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Kawad Yatra 2025: श्रावण माह में कांवड यात्रा भी निकलती है, जिसमें हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर भक्त महादेव का अभिषेक करते हैं.

Kawad Yatra 2025
Kawad Yatra 2025

Sawan month 2025 : पंचांग के अनुसार, साल 2025 में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई को रात 2 बजकर 6 मिनट से हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा। इस बार सावन पूरे 30 दिनों का रहेगा। चूंकि सावन के पहले दिन से ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है, इसलिए कांवड़ यात्रा 2025 की शुरुआत भी 11 जुलाई से मानी जाएगी। कांवड़ यात्रा सावन शिवरात्रि तक चलती है, जो इस बार अगस्त की शुरुआत में पड़ेगी। इस दौरान श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस यात्रा से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 – When will Kawad Yatra 2025 start

पंचांग के अनुसार, Kawad Yatra 2025 सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 11 जुलाई देर रात 02 बजकर 06 मिनट से होगी और समापन अगले दिन यानी 12 जुलाई को देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर समापन होगा. ऐसे में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से होगी. वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा. ऐसे में कांवड यात्रा की शुरूआत 11 जुलाई से शूरू हो जाएगी और सावन शिवरात्रि के दिन समाप्त.

Kanwar Yatra 2025 Importance: सावन की सबसे बड़ी विशेषता Kawad Yatra 2025 कांवड़ यात्रा है, जिसमें भक्त हरिद्वार, गौमुख या गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों से गंगा जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा शिवरात्रि तक चलती है और विशेषकर सावन शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का अत्यंत पुण्यफल माना जाता है। कहा जाता है कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। Kawad Yatra 2025 आज यह यात्रा आस्था, श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

Sawan Shivratri Kab Hai:सावन शिवरात्रि कब है?

Kawad Yatra 2025 साल 2025 में सावन माह की शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट से होगी और इसका समापन 24 जुलाई की रात 2 बजकर 28 मिनट पर होगा।

इसलिए शिव भक्त 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि का व्रत रखेंगे और दिनभर व्रत-पूजन कर रात को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने और मनोकामनाएं पूर्ण कराने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसीलिए 23 जुलाई से कांवड़ यात्रा आरम्भ होगी। 

कांवड़ यात्रा के प्रकार :Types of Kanwar Yatra

कांवड़ यात्रा चार अलग-अलग प्रकारों में की जाती है, जो भक्तों की आस्था, सामर्थ्य और नियमों के अनुसार होती है। 

  • सामान्य कांवड़ यात्रा – इसमें भक्त अपने अनुसार रुकते-ठहरते हुए गंगा जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। यह सबसे आम और सहज रूप है।
  • खड़ी कांवड़ यात्रा – इसमें नियम काफी कड़े होते हैं। जल लाने के बाद पूरी यात्रा में कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। दो या अधिक भक्त交 मिलकर बारी-बारी से इसे कंधे पर उठाते हैं।
  • दांडी कांवड़ यात्रा – इस यात्रा में भक्त हर कुछ दूरी पर दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा करते हैं। इसे सबसे कठिन यात्रा माना जाता है क्योंकि इसमें भक्त जमीन पर लेट-लेट कर बढ़ते हैं।
  • डाक कांवड़ यात्रा – यह सबसे तेज़ और दौड़ते हुए की जाने वाली यात्रा होती है। इसमें भक्त गंगा जल लेकर बिना रुके तेजी से शिवधाम की ओर बढ़ते हैं, जैसे “डाक” यानी संदेशवाहक दौड़ता है।
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कांवड़ यात्रा के नियम:rules of kanwar yatra

  • कांवड़ यात्रा Kawad Yatra 2025 पर निकलने से पहले भक्तों को कई नियमों का पालन करना होता है। सबसे पहले उन्हें सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। 
  • यात्रा से कुछ सप्ताह पहले ही मांसाहार और तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन आदि का सेवन छोड़ देना होता है। 
  • इसके अलावा, शराब, सिगरेट और तंबाकू जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी होती है।
  • भक्तों को यात्रा के दौरान अपने विचार भी शुद्ध रखने होते हैं।  
  • गुस्सा, नफरत या कोई बुरा विचार मन में नहीं लाना चाहिए। 
  • पूरी यात्रा श्रद्धा, संयम और अनुशासन के साथ पूरी की जाती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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