Vishwakarma Puja

Vishwakarma Puja 2025 Date And Time: विश्वकर्मा पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि – जानें सब कुछ

Vishwakarma Puja:हर साल भाद्रपद मास में सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja 2025) मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो औजारों, मशीनों, कारखानों और वाहनों से जुड़ा काम करते हैं। इस दिन भगवान विश्वकर्मा, जो दुनिया के पहले इंजीनियर और वास्तुकार माने जाते हैं, की विशेष पूजा की जाती है। आइए जानते हैं विश्वकर्मा पूजा 2025 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, इसका महत्व और पूजा की विधि के बारे में।

विश्वकर्मा पूजा 2025 कब है? (Vishwakarma Puja 2025 Date)

हर साल की तरह, इस बार भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह तिथि तब निर्धारित होती है जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे कन्या संक्रांति भी कहा जाता है।

सूर्य देव 16 सितंबर, मंगलवार की रात 1 बजकर 47 मिनट पर या 17 सितंबर की देर रात 1 बजकर 54 मिनट पर सिंह राशि से कन्या राशि में गोचर करेंगे। सनातन धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व होने के कारण, विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को ही मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा 2025 का शुभ मुहूर्त (Vishwakarma Puja 2025 Shubh Muhurat)

विश्वकर्मा पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें आप अपनी सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं:

सबसे उत्तम समय (नवभारत टाइम्स के अनुसार): सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर के 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

पुण्य काल (जागरण के अनुसार): सुबह 05 बजकर 36 मिनट से लेकर दिन में 11 बजकर 44 मिनट तक है। इस दौरान स्नान-ध्यान और दान-पुण्य किया जा सकता है।

महा पुण्य काल (जागरण के अनुसार): सुबह 05 बजकर 36 मिनट से सुबह 07 बजकर 39 मिनट तक है। यह महा पुण्य काल 2 घंटे 3 मिनट का होगा।

एकादशी तिथि: आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर को देर रात 12 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और इसी दिन देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। साधक अपनी सुविधा अनुसार इस दौरान स्नान-ध्यान कर विश्वकर्मा जी की पूजा कर सकते हैं।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व (Importance of Vishwakarma Puja)

हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा Vishwakarma Puja का बेहद विशेष महत्व है। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्ग लोक और लंका जैसे स्थानों का निर्माण किया था। इतना ही नहीं, भगवान विश्वकर्मा ने ही भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी तैयार किया था।

माना जाता है कि जिन घरों, कारखानों, फैक्ट्री आदि में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है, वहां सदैव माता लक्ष्मी का वास बना रहता है और कारोबार में मुनाफा होता है। जो लोग लैपटॉप या मोबाइल से काम करते हैं, उन्हें भी यह पूजा जरूर करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से काम में तरक्की होती है। इस पूजा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है और विश्वकर्मा जी की कृपा से जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

विश्वकर्मा पूजा की विधि (Vishwakarma Puja Vidhi)

विश्वकर्मा पूजा के दिन विधि-विधान से पूजा करने का खास महत्व है। यहाँ पूजा की सरल विधि दी गई है:

1. स्वच्छता: सुबह उठकर अपनी मशीनों, औजारों और वाहनों को अच्छी तरह साफ कर लें।

2. मशीनों को बंद करें: इसके बाद, सभी मशीनों को बंद कर दें।

3. भगवान की स्थापना: भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति को अपनी मशीन या कार्यस्थल के पास स्थापित करें।

4. संयुक्त पूजा: भगवान विश्वकर्मा और अपनी मशीनों/औजारों की एक साथ विधि-विधान से पूजा करें।

5. वाहन पूजा: अपने वाहनों की पूजा भी अवश्य करें।

6. भोग लगाएं: भगवान विश्वकर्मा को मिष्ठान का भोग और प्रसाद जरूर चढ़ाएं।

7. दान-पुण्य: इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवश्यकतानुसार सामान दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

8. घरेलू मशीनें: अपने घर की छोटी-छोटी मशीनों की भी पूजा करने का महत्व होता है।

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शुभ योग (Shubh Yog on Vishwakarma Puja 2025)

विश्वकर्मा पूजा के दिन कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इस दिन शिव और परिघ योग के साथ-साथ शिववास योग का भी निर्माण होगा। इन शुभ योगों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

विश्वकर्मा पूजा बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में धूमधाम से मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति आए।

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