EKADASHI

Apara Ekadashi 2025 Date:मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Apara Ekadashi:भगवान विष्णु की महिमा निराली है। भगवान विष्णु अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से भक्तजनों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। उनकी कृपा से धन संबंधी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होता है। एकादशी तिथि (Apara Ekadashi 2025 Date) पर पूजा-पाठ के बाद दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। Apara Ekadashi Kab hai:अपरा एकादशी का सनातन धर्म में खास महत्व है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन साधक जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी के निमित्त एकादशी का व्रत रखते हैं। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अपरा एकादशी व्रत करने से साधक द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, अपरा एकादशी (Apara Ekadashi 2025 Date) के बारे में सबकुछ जानते हैं- अपरा एकादशी कब है? Apara Ekadashi 2025 date पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 23 मई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी की पूजा विधि | Apara Ekadashi ki Puja Vidhi दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें. चंदन, फूल, धूप और दीप जलाकर उनकी पूजा करें. तुलसी दल अवश्य अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी डालकर भोग लगाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है. अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. भगवान विष्णु की आरती गाएं. अपनी क्षमतानुसार गरीबों को वस्त्र, भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें. द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें. अपरा एकादशी पारण (Apara Ekadashi Paran Timing) साधक 24 मई को पारण कर सकते हैं। 24 मई को पारण सुबह 05 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 11 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। अपरा एकादशी शुभ योग (Apara Ekadashi Shubh Muhurat) ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की तिथि पर प्रीति और आयुष्मान का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।  पंचांग सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 10 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 29 मिनट तक निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक अपरा एकादशी का महत्व | Apara Ekadashi Significance अपरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जो गंगा स्नान, स्वर्ण दान, भूमि दान और गौ दान के समान है. धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान-सम्मान और यश बढ़ता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.

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Vrat 2025 :Mohini Ekadashi जीवन में नहीं चाहते कोई कमी? तो मोहिनी एकादशी के दिन करें इन चीजों का दान

Mohini Ekadashi:आपको बता दें कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाले सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. आप 8 मई को पड़ने वाली मोहिनी एकादशी के दिन विधिवत रूप से तुलसी की पूजा करते हैं, तो इससे आपको धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है. हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सभी तिथि को बेहद खास माना जाता है, जिनमें एकादशी तिथि भी शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) का व्रत करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। Mohini Ekadashi 2025 : हिन्दू धर्म के मानने वालों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत महीने में दो बार आता है यानी 1 साल में 24 एकादशी व्रत रखा जाता है. वहीं, अगर अधिकमास होता है तो 26 एकादशी पड़ती है. आपको बता दें कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाले सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. आप 8 मई को पड़ने वाली मोहिनी एकादशी के दिन विधिवत रूप से तुलसी की पूजा करते हैं, तो इससे आपको धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है. मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है और विशेष दान चीजों का दान भी जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि Mohini Ekadashi मोहिनी एकादशी के दिन दान करने से आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है और धन लाभ के योग बनते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी के दिन किन चीजों का दान करना चाहिए? Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai: कब शुरू होगा बड़ा मंगल? जानें इसका महत्व, पूजा विधि और डेट मोहिनी एकादशी पर कैसे करें तुलसी की पूजा- How to worship Tulsi on Mohini Ekadashi इन बातों का रखें ख्याल(take care of these things) आप इस दिन तुलसी के पौधे में जल जरूर अर्पित करिए. हालांकि धार्मिक मान्यता है कि तुलसी में जल अर्पित करने से व्रत खंडित हो सकता है क्योंकि तुलसी देवी निर्जला व्रत रखती हैं.  मोहिनी एकादशी पारण का समय 2025 – Mohini Ekadashi Parana Time 2025 मोहिनी एकादशी व्रत के पारण का समय 09 मई, 2025 को रखा जाएगा. पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5:34 मिनट से सुबह 8:16 मिनट तक रहेगा. इस दौरान आप भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत खोल सकते हैं.  बनी रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा(Goddess Lakshmi’s blessings will remain) धार्मिक मान्यता के अनुसार, Mohini Ekadashi मोहिनी एकादशी के दिन गरीब लोगों में कपड़ों का दान करने का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी तिथि पर कपड़ों का दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर में बनी रहेगी सुख-शांति(There will be peace and happiness in the house) सनातन धर्म में तुलसी का पौधा पूजनीय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में तुलसी को मोहिनी एकादशी के दिन दान कर सकते हैं। तुलसी दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। Mohini Ekadashi साथ ही साधक पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। हमेशा पैसों से तिजोरी भरी रहेगी। वैवाहिक जीवन होगा खुशहाल(Married life will be happy) अगर आप वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन चाहते हैं, तो मोहिनी एकादशी की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को सिंदूर, बिंदी और चूड़ियां समेत आदि चीजों का दान करें। इसके बाद इन चीजों को किसी सुहागिन महिलाओं को दान में दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहिनी एकादशी के दिन इन चीजों का दान करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और साथ पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं। साल की सभी एकादशी का नाम – Name of all Ekadashi of the year तुलसी मंत्र(Tulsi Mantra)

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Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें 5 काम, होगी धन की हानि

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का दिन बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से सभी कष्टों का अंत होता है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसके साथ ही घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। इस साल यह एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) 8 मई को रखा जाएगा। Mohini Ekadashi Vrat Niyam: मोहिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। मोहिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकते हैं। Mohini Ekadashi Vrat Niyam:  मोहिनी एकादशी का व्रत। सनातन धर्म में मोहिनी एकादशी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर भक्त उपवास रखते हैं और द्वादशी तिथि पर पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान विष्णु के मंदिर जाते हैं। एकादशी एक महीने में दो बार आती है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date एकादशी पर कुछ चीजों को करने से भगवान विष्णु कुपित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Mohini Ekadashi per kya na kare:मोहिनी एकादशी पर क्या न करें? 1. चावल- मोहिनी एकादशी पर चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इस दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है।  2. तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान श्री हरि विष्णु को बेहद प्रिय हैं, जिनके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। 3. काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मास-मदिरा- मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नराज हो सकते हैं।  5. अपमान- कोशिश करें की इस दिन आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं।  Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित है। साधक इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) का व्रत 8 मई को रखा जाएगा। इस दिन माता तुलसी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसलिए सुबह व्रती उठकर पवित्र स्नान के बाद मां तुलसी को जल चढ़ाएं। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date फिर मां के सामने घी का दीपक जलाएं। तुलसी चालीसा, मंत्र का जप करें। आखिरी में आरती करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date।।तुलसी चालीसा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता, देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।। तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:सभी एकादशियों में बड़ी एकादशी कौन – कौन सी होती हैं,सबसे शुभ माना जाता है इन चार एकादशी को….

Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:हर माह आने वाली एकादशी की दो तिथियां भगवान विष्णु की अराधना के लिए समर्पित होती हैं. एक वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं लेकिन उनमें से कुछ एकादशी बहुत खास मानी जाती हैं. Most Important Ekadashi:हर माह आने वाली एकादशी की दो तिथियां भगवान विष्णु की अराधना के लिए समर्पित होती हैं. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करते हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की अराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और सांसारिक कष्ट मिट जाते हैं. एक वर्ष में कुल 24 एकादशी (Ekadashi) आती हैं लेकिन उनमें से कुछ एकादशी बहुत खास होती हैं. आइए जानते हैं कौन सी 4 एकादशी का महत्व होता है सबसे अधिक. Ekadashi | हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में महत्वपूर्ण होता हैं और साल में चौबीस एकादशी आती हैं यानि कि हर महीने में दो एकादशी होती हैं एक कृष्ण पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की लेकिन जिस साल अधिक मास या फिर मलमास आती हैं तो एकादशी व्रत की संख्या दो बढ़ जाया करती हैं अर्थात 24 एकादशी की जगह 26 एकादशी होती हैं अधिक मास में परमा और पद्मिनी एकादशी नाम की होती हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai सभी एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के लिए समर्पित होती हैं मान्यता है कि जो भी एकादशी व्रत को सच्चे मन से करता है उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती हैं और इस लोक में सभी सुखों को भोगकर मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त करता है कहा जाता हैं कि एकादशी व्रत के प्रताप से पितरों को मोक्ष मिलता हैं. हर एकादशी का अपना विशेष महत्व होता लेकिन सभी एकादशियों में से चार एकादशियों ऐसी है जिनको विशेष महत्व माना गया है और वे सभी एकादशी बड़ी एकादशी कहलाती हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai :आइए जानते हैं साल की चार बड़ी एकादशी और उनके महत्व को…. 1) आमलकी एकादशी : Amalaki Ekadashi Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai आमलकी एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरनी एकादशी भी कहा जाता हैं. आमलकी एकादशी को सारे एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता हैं क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले वृक्ष की भी विधिवत पूजन किया जाता हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai यह एकादशी साल की एक मात्र ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान विष्णु के अलावा भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा होती हैं मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान शंकर के गण शंकर पार्वती के संग गुलाल की होली खेलते हैं इसी लिए इस एकादशी को रंगभरनी एकादशी भी कहा जाता हैं. आमलकी एकादशी का महत्व :Importance of Amalaki Ekadashi Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai धार्मिक मान्यता हैं कि आमलकी एकादशी व्रत को करने से सभी पाप धुल जाते हैं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु को आंवला फल को चढ़ाने से भक्त को अच्छे स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. शास्त्रों के अनुसार जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्माजी का जन्म हुआ तब उसी समय भगवान विष्णु ने आंवले वृक्ष को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया जिसके हर भाग में ईश्वर का स्थान माना जाता हैं. 2) पापमोचनी एकादशी : Papmochani Ekadashi पापमोचनी एकादशी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती हैं और धार्मिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी का विशेष महत्व है. पापमोचनी दो शब्द पाप और मोचनी से मिलकर बना है Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai जिसमें पाप का अर्थ पाप या फिर दुष्कर्म और मोचनी का अर्थ है हटाने वाला यानि कि पापमोचनी एकादशी का व्रत को करने वालों को उनके पापों से मुक्ति मिल जाती हैं. पापमोचनी एकादशी का महत्व : Importance of Papamochani Ekadashi: पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने से मन की चंचलता खत्म होने के साथ ही धन और आरोग्य की प्राप्ति होती हैं.पुराणों के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सारे कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai तो वहीं पापमोचनी एकादशी व्रत से जाने अनजाने में कि गई पाप और गलतियों से छुटकारा मिल जाता हैं और उसे सहस्त्र गोदान यानि हजार गायों के बराबर दान का फल मिलता हैं मान्यता है कि ब्रह्म हत्या, स्वर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी पापमोचनी एकादशी व्रत को करने से दूर हो जाते हैं. 3) निर्जला एकादशी : Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती हैं. इस एकादशी में निर्जल व्रत यानि कि बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती हैं. निर्जला एकादशी को भीम एकादशी भी कहा जाता हैं. मान्यता है कि जो कोई भी यह व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही यश, वैभव और सुख की प्राप्ति होती हैं. निर्जला एकादशी का महत्व : Importance of Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक है इस एकादशी के बारे में मान्यता है कि अगर पूरे साल एक भी एकादशी का व्रत नहीं करते हैं और जो निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai तो उनकों संपूर्ण एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता हैं. पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से दीर्घायु और मोक्ष मिलता है इस व्रत को अन्न और जल त्याग करके व्रत करना पड़ता हैं. 4) देवोत्थान एकादशी : Devotthan Ekadashi देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है इस एकादशी को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव शयन करते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को उठते हैं इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी या देवउठनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती

Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:सभी एकादशियों में बड़ी एकादशी कौन – कौन सी होती हैं,सबसे शुभ माना जाता है इन चार एकादशी को…. Read More »

Ekadashi Vrat:इन 3 औरतों को नहीं करना चाहिए एकादशी का व्रत, पहली बार रखने जा रहे हैं एकदशी का व्रत तो जानें कैसे करें शुरुआत

Ekadashi Vrat 2025: एकादशी तिथि साल में 24 बार आती है. हर एकादशी तिथि पर किया गया व्रत, दान और पूजा पाठ जातक को शुभ फल प्रदान करता है. हिंदू धर्म में सभी तिथियों में एकादशी (Ekadashi) तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है. हर माह में दो बार एकादशी तिथि आती है और साल में 24 एकादशियां होती हैं. एकादशी के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा की जाती है और व्रत के साथ साथ दान पुण्य का भी महत्व है. एकादशी का व्रत (Ekadashi vrat) निराहार और निर्जल रखा जाता है और इस दौरान अन्न जल ग्रहण नहीं किया जाता है. हर एकादशी का अपना महत्व और कथा है. इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी के पौधे की पूजा का विधान है. चलिए जानते हैं कि एकादशी का क्या महत्व है और इस दिन चावल के सेवन के निषेध क्यों  बताया गया है. Ekadashi Vrat:एकादशी पर चावल का सेवन निषेध क्यों है  (Why eating rice is prohibited on Ekadashi) शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. Ekadashi Vrat खासकर जिस घर में एकादशी के निमित्त व्रत रखा जा रहा है वहां तो चावल बिलकुल नहीं खाना चाहिए. इसके पीछे दरअसल एक मान्यता है. कहा जाता है कि एकादशी के दिन चावल को जीव के बराबर माना जाता है. इसके पीछे की कथा इस प्रकार है. एक बार ऋषि मेधा ने गलती से अपने यज्ञ में आए एक भिक्षु का अपमान कर दिया. इससे मां दुर्गा उनसे नाराज हो गई. मां दुर्गा को मनाने के लिए ऋषि मेधा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया और उनका शरीर जमीन में धंस गया. इससे प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने वरदान दिया कि उस जमीन पर आगे अन्न उगेगा. एकादशी के दिन उसी जगह पर धान उगा और इसलिए चावल को एकादशी के दिन जीव के तुल्य माना जाता है. इसीलिए एकादशी के दिन चावल खाना निषेध बताया है. एकादशी के दिन क्या करने से मिलता है पुण्य   एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इस दिन व्रत किया जाता है. इस दिन सुबह नहा धोकर भगवान की पूजा का संकल्प लें और पूजा के बाद जल से भरे कलश का दान करना पुण्यकारी माना जाता है. Ekadashi Vrat इस दिन जातक को भजन कीर्तन में मन लगाना चाहिए. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जल, वस्त्र, पानी का घड़ा, पंखा, आसन और फल का दान करने पर जातक को मोक्ष के बराबर फल मिलने की बात की गई है. इस दिन चावल या आटे का ना तो सेवन करना चाहिए और ना ही दान करना चाहिए. इस दिन तुलसी की पूजा करनी चाहिए और तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए.  Ekadashi 2025 Rules किन औरतों को एकादशी का व्रत नहीं रखना चाहिए: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। ये Ekadashi Vrat एकादशी सबसे कठोर और चुनौतीपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है। इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक उपवास रखा जाता है। मान्यता है एकादशी व्रत रखने से वर्षभर की चौबीसों एकादशी व्रत के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। वैसे तो महिलाओं के लिए ये व्रत बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार कुछ औरतों को एकादशी व्रत की मनाही होती है। यहां जानिए वो कौन सी औरतें हैं जिन्हें एकादशी का यह पवित्र व्रत नहीं करना चाहिए। इन औरतों को एकादशी व्रत की मनाही 1. गर्भवती महिलाओं के लिए शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत एक ऐसा व्रत है जो संतान का वरदान भी देता है। Ekadashi Vrat लेकिन गर्भवती महिला इस दिन पूरा व्रत रहने की बजाय पूजा पाठ करे तो ही बेहतर होगा। दरअसल, यह व्रत बहुत कठिन होता है और गर्भवती महिला को पानी की कमी परेशान कर सकती है। यही वजह है कि एकादशी का व्रत गर्भवती महिला को न रखने की सलाह दी जाती है। 2. अधिक उम्र वालीं बीमार महिलाएं एकादशी का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसे करने से वैवाहिक जीवन, संतान की प्राप्ति, Ekadashi Vrat धन लाभ जैसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। लेकिन बीमारी में या अधिक उम्र होने पर एकादशी व्रत पूरा रखने की बजाय पूजा करके कथा व आरती करनी चाहिए। 3. मासिक धर्म वाली महिलाएं हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्यों से दूर रहना चाहिए। इस दौरान महिलाएं एकादशी का व्रत नहीं रख सकती। लेकिन, अगर व्रत के बीच पीरियड आ जाए तो आप व्रत रखकर पूजा किसी और से करवा सकती हैं। इससे भी आपको उतना ही फल मिलेगा। Ekadashi Vrat शास्त्रों के अनुसार, कुंवारी कन्याएं या पुरुष एकादशी का व्रत रख सकते हैं। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें मनचाहा वर का वरदान मिलता है। हालांकि, व्रत रखने के कुछ नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है। इस दिन किसी भी पेड़ से पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। Ekadashi Vrat साथ ही किसी का अनादर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा एकादशी के एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर खाने में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए।

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Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date: मई में मोहिनी एकादशी कब है? नोट कर लीजिए तारीख और पढ़िए इसका महत्व

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date : वर्षभर में कुल 24 एकादशी होती हैं, और हर एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है। इस बार वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे मोहिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी श्रीविष्णु के मोहिनी स्वरूप की आराधना का पावन पर्व है। Mohini Ekadashi May 2025:सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पावन और प्रभावकारी माना गया है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date हर महीने दो बार आने वाली एकादशी न केवल व्रत और उपवास की तिथि है, बल्कि यह आत्मचिंतन, प्रभु भक्ति और मोक्ष की ओर बढ़ने का अवसर भी है। वर्षभर में कुल 24 एकादशी होती हैं, और हर एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है। इस बार वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे मोहिनी एकादशी भी कहा जाता है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date यह एकादशी श्रीविष्णु के मोहिनी स्वरूप की आराधना का पावन पर्व है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से समस्त पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-शांति आती है और मन की समस्त इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं कब है मोहिनी एकादशी क्या है शुभ मुहूर्त और योग। When is Mohini Ekadashi:कब है मोहिनी एकादशी? Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में मोहिनी एकादशी व्रत रखा जाता है। एकादशी तिथि 7 मई को सुबह 10:19 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 8 मई को दोपहर 12:29 मिनट पर तिथि खत्म होगी। इस साल मोहिनी एकादशी व्रत 8 मई 2025 को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। पारण समय : 9 मई, प्रातः 5:34 से लेकर 8:16 तक Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:शुभ योग इस वर्ष मोहिनी एकादशी के दिन भद्रवास योग बन रहा है, जो इस व्रत को और भी प्रभावशाली बनाता है। इस योग में किया गया व्रत और जप अनेक गुना पुण्य प्रदान करता है। Importance of Mohini Ekadashi:मोहिनी एकादशी का महत्व Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:सनातन धर्म में मोहिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायक और मोह-माया से मुक्ति दिलाने वाली तिथि माना गया है। यह व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ता है और भगवान श्रीहरि विष्णु के मोहिनी रूप को समर्पित है।मोहिनी नाम स्वयं संकेत करता है,यह वह दिव्य रूप है जिसमें भगवान विष्णु ने असुरों को मोह में डालकर देवताओं को अमृत प्रदान किया था। यह रूप सत्य की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक है। शास्त्रों में वर्णन है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने भी इस एकादशी का व्रत रखा था। इसी व्रत की कृपा से उन्हें अनेक बाधाओं से मुक्ति और जीवन में विजय प्राप्त हुई। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा से इस दिन उपवास रखता है, प्रभु विष्णु की पूजा करता है और अपने आचरण में सात्विकता लाता है, उसे न केवल पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन की उलझनों और मोह के बंधनों से भी छुटकारा मिलता है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date यह व्रत मन की शुद्धि, आत्मिक बल, और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बनाता है। भक्त का चित्त भगवान की ओर उन्मुख होता है और वह सांसारिक भ्रमों से ऊपर उठकर परम सत्य से जुड़ता है। पूजा विधि puja vidhi प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। रोली, चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, ऋतुफल, और तुलसी दल से पूजा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र  का जप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। श्रीहरि की आरती करें और दीपदान करें। पूरे दिन सात्विकता का पालन करें, मन, वचन और कर्म से पवित्र बने रहें। कपट, क्रोध, लालच, द्वेष और परनिंदा से दूर रहें। व्रत के साथ दान का भी विशेष महत्व है। ठंडी वस्तुओं जैसे आम, खरबूजा, शर्बत, ठंडाई, जल आदि का दान करना शुभ फलदायक माना गया है।

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Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye:वरूथिनी एकादशी इस दिन, जानें इस दिन क्या करें व क्या नहीं

Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye :वरूथिनी एकादशी व्रत के भी कुछ नियम हैं। वरूथिनी एकादशी पर कुछ चीजों को करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Varuthini Ekadashi 2025, वरूथिनी एकादशी एकादशी इस दिन :वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि को जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार वैशाख माह में वरूथिनी एकादशी व्रत 24 अप्रैल को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से साधक को जीवन में किसी भी चीज कमी नहीं होती है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वरूथिनी एकादशी के दिन क्या करें (What to do on the day of Varuthini Ekadashi) द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी (Varuthini ekadashi ke din kya karna chahie) के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। सच्चे मन से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। पीले फल, मिठाई और तुलसी के पत्ते का भोग लगाएं। अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी के दिन क्या न करें? तुलसी- तुलसी की पत्तियां विष्णु भगवान को बेहद प्रिय हैं, Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye जिसके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी जी व्रत रखती हैं। इसलिए इन्हें स्पर्श करने से बचना चाहिए। मास-मदिरा- वरूथिनी एकादशी के दिन मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं। काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरूथिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि बनाए रखने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। चावल- वरूथिनी एकादशी के दिन चावल का सेवन करने की मनाही है। मान्यता है वरूथिनी एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है। वरूथिनी एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल को शाम 04 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी और 24 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 32 मिनट पर तिथि खत्म होगी। ऐसे में वरूथिनी एकादशी व्रत 24 अप्रैल को किया जाएगा। वरूथिनी एकादशी पूजा विधि (Varuthini Ekadashi Puja Vidhi) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye:विष्णु मंत्र 1. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥2. दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। वरूथिनी एकादशी 2025 पारण टाइम (Varuthini Ekadashi 2025 Paran time) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। वरूथिनी एकादशी का व्रत का पारण 25 अप्रैल को किया जाएगा। Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye इस दिन व्रत पारण का टाइम सुबह 05 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 23 मिनट तक है। व्रत का पारण करने के बाद विशेष चीजों का दान भी जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी तिथि दान करने से एकादशी व्रत का पूरा फल मिलता है।

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Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye:रुथिनी एकादशी पर भूलकर पर भी न खाएं ये 5 चीजें, आर्थिक तंगी बढ़ने के साथ भाग्य हो सकता है कमजोर

Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye: वरूथिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। वरूथिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकता है। वरूथिनी एकादशी पर क्या न करें? 1. चावल- वरूथिनी एकादशी पर चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है इस दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है।  2. तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान श्री हरि विष्णु को बेहद प्रिय हैं, जिनके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए वरूथिनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। 3. काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए वरूथिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मास-मदिरा- वरूथिनी एकादशी के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नराज हो सकते हैं।  5. अपमान- कोशिश करें की इस दिन आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं।  डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  वरुथिनी एकादशी पर क्या करना चाहिए? इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का भोग जरूर अर्पित करें. विष्णु जी को तुलसी बेहद प्रिय है. अगर आपने एकादशी व्रत नहीं भी रखा है तब भी इस दिन सात्विक चीजों का ही सेवन करें. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए. Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye इसके अलावा, एकादशी के दिन दान-पुण्य करने का खास महत्व है, इसलिए एकादशी तिथि को दान देना न भूलें. वरुथिनी एकादशी के दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु के साथ ही धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करें और पूरे दिन ईश्वर का ध्यान करते हुए व्रत का पालन करें. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि यानी एकादशी के अगले दिन तक किया जाता है. पान माता लक्ष्मी को किया जाता है अर्पित Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye वरुथिनी एकादशी पर पान के पत्ते भी न चबाएं या फिर किसी भी तरह से पान का उपयोग न करें क्योंकि पान के पत्ते माता लक्ष्मी की पूजा में रखे जाते हैं, इसलिए इस दिन पान को चढ़ावे का एक रूप माना जाता है, Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye इसलिए वरुथिनी एकादशी पर पान न खाएं। पालक खाना वर्जित है Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye इस दिन पालक खाना भी वर्जित है। पालक खाने से भी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा आपको नहीं मिल पाती है। साथ ही इस दिन पालक खाने से आपको त्वचा सम्बधित कई परेशानियां हो सकती है। शहद खाने से नाराज होती है मां लक्ष्मी वरुथिनी एकादशी पर शहद भी न खाएं क्योंकि इस दिन शहद से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को स्नान कराया जाता है, इसलिए शहद खाने को वर्जित माना गया है। वरुथिनी एकादशी पर शहद खाने से माता लक्ष्मी और विष्णु जी की कृपा आपको नहीं मिलती। चना खाने से आर्थिक तंगी होती है इस दिन चने खाने को भी वर्जित माना गया है। Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye मान्यता है कि आप अगर इस दिन चना खाते हैं, तो आर्थिक तंंगी आपका पीछा नहीं छोड़ती है। इसके अलावा चना खाने से आपको कई तरह की समस्याएं हो सकती है। वरुथिनी एकादशी पर चना खाना वर्जित है। उड़द की दाल से रोगों का खतरा वरुथिनी एकादशी पर उड़द की दाल खाने से परहेज करना चाहिए। माना जाता है कि अगर आप वरुथिनी एकादशी पर उड़द की दाल खाते हैं, तो इससे आपको कई रोग होने का खतरा हो सकता है, Varuthini Ekadashi Par Kya Na Khaye इसलिए इस दिन उड़द की दाल खाने को वर्जित माना गया है।

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Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai:वैशाख माह में कब है वरूथिनी और मोहिनी एकादशी? ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai : सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ मानी जाती है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai इस शुभ तिथि पर श्रीहरि और देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। अब जल्द ही वैशाख माह शुरू होने जा रहा है तो ऐसे में आइए जानते हैं कि इस माह में कौन-सी एकादशी व्रत किया जाएगा? Varuthini Ekadashi 2025 tithi & shubh muhurat :  हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी मनाई जाती है. हिन्दू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है. इस दिन लक्ष्मी नारायण (Lakshmi Narayan) जी की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं साथ ही, सभी कष्टों से मुक्ति भी मिलती है. यह भी कहा जाता है कि वरूथिनी एकादशी व्रत रखने से मृत्यु के बाद वैकुंठ में स्थान मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल  वरूथिनी एकादशी की तिथि,शुभ मुहूर्त, योग, पारण का समय और मंत्र… वरूथिनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त 2025 – Varuthini Ekadashi date and auspicious time 2025 पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल को शाम 04:43 मिनट से होगी, जिसका समापन अगले दिन यानी 24 अप्रैल को दोपहर 02:32 मिनट पर होगा. उदयातिथि पड़ने के कारण यह व्रत 24 अप्रैल को रखा जाएगा.  वरूथिनी एकादशी शुभ योग – Varuthini Ekadashi Shubh Yoga वरूथिनी एकादशी पर शुभ योग Auspicious yoga on Varuthini Ekadashi ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष वरूथिनी एकादशी पर ब्रह्म और इन्द्र योग का संयोग बन रहा है, Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai साथ ही शिववास योग भी है। इन शुभ योगों के बीच शतभिषा और पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का संयोग होने से यह दिन विशेष रूप से पुण्यकारी माना जाता है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai इस समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक के जीवन में अपार सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है। वरूथिनी एकादशी पारण समय – Varuthini Ekadashi Paran time वरूथिनी एकादशी का पारण समय 25 अप्रैल को सुबह 05:46 मिनट से लेकर सुबह 08:23 मिनट तक है.  वरूथिनी एकादशी पर राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जाप – Chant these mantras according to your zodiac sign on Varuthini Ekadashi आप इस दिन राशि के अनुसार मंत्रों का जाप कर लेते हैं तो इस व्रत का फल दोगुना मिल सकता है… वरूथिनी एकादशी 2025 पारण टाइम (Varuthini Ekadashi 2025 Vrat Paran Time) Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में वरूथिनी एकादशी व्रत पारण 25 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 46 मिनट से लेकर 08 बजकर 23 मिनट तक है। वरूथिनी एकादशी का महत्व Importance of Varuthini Ekadashi वरूथिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्त्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का दिन है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai इसके अलावा, यह व्रत व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति कराता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत करने से साधक को मृत्यु के बाद वैकुंठ लोक में स्थान मिलता है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai साथ ही, यह व्रत सभी संकटों से मुक्ति और जीवन में शांति लाने का उपाय है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai वरूथिनी एकादशी विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह पारिवारिक सुख और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा करके व्यक्ति धन-धान्य में वृद्धि प्राप्त करता है। Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai इस व्रत को करने से आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग भी खुलता है। वरूथिनी एकादशी पूजा विधि Varuthini Ekadashi puja method पूजा शुरू करने से पहले प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध हो जाएं। फिर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा की शुरुआत में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें। पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और भगवान लक्ष्मी नारायण की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ करें। भगवान लक्ष्मी नारायण को ताजे फूल, फल, और पत्तियां अर्पित करें। पूजा के दौरान धूप और अगरबत्तियां जलाएं और वातावरण को पवित्र बनाएं। ध्यान लगाकर भगवान लक्ष्मी नारायण से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्रार्थना करें। इस दिन उपवास रखें। यदि संभव हो तो रात को फलाहार करें। पूजा के बाद, व्रत खोलने से पहले अन्न, धन या वस्त्र का दान करें। इस प्रकार, विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और भगवान लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

Varuthini Ekadashi 2025 Mai Kab Hai:वैशाख माह में कब है वरूथिनी और मोहिनी एकादशी? ये है पूजा का शुभ मुहूर्त Read More »

Kamada Ekadashi 2025 Importance : कामदा एकादशी पर श्री हरि को अर्पित करें ये खास चीजें, धन-धान्य से भरा रहेगा जीवन

Kamada Ekadashi 2025 Importance:कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2025) का व्रत बहुत शुभ माना जाता है। यह हर साल चैत्र माह की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन साधक भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन श्री हरि की पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और कष्टों का नाश होता है। Kamada Ekadashi 2025 Importance: हिंदू धर्म में कामदा एकादशी एक महत्वपूर्ण और पुण्यकारी व्रत है. यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से व्यक्ति के सभी पाप और कष्ट दूर होते हैं. मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. Kamada Ekadashi 2025 Importance यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी लाभकारी है. कामदा एकादशी की कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का पुण्य मिलता है. पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 07 अप्रैल को रात 08 बजे शुरू होगी और 08 अप्रैल को रात 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, 08 अप्रैल को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी का पारण 09 अप्रैल को किया जाएगा. व्रती लोग 09 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं. इस दौरान साधक गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें। इसके बाद विधिवत लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। Kamada Ekadashi 2025 Importance पूजा समाप्त होने के बाद अन्न दान कर व्रत खोलें। Kamada Ekadashi vrat puja vidhi कामदा एकादशी व्रत पूजा विधि आज कामदा एकादशी पर पढ़ें यह व्रत कथा, पापों से मिलती है मुक्ति Kamada Ekadashi vrat paran कामदा एकादशी व्रत पारण एकादशी का व्रत रखने के साथ शुभ मुहूर्त में पारण करना बेहद जरूरी है. कामदा एकादशी व्रत पारण अगले दिन 06 बजकर 02 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट के बीच किया जाएगा. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है. एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और साधक के पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है. Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Kamada Ekadashi per kya kare कामदा एकादशी पर क्या करें Kamada Ekadashi 2025 Importance:कामदा एकादशी महत्व Kamada Ekadashi 2025 Importance:पद्म पुराण के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए हुए सभी पापों से छुटकारा मिलता है. कामदा एकादशी पिशाचत्व आदि दोषों का भी नाश करने वाली मानी गई है. Kamada Ekadashi 2025 Importance ऐसा कहते हैं कि कामदा एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का पुण्य मिलता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम श्री हरि को चढ़ाएं ये खास चीजें (Vishnu ji Ko Chadhaye Ye Chijen) मेष राशि: मेष राशि के लोगों को कामदा एकादशी पर विष्णु भगवान को लाल फूल अर्पित करने चाहिए। वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक को इस दिन पर श्री हरि को पंचामृत चढ़ाना चाहिए। मिथुन राशि: मिथुन राशि के लोगों को इस तिथि पर विष्णु जी को तुलसी पत्र अर्पित करने चाहिए। कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों को कामदा एकादशी पर नारायण को धनिया की पंजीरी का भोग लगाना चाहिए। सिंह राशि: सिंह राशि वालों को इस तिथि पर श्री हरि को लाल रंग के वस्त्र चढ़ाने चाहिए। कन्या राशि: कन्या राशि के लोगों को इस मौके पर भगवान विष्णु को मोर का पंख चढ़ाना चाहिए। तुला राशि: तुला राशि के लोगों को कामदा एकादशी पर श्री हरि को दही-चीनी अर्पित करनी चाहिए। वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को इस अवसर पर नारायण को लाल चंदन चढ़ाना चाहिए। धनु राशि: धनु राशि के लोगों को इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। मकर राशि: मकर राशि के लोगों को इस तिथि पर नारायण को शमी के फूल चढ़ाने चाहिए। कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों को कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु को शमी के पत्ते चढ़ाने चाहिए। मीन राशि: मीन राशि वालों को इस तिथि पर भगवान विष्णु को गोपी चंदन का तिलक लगाना चाहिए। कामदा एकादशी का महत्व

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Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम

Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : आज कामदा एकादशी का व्रत है. आज के दिन विष्णु जी की पूजा होती है. कामदा एकादशी के दिन कुछ खास काम करने की मनाही होती है. जानते हैं इससे जुड़े नियम. कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वासुदेव रूप की विधिवत पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से छुटकारा मिल सकता है।  Kamada Ekadashi:  यह हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी है. इसे फलदा एकादशी भी कहा जाता है. सभी एकादशियों में कामदा एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.  कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की वासुदेव रुप का पूजन किया जाता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi इस व्रत को करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है. इसका व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है. कामदा एकादशी के कुछ खास नियम होते हैं. जानते हैं कि आज के दिन कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Kamada Ekadashi 2025: कामदा एकादशी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है. यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और मान्यता है कि इसे करने से व्यक्ति के सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं. इस व्रत के कुछ जरूरी नियम हैं, जिनका पालन करने से शुभ फल प्राप्त होता है. मान्यता के अनुसार, Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi कामदा एकादशी व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पापों से मुक्ति मिलती है. आइए जानते साल 2025 में कामदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा. Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट कामदा एकादशी कब है? Kamada Ekadashi 2025 Date पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 अप्रैल को रात 8 बजे होगी. वहीं इस शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन 8 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 8 अप्रैल को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. इसी दिन इसका व्रत और भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाएगा. Kamada Ekadashi Ke Din Kya Kare:कामदा एकादशी के दिन क्या करें? Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. तुलसी, फल-फूल, धूप, दीप और प्रसाद चढ़ाकर भगवान विष्णु की आराधना करें. इस दिन निराहार (बिना खाए) या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है. भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें , क्योंकि इस दिन श्रीहरि की भक्ति में लीन रहना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन दान करना बहुत पुण्यदायी होता है. इस दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन के साथ जागरण करने से विशेष लाभ मिलता है. द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोजन कराने के बाद खुद सात्त्विक भोजन करें. Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Kamada Ekadashi Ke Din Kya Nhi Kare : कामदा एकादशी के दिन क्या नहीं करें? Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi इस दिन चावल, गेहूं, मसूर दाल, प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करें. व्रत के दौरान मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखें. इस दिन सत्य बोलना और अच्छे आचरण का पालन करना जरूरी होता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi वाणी पर संयम रखना एकादशी व्रत का मुख्य नियम है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शरीर के किसी भी अंग को काटना वर्जित है. खाने की बर्बादी न करें और भोजन को आदरपूर्वक ग्रहण करें. Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती कामदा एकादशी का महत्व | Kamada Ekadashi Significance Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. यह व्रत पापों का नाश करने वाला और पुण्य फल देने वाला माना जाता है. यह व्रत मनोकामनाओं को पूरा करने और सुख-समृद्धि लाने में मदद करता है.यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी लाभकारी है. कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है. कामदा एकादशी का महत्व Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:एकादशी के प्रकार एकादशी दो प्रकार की होती है। 1 सम्पूर्णा 2. विद्धा1) सम्पूर्णा – जिस तिथि में केवल एकादशी तिथि होती है अन्य किसी तिथि का उसमे मिश्रण नहीं होता उसे सम्पूर्णा एकादशी कहते है। 2) विद्धा एकादशी पुनः दो प्रकार की होती है2. A) पूर्वविद्धा – दशमी मिश्रित एकादशी को पूर्वविद्धा एकादशी कहते हैं। यदि एकादशी के दिन अरुणोदय काल (सूरज निकलने से 1घंटा 36 मिनट का समय) में यदि दशमी का नाम मात्र अंश भी रह गया तो ऐसी Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi एकादशी पूर्वविद्धा दोष से दोषयुक्त होने के कारण वर्जनीय है यह एकादशी दैत्यों का बल बढ़ाने वाली है। पुण्यों का नाश करने वाली है। वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम ।मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः ॥ [पद्मपुराण]दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नहीं है। 2. B) परविद्धा – द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि।द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है। इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं। एकादशी ये उपरोक्त मत वैष्णव, गौड़ीय वैष्णव एवं इस्कॉन संप्रदाय के मतानुसार है। आज कामदा एकादशी पर पढ़ें यह व्रत कथा, पापों से मिलती है मुक्ति Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai: कामदा एकादशी व्रत चैत्र नवरात्रि के राम नवमी के बाद की पहली एकादशी है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह एकादशी आमतौर पर मार्च या अप्रैल महीने में आती है। Kamada Ekadashi 2025: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत होगा। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इस बार Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। जानें अप्रैल माह की पहली एकादशी कब है और पूजन व व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- कब है कामदा एकादशी | Kamada Ekadashi 2025 Date  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 अप्रैल की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 8 अप्रैल को 5 बजकर 42 मिनट पर होगा. ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत 8 अप्रैल, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.  कब किया जाएगा कामदा एकादशी का पारण (Kamada Ekadashi Paran Time)  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी का पारण (Paran) द्वादशी तिथि पर होता है. ऐसे में 9 अप्रैल बुधवार के दिन कामदा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. व्रत पारण करने यानी व्रत समाप्त करने का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगा और 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में एकादशी व्रत का पारण करना शुभ होगा. Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त कामदा एकादशी की पूजा विधि | Kamada Ekadashi Puja Vidhi  कामदा एकादशी Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्नान पश्चात व्रत का प्रण लिया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस रंग को श्रीहरि का प्रिय रंग कहा जाता है. पीले रंग के वस्त्र पहनना, चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाना, पीले फूल, पीले फल और पीले फल को पूजा में शामिल करना बेहद शुभ होता है. एकादशी की पूजा (Ekadashi Puja) में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है. पूजा करते हुए एकादशी की व्रत कथा पढ़ी जाती है, आरती होती है, भोग लगाने के बाद पूजा संपन्न की जाती है और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की कामना की जाती है.  April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें कामदा एकादशी पूजन मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- 04:32 ए एम से 05:18 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:58 ए एम से 12:48 पी एम विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम अमृत काल- 06:13 ए एम से 07:55 ए एम सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम रवि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम कामदा एकादशी का महत्व- हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत रखने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai राक्षस योनि से मुक्ति मिलने की मान्यता है। जगत के पालन हार भगवान विष्णु की कृपा से सभी पाप मिट जाते हैं। कामदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त- कामदा एकादशी व्रत का पारण 09 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 02 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पारण तिति के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10 बजकर 55 मिनट है। may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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