Mahesh Navami 2025 Date:जानिए इस वर्ष कब हैं महेश नवमी, नोट करलें पूजन विधि

Mahesh Navami 2025 Date:देवों के देव महादेव की महिमा निराली है। भगवान शिव के भक्तों को पृथ्वी लोक पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक के घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। साधक श्रद्धा भाव से महेश नवमी (Mahesh Navami 2025 Date) के दिन देवों के देव महादेव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा करते हैं।

Mahesh Navami
Mahesh Navami 2025 Date

हर साल ज्येष्ठ माह में महेश नवमी मनाई जाती है। यह पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही भगवान शिव के निमित्त व्रत भी रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

धार्मिक मत है कि महेश नवमी Mahesh Navami पर भगवान शिव की पूजा करने से साधक के सुख, सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है। साथ ही साधक पर शिव-शक्ति की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए, महेश नवमी की सही डेट (Mahesh Navami 2025), शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-

महेश नवमी शुभ मुहूर्त (Mahesh Navami 2025 Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, 03 जून को रात 09 बजकर 56 मिनट पर ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 04 जून को देर रात 11 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। इसके लिए 04 जून को महेश नवमी मनाई जाएगी। वहीं, 05 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा।

महेश नवमी शुभ योग (Mahesh Navami 2025 Shubh Yoga)

ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही दोपहर 02 बजकर 27 मिनट तक शिववास योग बन रहा है। इस समय तक देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां गौरी के साथ रहेंगे। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

महेश नवमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:Religious and cultural importance of Mahesh Navami

माहेश्वरी समुदाय में महेश नवमी का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माहेश्वरी समुदाय की रचना की थी, इसलिए इस दिन को इस समुदाय का स्थापना दिवस भी माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से यह दिन वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि, धार्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए बहुत उपयुक्त है।

महिलाएं विशेष रूप से इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थायित्व की कामना करती हैं।

वहीं पुरुष वर्ग व्रत और पूजा करके अपने कुलदेवता की पूजा करता है।

व्रत रखने की विधि Mahesh Navami Vrat Vidhi

जो भक्त इस दिन व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें निम्न विधि का पालन करना चाहिए:

व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पवित्र व्रत का संकल्प लें।

पूरे दिन केवल फलाहार करें या निर्जल व्रत (अपनी क्षमता के अनुसार) रखें।

पूरे दिन सात्विकता बनाए रखें और संयम से व्यवहार करें।

दिन में काम से काम 108 बार भगवान शिव के “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

शाम की पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांटें।

अगले दिन व्रत तोड़ें और किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।

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पूजा विधि: भगवान महेश और माता पार्वती की पूजा:Worship Method: Worship of Lord Mahesh and Mother Parvati

महेश नवमी पर निम्न तरीके से पूजा करें:

पूजा स्थल को साफ करें और वहां गंगाजल छिड़कें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से अभिषेक करें।

बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, भस्म चढ़ाएं।

माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां जैसी सुहाग की वस्तुएं चढ़ाएं।

शिव पंचाक्षरी मंत्र “ओम नम: शिवाय” और देवी मंत्र “ओम ह्रीं नम: पर्वतायै” का जाप करें।

अंत में आरती और शिव चालीसा का पाठ करें।

व्रत रखने वालों के लिए विशेष निर्देश:Special instructions for those observing fast

व्रत करने वाले को पूरे दिन पवित्रता, सात्विकता और धार्मिक आचरण बनाए रखना चाहिए।

किसी से कटु वचन न बोलें और क्रोध से बचें।

व्रत रखने के दौरान पूरे दिन शिव-पार्वती मंत्रों का जाप और ध्यान करें।

केवल फल, दूध, शर्बत, मेवे आदि का सेवन करें, अनाज और नमक से परहेज करें।

पूरे दिन कथा, पाठ, ध्यान, जप आदि धार्मिक क्रियाकलापों में संलग्न रहें।

रात में शिव स्तोत्र या शिवपुराण का पाठ करके सोना शुभ होता है।

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