Varalakshmi Puja Vrat: वरलक्ष्मी व्रतम 2025 वरलक्ष्मी व्रतम एक त्योहार है जो तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। यह श्रावण (जुलाई-अगस्त) शुक्ल पक्ष में शुक्रवार को मनाया जाता है । इस वर्ष वरलक्ष्मी व्रत 08 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा । देवी लक्ष्मी को श्रद्धांजलि स्वरूप, कई विवाहित महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं और अपने परिवार और पति के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। ‘वर’ का अर्थ है वरदान, जो लक्ष्मी अपने उपासकों को प्रदान करती हैं।
Varalakshmi Vrat Date in 2025: वरलक्ष्मी व्रत तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, Varalakshmi Puja वरलक्ष्मी व्रत श्रावण (सावन) माह की पूर्णिमा से पहले वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। 2025 में यह 8 अगस्त को मनाया जाएगा।
वरलक्ष्मी व्रत 2025 के लिए शुभ समय (मुहूर्त):Auspicious time (Muhurat) for Varalakshmi Vrat 2025
सिंह लग्न (सुबह): 06:29 पूर्वाह्न – 08:46 पूर्वाह्न
वृश्चिक लग्न (दोपहर): 01:22 अपराह्न – 03:41 अपराह्न
कुंभ लग्न (शाम): 07:27 PM – 08:54 PM
वृषभ लग्न (मध्यरात्रि): 11:55 अपराह्न (8 अगस्त) – 01:50 पूर्वाह्न (9 अगस्त)
मान्यता के अनुसार, Varalakshmi Puja लक्ष्मी पूजा करने का सबसे अच्छा समय स्थिर लग्न के दौरान होता है, जो इस स्थिर ज्योतिषीय अवधि के दौरान पूजा करने पर दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित करता है।
Where is Varalakshmi Vrat celebrated: वरलक्ष्मी व्रत कहाँ मनाया जाता है?
यह व्रत दक्षिणी राज्यों महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में विवाहित महिलाओं द्वारा प्रमुखता से मनाया जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत के लिए पूजा सामग्री:material for Varalakshmi Puja vrat
वरलक्ष्मी व्रत पूजा के लिए आवश्यक वस्तुओं को पहले ही एकत्र कर लेना चाहिए। इस सूची में दैनिक पूजा की वस्तुओं को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन यह केवल उन वस्तुओं को सूचीबद्ध करता है जो विशेष रूप से वरलक्ष्मी व्रत पूजा के लिए आवश्यक हैं।
माता वरलक्ष्मी की मूर्ति
फूलों की माला
कुमकुम
हल्दी
चंदन पाउडर
विभूति
ग्लास
कंघी
फूल
पान के पत्ते
पंचामृत
दही
केला
दूध
पानी
अगरबत्ती
कर्पूरी
छोटी पूजा घंटी
तेल का दीपक
वरलक्ष्मी पूजन की विधि: Method of worshiping Varalakshmi
सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्म समाप्त करके स्नान करें।
पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें, उसे शुद्ध करें, मां वरलक्ष्मी का ध्यान करें और व्रत संकल्प लें।
एक लकड़ी की चौकी पर साफ लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
चित्र के पास थोड़े से चावल रखें और उस पर जल से भरा एक कलश रखें, कलश के चारों ओर चंदन लगाना चाहिए।
माता Varalakshmi Puja लक्ष्मी और गणेश को पुष्प, दूर्वा, नारियल, चंदन, हल्दी, कुमकुम, माला चढ़ाएं और मां Varalakshmi Puja वरलक्ष्मी को सोलह श्रृंगार अर्पित करें।
इसके बाद धूप, घी का दीपक जलाएं और मंत्र पढ़ें और भगवान को भोग लगाएं।
पूजा के बाद वरलक्ष्मी व्रत कथा पढ़ें और आरती के अंत में प्रसाद सभी में बितरित करें।
इस व्रत को करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
Top rated products
-
Gayatri Mantra Jaap for Wisdom and Knowledge
View Details₹5,100.00 -
Kaal Sarp Dosh Puja Online – राहु-केतु के दोष से पाएं मुक्ति
View Details₹5,100.00 -
Saraswati Mantra Chanting for Intelligence & Academic Success
View Details₹11,000.00 -
Surya Gayatri Mantra Jaap Online
View Details₹1,000.00 -
Kuber Mantra Chanting – Invoke the Guardian of Wealth
View Details₹11,000.00
How is Varalakshmi Vrat celebrated: वरलक्ष्मी व्रत कैसे मनाया जाता है?
गुरुवार को विवाहित महिलाएँ सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखती हैं और पूजा की तैयारियाँ करती हैं। शुक्रवार को, भक्त सूर्योदय से ठीक पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं। घर की सफाई की जाती है और रंगोली व कलश से सजाया जाता है।
कलश को चंदन के लेप से लेपित किया जाता है और उसमें विभिन्न क्षेत्रों की विभिन्न वस्तुएँ भरी जाती हैं। कलश को भरने के लिए कच्चे चावल, सिक्के, हल्दी और पत्तियों का उपयोग किया जाता है, और फिर एक ‘स्वास्तिक’ चिन्ह बनाया जाता है।
अंत में, कलश को आम के पत्तों से सजाया जाता है और उस पर हल्दी लगा नारियल रखा जाता है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा, श्लोकों का पाठ, आरती और भगवान को मिठाई का भोग लगाकर की जाती है। महिलाएँ अपने हाथों पर पीले धागे बाँधती हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करती हैं।
उबली हुई फलियाँ, पोंगल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। भक्त शनिवार को अनुष्ठान पूरा करते हैं और स्नान के बाद कलश को हटा देते हैं। ऐसा माना जाता है कि Varalakshmi Puja वरलक्ष्मी व्रत करने से शांति, समृद्धि और आर्थिक लाभ मिलता है।
Varuthini Ekadashi 2026 Date And Time : वरुथिनी एकादशी संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और व्रत के अचूक नियम….
Varuthini Ekadashi 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में व्रतों का अपना एक अलग और बहुत ही…
Hanuman Jayanti 2026 Date And Time : 1 या 2 अप्रैल कब है हनुमान जयंती ? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अचूक उपाय….
Hanuman Jayanti 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में भगवान श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन बजरंगबली का स्थान सबसे…
Panguni Uthiram 2026 Date And Time: शुभ तिथि, पूजा विधि, दांपत्य सुख का महत्व और पौराणिक कथा….
Panguni Uthiram 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति में हर व्रत, त्योहार और खगोलीय घटनाओं का…
वरलक्ष्मी व्रत का महत्व:Importance of Varalakshmi Vrat
वरलक्ष्मी व्रत, जिसे वरलक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें पुरुष और महिलाएँ देवी वरलक्ष्मी की पूजा करते हैं। उन्हें धन, समृद्धि, साहस, बुद्धि और उर्वरता की दिव्य दाता के रूप में पूजा जाता है। Varalakshmi Puja इस व्रत के दौरान, भक्त अपने और अपने परिवार के लिए उनसे भरपूर आशीर्वाद की कामना करते हैं।
वरलक्ष्मी पूजा में भाग लेना देवी लक्ष्मी के सभी आठ विविध रूपों का सम्मान करने के समान माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस अनुष्ठान से कई शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- धनम (धन लाभ): ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान वित्तीय समृद्धि और धन को आकर्षित करता है।
- धान्यम (भोजन और अनाज की प्रचुरता): भक्त अपने जीवन में भोजन और अनाज की प्रचुरता की आशा करते हैं।
- अरोक्क्यम (अच्छा स्वास्थ्य): अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद मांगना।
- संपथ (धन और संपत्ति): भौतिक संपत्ति और धन के संचय की आकांक्षा।
- संतानम (पुण्य संतान): गुणी और स्वस्थ संतान के जन्म की आशा।
- दीर्घा सुमंगली बक्क्याम (पति की दीर्घायु): अपने जीवनसाथी की लम्बी आयु की कामना।
- वीरम (साहस): चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति और साहस की खोज।
- गज लक्ष्मी (ऋण से मुक्ति): ऋण और वित्तीय बोझ से मुक्ति की आकांक्षा।
इस दिन विवाहित महिलाएँ पारंपरिक रूप से उपवास रखती हैं और पूजा करने के बाद अपना उपवास तोड़ती हैं। Varalakshmi Puja वरलक्ष्मी व्रत, देवी वरलक्ष्मी के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका है, जिसका उद्देश्य अंततः जीवन में विभिन्न प्रकार की समृद्धि और कल्याण प्राप्त करना है।






KARMASU