Magha Kalashtami Vrat 2026 Mein Kab Hai: हिन्दू धर्म और वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह पावन दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान काल भैरव को समर्पित है। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही भक्तों को Magha Kalashtami Vrat रखने का सौभाग्य प्राप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा करने और इस दिन उपवास रखने से जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है।
इस लेख में हम Magha Kalashtami Vrat के महत्व, जनवरी 2026 की विशिष्ट तिथि, पूजा के शुभ योग और विधि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
Magha Kalashtami Vrat 2026 Date And Time: जनवरी में किस दिन रखा जाएगा कालाष्टमी व्रत जाने तिथि…..
1. Magha Kalashtami Vrat 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 में 4 तारीख को पौष पूर्णिमा है, जिसके अगले दिन से माघ माह का आरंभ होगा। इसी माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Magha Kalashtami Vrat मनाया जाएगा।
अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 10 जनवरी 2026 को सुबह 08:23 बजे।
अष्टमी तिथि का समापन: 11 जनवरी 2026 को सुबह 10:20 बजे।
• मुख्य व्रत की तिथि: चूंकि कालाष्टमी का व्रत उस दिन रखा जाता है जब अष्टमी तिथि रात्रि के समय व्याप्त हो, इसलिए Magha Kalashtami Vrat शनिवार, 10 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।
2. निशिता काल और पूजा का समय
काल भैरव की पूजा रात्रि के समय करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। Magha Kalashtami Vrat के दिन निशिता मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। 10 जनवरी की रात को निशिता मुहूर्त का समय रात 12:02 बजे से 12:56 बजे तक रहेगा। इस समय में की गई साधना और मंत्र जाप से साधक को काल भैरव देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:27 से 06:21 तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:13 से 02:55 तक रहेगा।
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3. Magha Kalashtami Vrat के दौरान बनने वाले शुभ योग
वर्ष 2026 में Magha Kalashtami Vrat के दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन ‘सुकर्मा योग’ का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही ‘शिववास योग’ भी इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
शिववास योग का महत्व: कालाष्टमी के दिन शिववास योग सुबह 08:24 बजे से शुरू होगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस समय देवों के देव महादेव माता पार्वती के साथ कैलाश पर विराजमान रहते हैं। Magha Kalashtami Vrat के दौरान शिववास योग में भगवान शिव और शक्ति की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है।
4. भगवान काल भैरव का स्वरूप और महत्व
भगवान भैरव को शिव का ही एक रौद्र अवतार माना गया है। प्रत्येक माह में आने के कारण यह त्यौहार वर्ष में 12 बार मनाया जाता है। मार्गशीर्ष माह की कालाष्टमी को ‘कालभैरव जयंती’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन Magha Kalashtami Vrat का भी अपना विशिष्ट स्थान है क्योंकि यह माघ के पवित्र महीने में आता है। काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है और उनकी कृपा के बिना शिव भक्ति अधूरी मानी जाती है।
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5. Magha Kalashtami Vrat की विस्तृत पूजा विधि
भगवान भैरव के भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। Magha Kalashtami Vrat के लिए पूजा की विधि निम्नलिखित है:
1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
2. संकल्प: स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान भैरव के समक्ष हाथ जोड़कर Magha Kalashtami Vrat का संकल्प लें।
3. दीपक और अर्पण: भगवान भैरव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। उन्हें काले तिल, फूल और नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
4. अभिषेक: शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग या भैरव प्रतिमा का रुद्राभिषेक करना Magha Kalashtami Vrat के दिन अत्यंत उत्तम माना गया है।
5. श्वान सेवा: भगवान भैरव का वाहन श्वान (कुत्ता) है। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना, विशेष रूप से मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाना, बहुत शुभ फल देता है।
6. पाठ और भजन: पूजा के दौरान ‘कालभैरव अष्टकम’, ‘भैरव चालीसा’ या ‘शिव चालीसा’ का पाठ करें।
6. काल भैरव देव के शक्तिशाली मंत्र
Magha Kalashtami Vrat के दौरान मंत्रों का जाप करने से शत्रुओं का नाश होता है और भय से मुक्ति मिलती है। आप निम्नलिखित मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
• ॐ नमो भैरवाय स्वाहा।
• ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय भयं हन।
• ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय शत्रु नाशं कुरु।
• ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय तंत्र बाधाम नाशय नाशय।
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से Magha Kalashtami Vrat का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
7. Magha Kalashtami Vrat रखने के अद्भुत लाभ
धार्मिक शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त निष्ठापूर्वक Magha Kalashtami Vrat का पालन करते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
• जीवन के समस्त कष्ट, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
• शत्रुओं से रक्षा होती है और मन से अज्ञात भय का नाश होता है।
• आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
• Magha Kalashtami Vrat के प्रभाव से पूर्व में किए गए पापों का नाश होता है और आत्मा की शुद्धि होती है।
• साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है और ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति बढ़ती है।
8. व्रत का समापन और नियम
Magha Kalashtami Vrat रखने वाले भक्तों को दिनभर उपवास रखना चाहिए और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। रात्रि में भगवान भैरव की पूजा और ध्यान करने के बाद, अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के उपरांत अन्न ग्रहण कर व्रत का पारण (समापन) किया जाता है।
9. वर्ष 2026 की कालाष्टमी तिथियों की सूची
जनवरी के Magha Kalashtami Vrat के अलावा, वर्ष 2026 में आने वाली अन्य महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
• 9 फरवरी 2026: फाल्गुन कालाष्टमी व्रत।
• 11 मार्च 2026: चैत्र कालाष्टमी व्रत।
• 10 अप्रैल 2026: वैशाख कालाष्टमी व्रत।
• 9 मई 2026: ज्येष्ठ कालाष्टमी व्रत।
• 1 दिसंबर 2026: कालभैरव जयंती (सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी)।
• 30 दिसंबर 2026: पौष कालाष्टमी व्रत।
10. निष्कर्ष
Magha Kalashtami Vrat श्रद्धा और अनुशासन का पर्व है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार ईश्वर के रौद्र रूप की साधना कर हम अपने भीतर के डर और बाहरी बाधाओं पर विजय पा सकते हैं। यदि आप भी अपने जीवन में साहस और स्थिरता चाहते हैं, तो Magha Kalashtami Vrat का पालन पूरी निष्ठा से करें। भगवान काल भैरव आपकी समस्त मनोकामनाएं पूरी करेंगे।




