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Gangasagar Mela 2026

Gangasagar Mela 2026 Mein Kab Hai: भारत के आध्यात्मिक परिदृश्य में गंगासागर का स्थान अद्वितीय है। एक प्रसिद्ध कहावत है, “सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार,” जो इस पावन स्थल की महत्ता को दर्शाती है पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित सागर द्वीप पर आयोजित होने वाला Gangasagar Mela 2026 आस्था का एक ऐसा सैलाब है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर डुबकी लगाने आते हैं। कुंभ मेले के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू तीर्थयात्री जमावड़ा माना जाता है

इस वर्ष का Gangasagar Mela 2026 कई मायनों में विशेष और ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि प्रशासन और पुजारियों का अनुमान है कि इस बार भीड़ के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं

Gangasagar Mela 2026 Date And Time: शाही स्नान तिथि, मुहूर्त…..

1. Gangasagar Mela 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

श्रद्धालुओं के बीच सबसे बड़ा सवाल अक्सर मेले की सही तारीख को लेकर होता है। आधिकारिक तौर पर Gangasagar Mela 2026 की मुख्य तिथि 14 जनवरी 2026 है यह मेला मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है

मेले के मुख्य पुजारी स्वामी ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी महंत संजय दास के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति के पवित्र स्नान का समय बहुत ही विशिष्ट है Gangasagar Mela 2026 का महास्नान 14 जनवरी की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 15 जनवरी की दोपहर 1:19 बजे तक चलेगा पुजारी जी का कहना है कि श्रद्धालु 15 जनवरी के पूरे दिन स्नान कर सकते हैं, क्योंकि शुभ समय का प्रभाव दोपहर 1:19 बजे के बाद भी आठ घंटे तक बना रहेगा

2. 1.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान

Gangasagar Mela 2026 इस साल इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बनने की राह पर है。 महंत संजय दास ने दावा किया है कि इस वर्ष 1.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम तट पर पहुँच सकते हैं इस भारी भीड़ का एक प्रमुख कारण यह है कि 2026 में कोई कुंभ मेला नहीं हो रहा है, जिससे देशभर के सनातनी हिंदू श्रद्धालुओं का ध्यान पूरी तरह से Gangasagar Mela 2026 की ओर केंद्रित है

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3. कपिल मुनि मंदिर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

सागर द्वीप पर स्थित कपिल मुनि मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले कपिल मुनि के क्रोध से राजा सागर के 60,000 पुत्र भस्म हो गए थे उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए राजा भगीरथ गंगा को धरती पर लेकर आए और जहाँ गंगा समुद्र में मिली, वही स्थान गंगासागर कहलाया

Gangasagar Mela 2026 के दौरान श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के बाद इसी प्राचीन मंदिर में माथा टेकते हैं。 आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वर्तमान कपिल मुनि मंदिर इसी स्थान पर बनी तीसरी इमारत है, क्योंकि पिछली दो इमारतें बढ़ते समुद्र और तट रेखा कटाव के कारण समाधि ले चुकी हैं

4. Gangasagar Mela 2026 के अनुष्ठान और परंपराएं

मेले की धार्मिक गतिविधियाँ मकर संक्रांति से कुछ दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं और उसके एक दिन बाद तक चलती हैं Gangasagar Mela 2026 के दौरान होने वाले मुख्य अनुष्ठान इस प्रकार हैं:

महापूजा और यज्ञ: मकर संक्रांति के दिन तड़के 3:00 बजे से कपिल मुनि मंदिर में महापूजा और यज्ञ शुरू होता है

पवित्र स्नान (Snan): श्रद्धालु ठंडे पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं, जिसे उनके पापों को धोने और ‘मोक्ष’ (Moksha) प्राप्ति का मार्ग माना जाता है

सूर्य देव की पूजा: स्नान के बाद भक्त भगवान सूर्य की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं

दान-पुण्य: संगम तट पर दान और ब्राह्मणों को भोजन कराने का भी विशेष फल बताया गया है।

5. कनेक्टिविटी और मुरीगंगा नदी पर पुल का निर्माण

सागर द्वीप तक पहुँचना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि यात्रियों को मुरीगंगा नदी पार करनी पड़ती है。 Gangasagar Mela 2026 की तैयारी के बीच पश्चिम बंगाल सरकार मुरीगंगा नदी पर एक विशाल पुल का निर्माण कर रही है, जो सागर द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ेगा。 मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पुल का शिलान्यास करेंगी, जिसकी तुलना पुजारी महंत संजय दास ने भगवान राम के ‘रामसेतु’ से की है。 यह पुल भविष्य में Gangasagar Mela 2026 जैसे आयोजनों के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों के सफर को सुगम बना देगा。

6. तट रेखा कटाव: एक गंभीर समस्या

Gangasagar Mela 2026 के सफल आयोजन के लिए मंदिर प्रशासन ने केंद्र सरकार से तट रेखा कटाव के मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है。 वर्तमान में ज्वार के दौरान पानी मंदिर के परिसर से केवल 500 मीटर की दूरी पर रह जाता है。 महंत संजय दास ने आग्रह किया है कि कपिल मुनि मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए, हालांकि उन्होंने राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की है

7. आवास और रहने की व्यवस्था (Accommodation)

Gangasagar Mela 2026 के दौरान सागर द्वीप पर स्थायी होटल या कमरे मिलना लगभग असंभव होता है, क्योंकि राज्य सरकार, सेना और VIP अधिकारियों के लिए इन्हें पहले ही आरक्षित कर लिया जाता है。 आम श्रद्धालुओं के लिए Gangasagar Mela 2026 के दौरान अस्थायी टेंट (Temporary Tents) की व्यवस्था निजी संस्थाओं द्वारा की जाती है श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी आवास व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित कर लें

8. Gangasagar Mela 2026 के पास घूमने की जगहें

यदि आप मेले में जा रहे हैं, तो कपिल मुनि मंदिर के अलावा अन्य दर्शनीय स्थलों का भी आनंद ले सकते हैं:

सागर लाइटहाउस और पोर्ट: समुद्र के विहंगम दृश्य के लिए प्रसिद्ध

रामकृष्ण मिशन आश्रम: आध्यात्मिक शांति के लिए एक उत्तम स्थान

समुद्र तट: सागर द्वीप के खूबसूरत बीचेस ट्रेकिंग और शांति के लिए लोकप्रिय हैं

फेयरग्राउंड्स: जहाँ मेले की रौनक और सांस्कृतिक छटा देखने को मिलती है

9. दुनिया भर से पहुँचते हैं श्रद्धालु

Gangasagar Mela 2026 केवल भारत तक सीमित नहीं है। यहाँ नेपाल, थाईलैंड, वेस्ट इंडीज, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी हिंदू धर्मावलंबी संगम स्नान के लिए पहुँचते हैं भारत के भीतर से विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा से सबसे अधिक तीर्थयात्री आते हैं

10. निष्कर्ष

Gangasagar Mela 2026 आस्था, संस्कृति और परंपरा का एक अनूठा संगम है। 14 जनवरी 2026 की रात से शुरू होने वाला यह महास्नान हर सनातनी के लिए मोक्ष का द्वार माना जाता है。 जहाँ एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे और पुलों के निर्माण से सुविधाओं को बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों भक्तों का अटूट विश्वास इस मेले को विश्व का सबसे महान आध्यात्मिक उत्सव बनाता है

चाहे वह 1.5 करोड़ की भीड़ हो या कड़कड़ाती ठंड में पवित्र डुबकी, Gangasagar Mela 2026 का अनुभव जीवन भर के लिए यादगार बन जाता है

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