Devnarayan Jayanti 2026 Mein Kab Hai: भारत भूमि हमेशा से शूरवीरों और सिद्ध महापुरुषों की धरती रही है। राजस्थान के लोक देवताओं में भगवान देवनारायण का नाम अत्यंत श्रद्धा के साथ लिया जाता है। उन्हें न केवल गुर्जर समाज का आराध्य माना जाता है, बल्कि वे सर्व समाज के लिए आस्था के केंद्र हैं क्योंकि उन्हें भगवान विष्णु का अवतार (कलयुग के अवतार) माना जाता है,,। इस वर्ष, Devnarayan Jayanti 2026 का पर्व 25 जनवरी को मनाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और शक्ति का संगम होगा,।
Devnarayan Jayanti 2026 Date And Time: देवनारायण जयंती तिथि….
1. Devnarayan Jayanti 2026: तिथि और शुभ समय
भगवान देवनारायण Devnarayan Jayanti 2026 का जन्म माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था, जिसे सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है,। पंचांग के अनुसार, Devnarayan Jayanti 2026 रविवार, 25 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी,। इस दिन देश भर में, विशेषकर राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में भव्य झांकियां, शोभायात्रा और भंडारे आयोजित किए जाते हैं ।
2. भगवान देवनारायण का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि:Birth and family background of Lord Devnarayan
भगवान देवनारायण Devnarayan Jayanti 2026 का जन्म राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के पास ‘मालासेरी’ में हुआ था,। इनके पिता का नाम राजा भोज (सवाई भोज या वीर भोजा) और माता का नाम साढू खटानी था,। वे बगड़ावत वंश के थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अत्यंत वीर और पराक्रमी थे,। सवाई भोज के 24 भाई थे, जिनकी वीरता की चर्चा पूरे मेवाड़ में फैली हुई थी,। भगवान देवनारायण को बचपन में ‘उदयसिंह देव’ के नाम से भी जाना जाता था,।
Devnarayan Jayanti 2026 Date And Time: देवनारायण जयंती तिथि, शुभ मुहूर्त और भगवान विष्णु के अवतार की गौरव गाथा
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3. बाल्यकाल और संघर्ष की कथा:Story of childhood and struggle
देवनारायण जी के जन्म के समय उनके परिवार पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। जब राणा दुर्जनसाल को यह पता चला कि साढू खटानी के गर्भ से एक महान विभूति जन्म लेने वाली है जो अन्याय के खिलाफ लड़ेगी, तो उसने उन्हें मारने की योजना बनाई,। अपने बालक की रक्षा के लिए माता साढू खटानी उन्हें लेकर अपने मायके ‘देवास’ (मध्य प्रदेश) चली गईं,। वहीं पर देवनारायण जी का पालन-पोषण हुआ और उन्होंने घुड़सवारी एवं शस्त्र संचालन की शिक्षा प्राप्त की,।
4. साधना और सिद्धि: सिद्धवट का महत्व:Sadhana and Siddhi: Importance of Siddhavat
शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात, देवनारायण जी भगवान की साधना के लिए शिप्रा नदी के तट पर चले गए,। वहाँ ‘सिद्धवट’ नामक स्थान पर उन्होंने कठोर तपस्या की और सिद्धियाँ प्राप्त कीं,। इन्हीं शक्तियों का उपयोग उन्होंने बाद में लोक कल्याण और अधर्म के विनाश के लिए किया,। वे हमेशा समता, अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलने का संदेश देते थे,।
5. भगवान देवनारायण के अद्भुत चमत्कार:Amazing Miracles of Lord Devnarayan
लोक कथाओं और ‘देवनारायण की फड़’ में उनके कई चमत्कारों का वर्णन मिलता है,। Devnarayan Jayanti 2026 के अवसर पर इन कथाओं का श्रवण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। उनके प्रमुख चमत्कार निम्नलिखित हैं:
बीमारी से मुक्ति: धार के राजा जयसिंह की पुत्री रानी पीपलदे अत्यंत बीमार थीं, जिन्हें देवनारायण जी ने अपनी शक्तियों से पूर्णतः स्वस्थ कर दिया था,। बाद में उनका विवाह पीपलदे के साथ ही संपन्न हुआ,।
प्रकृति पर नियंत्रण: कहा जाता है कि उन्होंने अपनी शक्ति से सूखी नदी में जल प्रवाहित कर दिया था,।
जीवन दान: उन्होंने सारंग सेठ और छोंछु भाट जैसे कई लोगों को पुनर्जीवित करने के चमत्कार दिखाए, जिसके कारण लोग उन्हें साक्षात विष्णु का अवतार मानने लगे,।
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6. गौ रक्षक और पर्यावरण प्रेमी:Cow protector and environment lover
भगवान कृष्ण की भाँति देवनारायण जी भी महान गौ रक्षक थे,। वे प्रतिदिन प्रातः काल उठकर सबसे पहले गौ माता के दर्शन करते थे और उसके बाद ही अन्य कार्य करते थे,। उन्होंने अपने अनुयायियों को हमेशा गायों की रक्षा और सेवा करने की सीख दी,। इसी कारण गुर्जर समाज में गायों की सेवा को ईश्वर की सेवा के समान माना जाता है।
7. Devnarayan Jayanti 2026 पर उत्सव की विधि
इस पावन दिवस को मनाने के लिए श्रद्धालु विभिन्न अनुष्ठान करते हैं :
• उपवास: गुर्जर समाज के लोग इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं,।
• विशेष भोग: मंदिरों में माताएं और बहनें भगवान को ‘चूरमा’ और ‘खीर’ का भोग लगाती हैं,,।
• महाआरती: शाम के समय मंदिरों में भव्य आरती का आयोजन होता है और प्रसाद वितरण किया जाता है,।
• भजन संध्या: रात्रि के समय भजन कीर्तन और जागरण किए जाते हैं, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं,।
8. देवनारायण की फड़: एक विशाल काव्य गाथा:Devnarayan ki Phad: A vast poetic saga
देवनारायण जी और उनके पूर्वजों की वीरता की कहानियों को ‘देवनारायण की फड़’ और ‘बगडावत महाभारत’ के माध्यम से जीवित रखा गया है,। यह काव्य इतना विशाल है कि यदि इसे प्रतिदिन तीन पहर गाया जाए, तब भी इसे पूर्ण होने में 6 महीने का समय लगता है,। यह कला और भक्ति का एक अद्भुत संगम है।
9. प्रमुख तीर्थ स्थल (देवधाम):Major pilgrimage sites (Devdham)
यदि आप Devnarayan Jayanti 2026 पर दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो ये स्थान सबसे प्रमुख हैं:
• आसींद (भीलवाड़ा): यह उनका सबसे सिद्ध पूजा स्थल है, जहाँ हर साल उनकी जयंती पर विशाल मेला लगता है,।
• जोधपुरिया (टोंक): इसे देवनारायण जी का ‘देवधाम’ कहा जाता है और यह श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है,।
• मालासेरी: उनका जन्मस्थान होने के कारण इसे गुर्जरों का मुख्य धाम माना जाता है,।
10. राजकीय सम्मान और अवकाश:State honors and holidays
भगवान देवनारायण के महत्व को देखते हुए राजस्थान सरकार ने उनकी जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित किया है,। यह अवकाश गुर्जर समाज और सर्व समाज की मांग पर स्वीकृत किया गया था, ताकि सभी लोग इस उत्सव को धूमधाम से मना सकें,।
11. निष्कर्ष:conclusion
Devnarayan Jayanti 2026 केवल एक समाज विशेष का पर्व नहीं है, बल्कि यह अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और लोक कल्याण के संकल्प का दिन है। भगवान देवनारायण का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा दीन-दुखियों की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए,। 25 जनवरी 2026 को आइए हम सब मिलकर उन लोक देवता को नमन करें जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा में अर्पित कर दिया।




