श्रीगणेशपञ्चरत्नस्तोत्रम् Sriganeshpancharatnastotram

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Published October 8, 2023
Updated July 29, 2024

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 5 श्लोकों का है। प्रत्येक श्लोक में, भगवान गणेश की एक विशेषता का वर्णन किया गया है।

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्रम के 5 श्लोक इस प्रकार हैं:

श्लोक 1:

**मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम्। **कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम्। **अनायाकैक नायकं विनाशीतेभ दैत्यकम्। नताशुभाशु नाशकं नमामी तं विनायकम्॥

अर्थ:

घुमावदार सूंड वाले, मोदक खाने वाले, हमेशा मोक्ष को प्राप्त करने वाले, कलाओं के स्वामी, विलासिल लोकों के रक्षक, एकमात्र नेता जो बुराई को नष्ट करता है, और बुराई और अशुभता को नष्ट करने वाले भगवान गणेश को मैं नमन करता हूं।

श्लोक 2:

**नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम्। **नतसुरारी निर्जरं नताधिकापदुदद्रम्। **समस्त लोक शंकरं दरेत वक्त्रमक्षरम। कपोल दानवारणं भजे पुराण वरणम्॥

अर्थ:

दूसरों के लिए भयंकर, नए सूर्य के समान तेजस्वी, देवताओं के शत्रु, अजर, और सभी कष्टों को दूर करने वाले, सभी लोकों के शंकर, और वक्त्रमक्षर वाले भगवान गणेश को मैं नमन करता हूं, जिनके कपाल पर दानव का चेहरा है।

श्लोक 3:

**नितांत कांति दंति कंता कांति कात्मजम्। **अचिंत्य रूपमंतहीन मन्तराया करणम्। **हृदन्तरे निरंतरं वसंतमेव योगिनां। तमेकादंतमेव तं विचिंतयामि संततम्॥

अर्थ:

सदैव कान्तिमान दांत वाले, माता कांति के पुत्र, अकल्पनीय रूप वाले, मंत्रों के साधन, और योगीजनों के हृदय में हमेशा रहने वाले, एक दांत वाले भगवान गणेश को मैं हमेशा याद करता हूं।

श्लोक 4:

**महागणेश पंचरत्नमादरेण योऽन्वहम्। **प्रजल्पति प्रभाते हृदि स्मरन् गणेशम्। **अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम्। समाहितायु रष्टभूतिं मभ्युपैति सोऽचिरात्॥

अर्थ:

जो भक्त प्रतिदिन प्रेम से श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करता है, और प्रभातकाल में अपने हृदय में भगवान गणेश का स्मरण करता है, वह शीघ्र ही आरोग्य, दोषों से मुक्ति, सुखद साथी, सुपुत्र, और समृद्धि प्राप्त करता है।

श्लोक 5:

इति श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्रं समाप्तम्॥

अर्थ:

इस प्रकार श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र समाप्त हुआ।

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र का महत्व:

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:

  • यह स्तोत्र भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है।
  • यह स्तोत्र 5 श्लोकों का है।
  • इसमें भगवान गणेश के सभी प्रमुख नामों और विशेषताओं का वर्णन किया गया है।
  • यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए पढ़ने योग्य
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