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Published November 17, 2023
Updated November 17, 2023

श्रीकृष्णभजनष्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की भक्ति के आठ गुणों की स्तुति करता है।

श्रीकृष्णभजनष्टकम के छंद निम्नलिखित हैं:

Srikrishnabhajanashtakam

  1. श्रीकृष्णभजनष्टकम

  2. कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव

  3. भक्तिश्च भजनं च ध्यानं ध्यानं च ध्यानयोगो यमः कृष्णार्चनं च

  4. कृष्णनामस्मरणं च कृष्णकथा श्रवणं च

  5. कृष्णचरित्रनिष्ठा च कृष्णसेवा च

  6. कृष्णभक्तिसाधने निष्ठा च कृष्णप्रेम च

  7. कृष्णप्रेमभावेन च कृष्णभक्तिसिद्धिः

  8. कृष्णभक्तिसिद्धये सदा कृष्णभजनं कुर्वताम

श्रीकृष्णभजनष्टकम का अर्थ निम्नलिखित है:

  1. हे कृष्ण, हे गोविन्द, हे हरे, हे मुरारे, हे नाथ, हे नारायण, हे वासुदेव,

  2. भक्ति, भजन, ध्यान, ध्यानयोग, यम, कृष्णार्चन,

  3. कृष्णनामस्मरण, कृष्णकथा श्रवण,

  4. कृष्णचरित्रनिष्ठा, कृष्णसेवा,

  5. कृष्णभक्तिसाधने निष्ठा, कृष्णप्रेम,

  6. कृष्णप्रेमभावेन च,

  7. कृष्णभक्तिसिद्धिः,

  8. कृष्णभक्तिसिद्धये सदा कृष्णभजनं कुर्वताम।

श्रीकृष्णभजनष्टकम एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की भक्ति के आठ गुणों को दर्शाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • भक्ति में वृद्धि होती है।
  • मन शांत और प्रसन्न होता है।
  • दुख और कष्ट दूर होते हैं।
  • सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

श्रीकृष्णभजनष्टकम के आठ गुण निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति: भक्ति भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना है। यह भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है।
  • भजन: भजन भगवान कृष्ण की स्तुति और आराधना का एक तरीका है। यह भक्ति को बढ़ावा देने और भगवान कृष्ण के साथ जुड़ने का एक साधन है।
  • ध्यान: ध्यान एक मानसिक अभ्यास है जिसमें ध्यान केंद्रित करना शामिल है। यह भक्ति को बढ़ावा देने और भगवान कृष्ण के बारे में अधिक जानने का एक तरीका है।
  • ध्यानयोग: ध्यानयोग ध्यान और योग का एक संयोजन है। यह भक्ति को बढ़ावा देने और भगवान कृष्ण के साथ अधिक गहराई से जुड़ने का एक तरीका है।
  • यम: यम पांच नियम हैं जो आध्यात्मिक विकास में सहायता करते हैं। वे हैं: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह।
  • कृष्णार्चन: कृष्णार्चन भगवान कृष्ण की पूजा का एक तरीका है। इसमें पूजा, अर्चना, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शामिल हो सकते हैं।
  • कृष्णनामस्मरण: कृष्णनामस्मरण भगवान कृष्ण के नाम का जप करना है। यह भक्ति को बढ़ावा देने और भगवान कृष्ण के साथ जुड़ने का एक शक्तिशाली तरीका है।
  • कृष्णकथा श्रवण: कृष्णकथा श्रवण भगवान कृष्ण की कथाओं को सुनना है। यह भक्ति को बढ़ावा देने और भगवान कृष्ण के बारे में अधिक जानने का एक तरीका है।

श्रीकृष्णभजनष्टकम का पाठ करने से भक्तों को इन आठ गुणों को विकसित करने में मदद मिलती है। इन गुणों को विकसित करने से भक्तों को भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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