Panchakshar

Shiv Panchakshar Stotra:शिव पंचाक्षर स्तोत्र

Shiv Panchakshar Stotra: शिव पंचाक्षर स्तोत्र: पंचाक्षर का शाब्दिक अर्थ है पंच अक्षर, यानी संस्कृत में “पांच अक्षर” और यह पांच पवित्र अक्षरों ‘न’, ‘म’, ‘शि’, ‘व’, ‘य’ को दर्शाता है। यह भगवान शिव की प्रार्थना है, और यह शिव के मंत्र ओम नमः शिवाय से जुड़ा है, जिसमें नमः शिवाय को पंचाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र एक हिंदू स्तोत्र, श्री रुद्रम चमकम् से निकला है, जो वैदिक ग्रंथों, यजुर्वेद का दूसरा सबसे पुराना ग्रंथ है।

इस स्तोत्र Panchakshar का महत्व इस बात में है कि यह प्रकृति के पांच तत्वों, यानी पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि से लिया गया है। माना जाता है कि 5-अक्षर वाला यह मंत्र उपरोक्त प्राकृतिक तत्वों को ऊर्जा देता है और शुद्ध करता है। Panchakshar शिव स्तोत्र एक बहुत ही शुभ स्तोत्र (मंत्र) है जिसे आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी ईस्वी) ने भगवान शिव की स्तुति में रचा था। प्रत्येक पांच छंदों में, बारी-बारी से ‘नमः शिवाय’ के पांच पवित्र अक्षरों पर विचार किया गया है। इस स्तोत्र को शरणागति स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है। शरणागति का अर्थ है समर्पण।

इसका मतलब है कि हम भगवान द्वारा बनाए गए नियम के प्रति समर्पण करते हैं, यानी सार्वभौमिक ‘धर्म का नियम’ और सार्वभौमिक ‘कर्म का नियम’। हर बार जब हम ‘नमः शिवाय’ का जाप करते हैं, Panchakshar तो हम कर्म के नियम के आगे झुकते हैं, जिसका अर्थ है कि हमारे जीवन में होने वाली घटनाएं केवल कर्म के नियम के अनुसार होंगी। इसलिए, हमें कभी भी अपने ‘कर्म फल’ या अपने कर्मों के फल/परिणाम को स्वीकार करने में विरोध नहीं करना चाहिए।

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हमारे जीवन की विभिन्न घटनाओं को शिव प्रसाद माना जाता है। इसलिए, किसी भी परिणाम के प्रति द्वेष (नफरत, घृणा) या राग (पसंद, लगाव) नहीं होना चाहिए। हमें जीवन में आने वाली हर चीज का स्वागत करना चाहिए। Panchakshar हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव पंचाक्षर स्तोत्र का नियमित जाप भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र के लाभ:Benefits of the Shiva Panchakshara Stotra

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का नियमित पाठ मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनी और समृद्ध बनाता है।
इस शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र का जाप हमारी प्रणाली, कार्यों और व्यवहार को पवित्र करता है और यह सकारात्मक ऊर्जा भरता है। साथ ही, यह मन को ऊपर उठाता है, हमारे शारीरिक और ऊर्जावान शरीर के अंदर कुछ एनर्जी सेंटर्स (चक्रों) को एक्टिव करता है और चेतना की उच्च अवस्थाओं को उत्तेजित करता है।

इस स्तोत्र का पाठ किसे करना है: Who should recite this hymn

जो व्यक्ति जीवन भर स्वस्थ रहने के लिए भगवान शिव से आशीर्वाद चाहता है, उसे नियमित रूप से शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥ 1 ॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥ 2 ॥

शिवाय गौरीवदनाब्जबालसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥ 3 ॥

वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥ 4 ॥

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥ 5 ॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।
शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ 6 ॥

॥ इति शिव पंचाक्षर स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Shree Kanakdhara Stotram: श्री कनकधारा स्तोत्रम् Kanakdhara Stotram

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