Rishigautamproktam mahadevbhaktyotkarshvarnanam
ऋषि गौतम द्वारा वर्णित महादेव भक्ति के उत्कर्ष का वर्णन इस प्रकार है:
भक्त के मन में भगवान शिव की अनन्य भक्ति होती है। वह भगवान शिव को अपना सर्वस्व मानता है। वह भगवान शिव के बिना अपना जीवन व्यर्थ समझता है। वह भगवान शिव के दर्शन, पूजन, ध्यान, और भजन में अपना जीवन व्यतीत करता है। वह भगवान शिव के नाम और स्वरूप को अपने हृदय में धारण करता है। वह भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखता है।
भक्त के मन में भगवान शिव की भक्ति इतनी प्रबल होती है कि वह उनके लिए किसी भी प्रकार का कष्ट सहने को तैयार रहता है। वह भगवान शिव के लिए अपना धन, यश, और मान-सम्मान भी त्याग सकता है। वह भगवान शिव के लिए अपने प्राण भी दे सकता है।
भक्त के जीवन में भगवान शिव की भक्ति के कारण अनेक चमत्कार होते हैं। वह भगवान शिव की कृपा से सभी प्रकार के दुखों और कष्टों से मुक्त हो जाता है। उसे सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है।
ऋषि गौतम ने महादेव भक्ति के उत्कर्ष का वर्णन करते हुए कहा है कि जो भक्त भगवान शिव की भक्ति में पूर्ण रूप से लीन हो जाता है, वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है।
ऋषि गौतम ने महादेव भक्ति के उत्कर्ष के लिए कुछ उपाय भी बताए हैं। उन्होंने कहा है कि भक्त को चाहिए कि वह भगवान शिव की नियमित रूप से पूजा-अर्चना करे। वह भगवान शिव के नाम और स्वरूप का ध्यान करे। वह भगवान शिव के भजन और कीर्तन करे। वह भगवान शिव के व्रत और उपवास रखे। वह भगवान शिव के दर्शन के लिए तीर्थ यात्रा करे।
ऋषि गौतम का मानना है कि जो भक्त इन उपायों का पालन करता है, उसे भगवान शिव की भक्ति में अवश्य सफलता मिलती है।
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