशी मां तुलसी को वैष्णव धर्म में विष्णु भगवान की पत्नी माना गया है। उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी का पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे पर दीपक जलाने और विशेष मंत्रों का जाप करने से घर में बरकत बनी रहती है। Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट पूजन विधि उत्पन्ना एकादशी के फायदे उत्पन्ना एकादशी फिर पांच दीपक देवी के सामने जलाने चाहिए और उनकी 7 बार परिक्रमा पूरी करके उनके 108 नामों का जाप (Maa Tulsi Ke 108 Naam) करना चाहिए, जो यहां पर दिए गए हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और अपार धन की प्राप्ति होगी। ।।मां तुलसी के 108 नाम।। (Maa Tulsi Ke 108 Naam) 1.ॐ श्री तुलस्यै नमः। 2.ॐ नन्दिन्यै नमः। 3.ॐ देव्यै नमः। 4.ॐ शिखिन्यै नमः। 5.ॐ धारिण्यै नमः। 6.ॐ धात्र्यै नमः। 7.ॐ सावित्र्यै नमः। 8.ॐ सत्यसन्धायै नमः। 9.ॐ कालहारिण्यै नमः। 10.ॐ गौर्यै नमः। 11.ॐ देवगीतायै नमः। 12.ॐ द्रवीयस्यै नमः। 13.ॐ पद्मिन्यै नमः। 14.ॐ सीतायै नमः। 15.ॐ रुक्मिण्यै नमः। 16.ॐ प्रियभूषणायै नमः। 17.ॐ श्रेयस्यै नमः। 18.ॐ श्रीमत्यै 19.ॐ मान्यायै नमः। 20.ॐ गौर्यै नमः। 21.ॐ गौतमार्चितायै नमः। 22.ॐ त्रेतायै नमः। 23.ॐ त्रिपथगायै नमः। 24.ॐ त्रिपादायै नमः। 25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः। 26.ॐ जगत्रयायै नमः। 27.ॐ त्रासिन्यै नमः। 28.ॐ गात्रायै नमः। 29.ॐ गात्रियायै नमः। 30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः। 31.ॐ शोभनायै नमः। 32.ॐ समायै नमः। 33.ॐ द्विरदायै नमः। 34.ॐ आराद्यै नमः। 35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः। 36.ॐ महाविद्यायै नमः। 37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः। 38.ॐ कामाक्ष्यै नमः। 39.ॐ कुलायै नमः। 40.ॐ श्रीयै नमः। 41.ॐ भूम्यै नमः। 42.ॐ भवित्र्यै नमः। 43.ॐ सावित्र्यै नमः। 44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः। 45.ॐ शंखिन्यै नमः। 46.ॐ चक्रिण्यै नमः। 47.ॐ चारिण्यै नमः। 48.ॐ चपलेक्षणायै नमः। 49.ॐ पीताम्बरायै नमः। 50.ॐ प्रोत सोमायै नमः। 51.ॐ सौरसायै नमः। 52.ॐ अक्षिण्यै नमः। 53.ॐ अम्बायै नमः। 54.ॐ सरस्वत्यै नमः। 55.ॐ सम्श्रयायै नमः। 56.ॐ सर्व देवत्यै नमः। 57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः। 58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः। 59.ॐ सुवासनायै नमः। 60.ॐ वरदायै नमः। 61.ॐ सुश्रोण्यै नमः। 62.ॐ चन्द्रभागायै नमः। 63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः। 64.ॐ कावेर्यै नमः। 65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः। 66.ॐ अर्चिन्यै नमः। 67.ॐ स्थायिन्यै नमः। 68.ॐ दानप्रदायै नमः। 69.ॐ धनवत्यै नमः। 70.ॐ सोच्यमानसायै नमः। 71.ॐ शुचिन्यै नमः। 72.ॐ श्रेयस्यै नमः। 73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः। 74.ॐ विभूत्यै नमः। 75.ॐ आकृत्यै नमः। 76.ॐ आविर्भूत्यै नमः। 77.ॐ प्रभाविन्यै नमः। 78.ॐ गन्धिन्यै नमः। 79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः। 80.ॐ गदायै नमः। 81.ॐ वेद्यायै नमः। 82.ॐ प्रभायै नमः। 83.ॐ सारस्यै नमः। 84.ॐ सरसिवासायै नमः। 85.ॐ सरस्वत्यै नमः। 86.ॐ शरावत्यै नमः। 87.ॐ रसिन्यै नमः। 88.ॐ काळिन्यै नमः। 89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः। 90.ॐ यामायै नमः। 91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः। 92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः। 93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः। 94.ॐ शमनिधिन्यै नमः। 95.ॐ शतानन्दायै नमः। 96.ॐ शतद्युतये नमः। 97.ॐ शितिकण्ठायै नमः। 98.ॐ प्रयायै नमः। 99.ॐ धात्र्यै नमः। 100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः। 101.ॐ कृष्णायै नमः। 102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः। 103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः। 104.ॐ हरायै नमः। 105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः। 106.ॐ भूम्यै नमः। 107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः। 108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

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Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट

Utpanna Ekadashi 2024: भगवान विष्णु को समर्पित उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में ये व्रत कब है और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा, आइए जानते हैं। Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी पापों का नाश होता है। साल 2024 में यह तिथि नवंबर के महीने में है, लेकिन इसको लेकर संशय बना हुआ है कि, उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को रखा जाएगा कि 27 नवंबर को। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब है और किस विधि से आपको इस दिन पूजा करनी चाहिए। Utpanna Ekadashi :उत्पन्ना एकादशी की सही तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में इस तिथि की शुरुआत 26 नवंबर की सुबह 1 बजकर 1 मिनट (25 नवंबर की रात्रि) पर होगी वहीं इसका समापन 27 नवंबर की देर सुबह 3 बजकर 47 मिनट (26 नवंबर की देर रात) पर होगा। यानि उदयातिथि के अनुसार, एकादशी तिथि 26 नवंबर को ही रहेगी, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को ही रखा जाएगा।  उत्पन्ना एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह 5 बजकर 5 मिनट से पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू होगा और लगभग 6 बजे तक आप ब्रह्म मुहूर्त की पूजा कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वहीं जो लोग सुबह के समय पूजा न कर पाएं वो सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी की पूजा कर सकते हैं। वहीं एकादशी व्रत का पारण आप 27 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट के बीच कर सकते हैं।  उत्पन्ना एकादशी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2024 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 नवंबर को देर रात 01 बजकर 01 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 नवंबर को देर रात 03 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी (Kab Hai Utpanna Ekadashi 2024) व्रत किया जाएगा। उत्पन्ना एकादशी व्रत की पूजा विधि 1. व्रत का संकल्प: 2. पूजा सामग्री: 3. पूजा विधि: व्रत का पारण: Utpanna Ekadashi 2024 उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। साथ ही आपकी मनोकामनाओं को भी भगवान विष्णु पूरा करते हैं। इस दिन व्रत रखने वालों को पारिवारिक जीवन में भी सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।  Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

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Utpanna Ekadashi 2024 Date: नवंबर महीने में कब है उत्पन्ना एकादशी? एक क्लिक में नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व है। यह व्रत हर साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस व्रत के करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी पापों का नाश होता है। इस दिन माता एकादशी का जन्म हुआ था, इसलिए इसे सभी Utpanna Ekadashi एकादशी व्रतों की जननी भी कहा जाता है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी के व्रत में विशेष नियम और विधि का पालन करना आवश्यक है। यहां पर हम उत्पन्ना एकादशी व्रत की विधि, नियम, पूजा सामग्री और इससे जुड़े कुछ खास बातों पर चर्चा करेंगे। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी व्रत का महत्व उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi का उल्लेख पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु की शक्ति और भक्ति से देवी एकादशी का जन्म हुआ था, जिन्होंने मुर दैत्य का वध कर भगवान विष्णु को राक्षस के भय से मुक्त किया। इसलिए इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। माना जाता है कि Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाने वाला भी है। शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर को देर रात 01 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 27 नवंबर को देर रात 03 बजकर 47 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। अतः 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी। साधक 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी का व्रत रख सकते हैं। वहीं, उत्पन्ना एकादशी का पारण 27 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट से लेकर 03 बजकर 18 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम (Brat Niyam) उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि (Puja Vidhi) उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi के दिन पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता एकादशी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। यहां हम पूजा की संक्षिप्त विधि बता रहे हैं। 1. प्रातःकाल स्नान एवं संकल्प व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और मन में एकादशी माता का स्मरण करें। 2. पूजा स्थान की सजावट पूजा स्थल को अच्छे से स्वच्छ कर, आसन बिछाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। इसके साथ ही एकादशी माता का भी चित्र रखा जा सकता है। 3. पूजा सामग्री (Pujan Samagri) 4. पूजा विधान व्रत खोलने की विधि (Parana Vidhi) द्वादशी तिथि को पारण का समय होता है। पारण के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। Utpanna Ekadashi फिर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी पर क्या करें और क्या न करें क्या करें: क्या न करें: निष्कर्ष उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi का व्रत अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। भगवान विष्णु की आराधना से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, व्रत, और दान का पालन करना चाहिए ताकि भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हो सके।

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अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी

अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी 🙏🏻अक्षय नवमी कार्तिक शुक्ल नवमी (10 नवम्बर 2024) रविवार को ‘अक्षय नवमी’ तथा ‘आँवला नवमी’ कहते हैं | अक्षय नवमी को जप, दान, तर्पण, स्नानादि का अक्षय फल होता है | इस दिन आँवले के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है | पूजन में कर्पूर या घी के दीपक से आँवले के वृक्ष की आरती करनी चाहिए तथा निम्न मंत्र बोलते हुये इस वृक्ष की प्रदक्षिणा करने का भी विधान है :🌷 यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च | तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ||🍏 इसके बाद आँवले के वृक्ष के नीचे पवित्र ब्राम्हणों व सच्चे साधक-भक्तों को भोजन कराके फिर स्वयं भी करना चाहिए | घर में आंवलें का वृक्ष न हो तो गमले में आँवले का पौधा लगा के अथवा किसी पवित्र, धार्मिक स्थान, आश्रम आदि में भी वृक्ष के नीचे पूजन कर सकते है | कई आश्रमों में आँवले के वृक्ष लगे हुये हैं | इस पुण्यस्थलों में जाकर भी आप भजन-पूजन का मंगलकारी लाभ ले सकते हैं | 10 नवम्बर 2024 रविवार को आँवला अक्षय नवमी है । 🙏🏻 नारद पुराण के अनुसार🌷 कार्तिके शुक्लनवमी याऽक्षया सा प्रकीर्तता । तस्यामश्वत्थमूले वै तर्प्पणं सम्यगाचरेत् ।। ११८-२३ ।।*देवानां च ऋषीणां च पितॄणां चापि नारद । स्वशाखोक्तैस्तथा मंत्रैः सूर्यायार्घ्यं ततोऽर्पयेत् ।। ११८-२४ ।।ततो द्विजान्भोजयित्वा मिष्टान्नेन मुनीश्वर । स्वयं भुक्त्वा च विहरेद्द्विजेभ्यो दत्तदक्षिणः ।। ११८-२५ ।।एवं यः कुरुते भक्त्या जपदानं द्विजार्चनम् । होमं च सर्वमक्षय्यं भवेदिति विधेर्वयः ।। ११८-२६ ।। 🍏 कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में जो नवमी आती है, उसे अक्षयनवमी कहते हैं। उस दिन पीपलवृक्ष की जड़ के समीप देवताओं, ऋषियों तथा पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करें और सूर्यदेवता को अर्घ्य दे। तत्पश्च्यात ब्राह्मणों को मिष्ठान्न भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दे और स्वयं भोजन करे। इस प्रकार जो भक्तिपूर्वक अक्षय नवमी को जप, दान, ब्राह्मण पूजन और होम करता है, उसका वह सब कुछ अक्षय होता है, ऐसा ब्रह्माजी का कथन है।👉🏻 कार्तिक शुक्ल नवमी को दिया हुआ दान अक्षय होता है अतः इसको अक्षयनवमी कहते हैं। 🙏🏻 स्कन्दपुराण, नारदपुराण आदि सभी पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी युगादि तिथि है। इसमें किया हुआ दान और होम अक्षय जानना चाहिये । प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है “एतश्चतस्रस्तिथयो युगाद्या दत्तं हुतं चाक्षयमासु विद्यात् । युगे युगे वर्षशतेन दानं युगादिकाले दिवसेन तत्फलम्॥” 🙏🏻 देवीपुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमीको व्रत, पूजा, तर्पण और अन्नादिका दान करनेसे अनन्त फल होता है।🍏 कार्तिक शुक्ल नवमी को ‘धात्री नवमी’ (आँवला नवमी) और ‘कूष्माण्ड नवमी’ (पेठा नवमी अथवा सीताफल नवमी) भी कहते है। स्कन्दपुराण के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला पूजन से स्त्री जाति के लिए अखंड सौभाग्य और पेठा पूजन से घर में शांति, आयु एवं संतान वृद्धि होती है। 🍏 आंवले के वृक्ष में सभी देवताओं का निवास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को भी अति प्रिय है। अक्षय नवमी के दिन अगर आंवले की पूजा करना और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला जरूर खाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदे गिरती है और यदि इस पेड़ के नीचे व्यक्ति भोजन करता है तो भोजन में अमृत के अंश आ जाता है। जिसके प्रभाव से मनुष्य रोगमुक्त होकर दीर्घायु बनता है। चरक संहिता के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला खाने से महर्षि च्यवन को फिर से जवानी यानी नवयौवन प्राप्त हुआ था।

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Tulsi Vivah 2024: विवाह में हो रही है देरी…तो तुलसी विवाह के दिन करें यह उपाय, खत्म होगी बाधा, मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी

Tulsi Vivah 2024: अगर किसी युवक या युवती का विवाह नहीं हो पा रहा है या उसमें किसी प्रकार की बाधा आ रही है, तो वे तुलसी विवाह के दिन विशेष उपाय कर सकते हैं. देवउठनी एकादशी हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं और सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. इसे देव प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है. यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके. वहीं इसी के दूसरे दिन तुलसी विवाह किया जाता है, जिसका अपना धार्मिक महत्व है. इस वर्ष देवउठनी एकादशी का पर्व 12 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा. इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. खास बात यह है कि देवउठनी एकादशी के अगले दिन Tulsi Vivah 2024 तुलसी विवाह का आयोजन होता है, जो 13 नवंबर को होगा. इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि तुलसी विवाह को विष्णु भगवान के साथ तुलसी माता का पवित्र मिलन माना जाता है. अगर किसी युवक या युवती का विवाह नहीं हो पा रहा है या उसमें किसी प्रकार की बाधा आ रही है, तो वे तुलसी विवाह के दिन विशेष उपाय कर सकते हैं. Tulsi Vivah 2024:विवाह में आ रही है बाधा तो करें ये उपाय इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय उनके सामने केसर, पीला चंदन या हल्दी का तिलक करना शुभ माना जाता है। इसके बाद उन्हें पीले फूल अर्पित किए जाते हैं. ऐसा करने से भगवान विष्णु शीघ्र विवाह का आशीर्वाद प्रदान करते हैं और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. अगर आप अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो देवउठनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं. पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है, और जल चढ़ाने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. इस दिन तुलसी विवाह कराना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और जल्द ही विवाह का योग बनता है. Tulsi Vivah 2024:तुलसी विवाह एक महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है जो हिंदू संस्कृति में विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है। इसे भगवान विष्णु और तुलसी माता (जिन्हें वृंदा भी कहा जाता है) के बीच का पवित्र विवाह कहा जाता है। Tulsi Vivah 2024 तुलसी विवाह हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जिसे “देवउठनी एकादशी” या “प्रबोधिनी एकादशी” भी कहते हैं। यह विवाह धार्मिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद से हिंदू समाज में विवाह आदि के सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग तुलसी विवाह की कथा तुलसी विवाह से जुड़ी कथा के अनुसार, वृंदा नामक एक पवित्र महिला का विवाह असुरराज जलंधर से हुआ था। Tulsi Vivah 2024 वृंदा की भक्ति और पतिव्रता धर्म के कारण जलंधर अजेय हो गया था। देवताओं ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग कर दिया, जिससे जलंधर की मृत्यु हो गई। जब वृंदा को यह बात पता चली तो उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि वह पत्थर (शालिग्राम) बन जाएंगे और फिर अपने प्राण त्याग दिए। Tulsi Vivah 2024 भगवान विष्णु ने उनके त्याग का सम्मान करते हुए उनकी स्मृति में तुलसी का पौधा धारण किया और वचन दिया कि वे विवाह करेंगे। इसी कारण तुलसी विवाह का आयोजन होता है। Tulsi Vivah 2024:तुलसी विवाह का महत्व Tulsi Vivah 2024:तुलसी विवाह की विधि Tulsi Vivah 2024:तुलसी विवाह का महत्व आधुनिक संदर्भ में तुलसी विवाह केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। आज के समय में भी तुलसी विवाह के माध्यम से पर्यावरण को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है। तुलसी विवाह में परिवार के लोग मिलकर इस आयोजन को मनाते हैं, जिससे न केवल धार्मिक आस्था का विकास होता है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा मिलता है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Dev Uthani Ekadashi 2024: आर्थिक तरक्की चाहते हैं, देवोत्थान एकादशी पर करें इन 3 मंत्रों का जाप

Devuthani Ekadashi 2024: देवोत्थान एकादशी हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे वर्ष में 24 एकादशियां मनाई जाती हैं। देवोत्थान एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत महत्व दिया जाता है। एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी आती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इसलिए इस दिन देवोत्थान एकादशी मनाई जाती है। इस दिन से शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 6 बजकर 46 मिनट से प्रारंभ हो रही है। एकादशी का समापन 12 नवंबर को शाम 4:04 बजे होगा। इसलिए देवउठनी एकादशी 12 नवंबर को है। अगले दिन तुलसी विवाह उत्सव भी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन किया गया प्रत्येक उपाय 1000 अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल देता है। देवोत्थान एकादशी:करें इन 3 मंत्रों का जाप देवउठनी एकादशी के दिन सूर्योदय के समय स्नान करके भगवान विष्णु के वैदिक मंत्रों जैसे “ऊँ विष्णुवे नम:, ऊँ अं वासुदेवाय नम:, ऊँ नारायणाय नम:, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” आदि का जाप करें। इन मंत्रों के जाप से भगवान विष्णु मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। मां लक्ष्मी भी धन की वर्षा करती हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है। शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी 12 नवंबर को है। एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 6:46 बजे शुरू होगी और 12 नवंबर को शाम 4:04 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में तिथियों की गणना सूर्योदय से की जाती है। इसलिए देवउठनी एकादशी 12 नवंबर को मनाई जाएगी। 12 नवंबर को एकादशी का व्रत कर भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा कर सकते हैं। साथ ही 13 नवंबर को सुबह 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक एकादशी व्रत का पारण करेंगे। शुभ योगहर्षण योग: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। देवोत्थान एकादशी इस योग का समापन संध्याकाल 07 बजकर 10 मिनट पर होगा। शिववास योगकार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को संध्याकाल में शिववास योग का निर्माण हो रहा है। देवोत्थान एकादशी इस योग का संयोग संध्याकाल 04 बजकर 05 मिनट से बन रहा है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Dev Uthani Ekadashi 2024 Date: कब और क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी? इस मुहूर्त में करें पूजा

देवउठनी एकादशी सनातन धर्म में एकादशी तिथि को माह की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2024) व्रत किया जाता है। इस शुभ तिथि पर भगवान विष्णु की उपासना और व्रत करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जातक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और विष्णु जी प्रसन्न होते हैं। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी व्रत करने का विधान है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। सभी एकादशी तिथि में से देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2024) को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपासना करने से साधक को विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि का भी वास रहता है। क्या आप जानते हैं कि देवउठनी एकादशी (Kab Hai Dev Uthani Ekadashi 2024) का पर्व क्यों मनाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इसके बारे में। Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Dev Uthani Significance) देवउठनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इसे भगवान विष्णु के चार महीने की योग-निद्रा से जागने का दिन माना जाता है। इसे ‘प्रबोधिनी एकादशी’ भी कहा जाता है। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि, शुभ माने जाते हैं। देवउठनी एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है, जो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी पूजन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। देवउठनी एकादशी 2024 डेट और टाइम (Dev Uthani Ekadashi 2024 Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 12 नवंबर को संध्याकाल 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। इस प्रकार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसके अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाएगा। एकादशी व्रत पारण करने का मुहूर्त इस प्रकार है-देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 12 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक है। करें इन मंत्रों का जप (Mantra on Ekadashi) ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। विष्णु के पंचरूप मंत्र – देवउठनी एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं करें: क्या करें: क्या न करें: अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

 Dev Uthani Ekadashi 2024: हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इससे पूर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं। अतः आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक चातुर्मास रहता है। शास्त्रों में चातुर्मास के दौरान शुभ कार्य करने की मनाही है। अतः इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। आइए, Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं- Dev Uthani Ekadashi:शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 12 नवंबर को संध्याकाल 04 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसके अगले दिन तुलसी विवाह है। तुलसी विवाह तिथि से सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जाते हैं। Dev Uthani Ekadashi:पारण समय व्रती तुलसी विवाह यानी 13 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक व्रत खोल सकते हैं। इस समय में स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करें। Dev Uthani Ekadashi इसके पश्चात ब्राह्मणों को अन्न दान देकर व्रत खोलें। Dev Uthani Ekadashi 2024:शुभ योग देवउठनी एकादशी को शाम 07 बजकर 10 मिनट तक हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण सुबह 07 बजकर 52 मिनट से हो रहा है, जो 13 नवंबर को सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर समाप्त हो रहा है। साथ ही रवि योग का संयोग बन रहा है। यह योग सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 52 मिनट तक है। इन योग के दौरान भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Devuthani Ekadashi Puja Vidhi) देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी Dev Uthani Ekadashi एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग-निद्रा से जागते हैं। इसे विशेष रूप से विष्णु पूजा और तुलसी विवाह के लिए मनाया जाता है। यहाँ पूजा विधि दी गई है: 1. स्नान और स्वच्छता 2. व्रत संकल्प (Vrat Sankalp) 3. भगवान विष्णु की पूजा (Vishnu Puja) 4. तुलसी पूजा (Tulsi Puja) 5. भोग और प्रसाद (Bhog and Prasad) 6. आरती (Aarti) 7. व्रत कथा सुनें (Vrat Katha) 8. व्रत का समापन (End of Fast) देवउठनी एकादशी पर यह पूजा विधि अपनाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है Dev Uthani Ekadashi और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Rama Ekadashi 2024:27 या 28 अक्टूबर, कब है रमा एकादशी? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Rama Ekadashi:रमा एकादशी 2024 में 28 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होती है और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है, Rama Ekadashi जो दीपावली से चार दिन पहले होती है। इसे “रम्भा एकादशी” भी कहा जाता है। Rama Ekadashi:शुभ मुहूर्त: Rama Ekadashi:पूजा विधि: Rama Ekadashi 2024:व्रत के नियम: Rama Ekadashi:महत्व: Rama Ekadashi:रमा एकादशी का व्रत व्यक्ति के सभी पापों का नाश करता है और मोक्ष की प्राप्ति कराता है। इसे रखने से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। Rama Ekadashi व्रत के पुण्य फल को हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञों के बराबर माना गया है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि जीवन में शांति और समृद्धि लाता है। रमा एकादशी से जुड़ी एक प्रमुख कथा राजा मुचुकुंद और उनकी पुत्री चंद्रभागा से संबंधित है। इस व्रत का पालन करने से राजा के दामाद शोभन को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और व्रत की महिमा का महत्व बताता है कि यह न केवल सांसारिक जीवन में लाभ देता है बल्कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को पुण्य और स्वर्ग की प्राप्ति होती है कथा- रमा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में मुचकुंद नाम का एक राजा था। Rama Ekadashi उसकी इंद्र के साथ मित्रता थी और साथ ही यम, कुबेर, वरुण और विभीषण भी उसके मित्र थे। यह राजा बड़ा धर्मात्मा, विष्णुभक्त और न्याय के साथ राज करता था। उस राजा की एक कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। उस कन्या का विवाह चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था।  एक समय वह शोभन ससुराल आया। उन्हीं दिनों जल्दी ही पुण्यदायिनी एकादशी ‘रमा’ भी आने वाली थी। जब व्रत का दिन समीप आ गया तो चंद्रभागा के मन में अत्यंत सोच उत्पन्न हुआ कि मेरे पति अत्यंत दुर्बल हैं Rama Ekadashi और मेरे पिता की आज्ञा अति कठोर है। दशमी को राजा ने ढोल बजवा कर सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए। ढोल की घोषणा सुनते ही शोभन को अत्यंत चिंता हुई और अपनी पत्नी से कहा कि हे प्रिये! अब क्या करना चाहिए, मैं किसी प्रकार भी भूख सहन नहीं कर सकूंगा। ऐसा उपाय बताओ कि जिससे मेरे प्राण बच सकें, अन्यथा मेरे प्राण अवश्य चले जाएंगे।  चंद्रभागा कहने लगी कि हे स्वामी! मेरे पिता के राज्य में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं करता। Rama Ekadashi हाथी, घोड़ा, ऊंट, बिल्ली, गौ आदि भी तृण, अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं कर सकते, फिर मनुष्य का तो कहना ही क्या है। यदि आप भोजन करना चाहते हैं तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहीं रहना चाहते हैं तो आपको अवश्य व्रत करना पड़ेगा। ऐसा सुनकर शोभन कहने लगा कि हे प्रिये! मैं अवश्य व्रत करूंगा, Rama Ekadashi जो भाग्य में होगा, वह देखा जाएगा। इस प्रकार से विचार कर शोभन ने व्रत रख लिया और वह भूख व प्यास से अत्यंत पीड़ित होने लगा। जब सूर्य नारायण अस्त हो गए और रात्रि को जागरण का समय आया जो वैष्णवों को अत्यंत हर्ष देने वाला था, परंतु शोभन के लिए अत्यंत दु:खदायी हुआ। प्रात:काल होते शोभन के प्राण निकल गए। तब राजा ने सुगंधित काष्ठ से उसका दाह संस्कार करवाया। परंतु चंद्रभागा ने अपने पिता की आज्ञा से अपने शरीर को दग्ध नहीं किया और शोभन की अंत्येष्टि क्रिया के बाद अपने पिता के घर में ही रहने लगी।  रमा एकादशी के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से युक्त तथा शत्रुओं से रहित एक सुंदर देवपुर प्राप्त हुआ। वह अत्यंत सुंदर रत्न और वैदूर्यमणि जटित स्वर्ण के खंभों पर निर्मित अनेक प्रकार की स्फटिक मणियों से सुशोभित भवन में बहुमूल्य वस्त्राभूषणों तथा छत्र व चंवर से विभूषित, गंधर्व और अप्सराओं से युक्त सिंहासन पर आरूढ़ ऐसा शोभायमान होता था मानो दूसरा इंद्र विराजमान हो।  एक समय मुचुकुंद नगर में रहने वाले एक सोम शर्मा नामक ब्राह्मण तीर्थयात्रा करता हुआ घूमता-घूमता उधर जा निकला और उसने शोभन को पहचान कर कि यह तो राजा का जमाई शोभन है, Rama Ekadashi उसके निकट गया। शोभन भी उसे पहचान कर अपने आसन से उठकर उसके पास आया और प्रणामादि करके कुशल प्रश्न किया।  ब्राह्मण ने कहा कि राजा मुचुकुंद और आपकी पत्नी कुशल से हैं। नगर में भी सब प्रकार से कुशल हैं, परंतु हे राजन! हमें आश्चर्य हो रहा है। आप अपना वृत्तांत कहिए कि ऐसा सुंदर नगर जो न कभी देखा, न सुना, आपको कैसे प्राप्त हुआ। तब शोभन बोला कि कार्तिक कृष्ण की रमा एकादशी का व्रत करने से मुझे यह नगर प्राप्त हुआ, परंतु यह अस्थिर है। यह स्थिर हो जाए ऐसा उपाय कीजिए।  ब्राह्मण कहने लगा कि हे राजन! यह स्थिर क्यों नहीं है और कैसे स्थिर हो सकता है आप बताइए, फिर मैं अवश्यमेव वह उपाय करूंगा। मेरी इस बात को आप मिथ्या न समझिए। शोभन ने कहा कि मैंने इस व्रत को श्रद्धा रहित होकर किया है। अत: यह सब कुछ अस्थिर है। यदि आप मुचुकुंद की कन्या चंद्रभागा को यह सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है। ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा से सब वृत्तांत कह सुनाया।  ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्नता से ब्राह्मण से कहने लगी कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं। ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री! मैंने महावन में तुम्हारे पति को प्रत्यक्ष देखा है। साथ ही किसी से विजय न हो ऐसा देवताओं के नगर के समान उनका नगर भी देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिर नहीं है।  जिस प्रकार वह स्थिर रह सके सो उपाय करना चाहिए। चंद्रभागा कहने लगी हे विप्र! तुम मुझे वहां ले चलो, मुझे पतिदेव के दर्शन की तीव्र लालसा है। मैं अपने किए हुए पुण्य से उस नगर को स्थिर बना दूंगी। आप ऐसा कार्य कीजिए जिससे उनका हमारा संयोग हो क्योंकि वियोगी को मिला देना महान पुण्य है।  ब्राह्मण सोम शर्मा यह बात सुनकर चंद्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पर गया।

Rama Ekadashi 2024:27 या 28 अक्टूबर, कब है रमा एकादशी? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त Read More »