मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) सनातन धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य देव की उपासना और प्रकृति के उत्सव का प्रतीक है। वर्ष 2026 में Makar Sankranti 2026 मकर संक्रांति का यह पावन पर्व कब मनाया जाएगा और पूजा का शुभ समय क्या है? Karmasu के इस लेख में जानें पूरी जानकारी।
मकर संक्रांति 2026 कब है? (Makar Sankranti 2026 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
इसी दिन सूर्य देव धनु राशि (Sagittarius) से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि मकर (Capricorn) में प्रवेश करेंगे। इस घटना को ‘संक्रांति’ कहा जाता है। इस दिन से सूर्य देव उत्तरायण (Uttarayan) होते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
मकर संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। 14 जनवरी 2026 को मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:
- मकर संक्रांति का क्षण: सुबह लगभग 08:43 बजे (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश)।
- पुण्य काल (Punya Kaal): सुबह 08:43 बजे से शाम 05:45 बजे तक।
- महापुण्य काल (Maha Punya Kaal): सुबह 08:43 बजे से सुबह 10:30 बजे तक।
Karmasu टिप: महापुण्य काल में किया गया दान और स्नान अक्षत पुण्य प्रदान करता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व (Significance)
ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में इस दिन का बहुत महत्व बताया गया है:
- सूर्य-शनि मिलन: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर (मकर राशि) जाते हैं। यह पिता-पुत्र के संबंधों में मिठास का प्रतीक है।
- मोक्ष का द्वार: महाभारत काल में भीष्म पितामह ने बाणों की शैया पर लेटे हुए अपने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति (उत्तरायण) के दिन का ही चयन किया था, क्योंकि इस समय देह त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- ऋतु परिवर्तन: यह दिन सर्दी के कम होने और वसंत के आगमन का संकेत देता है।
मकर संक्रांति पूजा विधि (Puja Vidhi in Hindi)
इस दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित विधि से पूजा करें:
- पवित्र स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा, यमुना या किसी पवित्र सरोवर में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
- सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, गुड़ और काले तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। मंत्र बोलें: ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’।
- दीप दान: घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु व सूर्य देव की आरती करें।
- दान (Donation): पूजा के बाद ब्राह्मणों या गरीबों को सीधा (आटा, चावल, दाल), तिल के लड्डू, गुड़ और कंबल का दान करें।
क्यों खाई जाती है ‘खिचड़ी’? (Tradition of Khichdi)
मकर संक्रांति Makar Sankranti 2026 को कई जगहों पर ‘खिचड़ी पर्व’ भी कहा जाता है। इस दिन चावल (चंद्रमा), उड़द दाल (शनि), हल्दी (गुरु) और घी (सूर्य) से बनी खिचड़ी खाने से शरीर को नई ऊर्जा मिलती है और सभी ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
राशि अनुसार दान (Zodiac Wise Donation 2026)
Makar Sankranti 2026 अपनी राशि के अनुसार दान करने से आपको विशेष लाभ मिल सकता है:
- मेष, सिंह, धनु: गुड़, गेहूं और तांबे के बर्तन का दान करें।
- वृषभ, कन्या, मकर: तिल, कंबल और उड़द की दाल का दान करें।
- मिथुन, तुला, कुंभ: हरे वस्त्र, मूंग दाल और खिचड़ी का दान करें।
- कर्क, वृश्चिक, मीन: चावल, चीनी, दूध और ऊनी वस्त्रों का दान करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
Makar Sankranti 2026 मकर संक्रांति 2026 हमारे जीवन में नई उम्मीदें और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रही है। Karmasu परिवार की ओर से आप सभी को मकर संक्रांति की ढेरों शुभकामनाएं!