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Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi :मंगलवार को हनुमान जी के इन नामों का करें जप, सभी संकट जल्द होंगे दूर

Hanuman Ji Ke 108 Name:मंगलवार के दिन राम जी के भक्त हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कार्यों में आ रही बाधा को दूर करने के लिए व्रत भी किया है। मान्यता है कि बजरंगबली की उपासना करने से कभी धन का अभाव नहीं रहता है और घर में खुशियों का आगमन होता है। ऐसे में मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा के दौरान उनके Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi नामों का जप करें। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi:हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। Hanuman Ji Ke 108 Name जो जपे हनुमानजी का नाम संकट कटे मिटे सब पीड़ा और पूर्ण हो उसके सारे काम। तो आओ जानते हैं कि हनुमानजी के नामों का रहस्य। 1. मारुति : हनुमानजी का बचपना का यही नाम है। यह उनका असली नाम भी माना जाता है।  2. अंजनी पुत्र : हनुमान की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है। 3. केसरीनंदन : हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है। 4. हनुमान : जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। 4. पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ। Hanuman Ji Ke 108 Name उस काल में वायु को मारुत भी कहा जाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया। 6. शंकरसुवन : हनुमाजी को शंकर सुवन अर्थात उनका पुत्र भी माना जाता है क्योंकि वे रुद्रावतार थे। 7. बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंगबली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदर शब्द है। 8. कपिश्रेष्ठ : हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे। 9. वानर यूथपति : हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे।  10. रामदूत : प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत। 11. पंचमुखी हनुमान : पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख।  Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi :मंगलवार को हनुमान जी के इन नामों का करें जप, सभी संकट जल्द होंगे दूर इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। मरियल नामक दानव को मारने के लिए भी यह रूप धरा था। दोहा :  उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥  स्तुति :  हनुमान अंजनी सूत् र्वायु पुत्रो महाबलः। रामेष्टः फाल्गुनसखा पिङ्गाक्षोऽमित विक्रमः॥ उदधिक्रमणश्चैव सीता शोकविनाशनः। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥ एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः। सायंकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥ तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्। यहां पढ़ें हनुमानजी के 12 चमत्कारिक नाम 1. हनुमान हैं (टूटी हनु). 2. अंजनी सूत, (माता अंजनी के पुत्र). 3. वायुपुत्र, (पवनदेव के पुत्र). 4. महाबल, (एक हाथ से पहाड़ उठाने और एक छलांग में समुद्र पार करने वाले महाबली). 5. रामेष्ट (राम जी के प्रिय). 6. फाल्गुनसख (अर्जुन के मित्र). 7. पिंगाक्ष (भूरे नेत्र वाले). 8. अमितविक्रम, ( वीरता की साक्षात मूर्ति)  9. उदधिक्रमण (समुद्र को लांघने वाले). 10. सीताशोकविनाशन (सीताजी के शोक को नाश करने वाले). 11. लक्ष्मणप्राणदाता (लक्ष्मण को संजीवनी बूटी द्वारा जीवित करने वाले). 12.. दशग्रीवदर्पहा (रावण के घमंड को चूर करने वाले). Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi:हनुमान जी के 108 नाम 1.भीमसेन सहायकृते 2. कपीश्वराय 3. महाकायाय 4. कपिसेनानायक 5. कुमार ब्रह्मचारिणे 6. महाबलपराक्रमी 7. रामदूताय 8. वानराय 9. केसरी सुताय 10. शोक निवारणाय 11. अंजनागर्भसंभूताय 12. विभीषणप्रियाय 13. वज्रकायाय 14. रामभक्ताय 15. लंकापुरीविदाहक 16. सुग्रीव सचिवाय 17. पिंगलाक्षाय 18. हरिमर्कटमर्कटाय 19. रामकथालोलाय 20. सीतान्वेणकर्त्ता 21. वज्रनखाय 22. रुद्रवीर्य 23. वायु पुत्र 24. रामभक्त 25. वानरेश्वर 26. ब्रह्मचारी 27. आंजनेय 28. महावीर 29. हनुमत 30. मारुतात्मज 31. तत्वज्ञानप्रदाता 32. सीता मुद्राप्रदाता 33. अशोकवह्रिकक्षेत्रे 34. सर्वमायाविभंजन 35. सर्वबन्धविमोत्र 36. रक्षाविध्वंसकारी 37. परविद्यापरिहारी 38. परमशौर्यविनाशय 39. परमंत्र निराकर्त्रे 40. परयंत्र प्रभेदकाय 41. सर्वग्रह निवासिने 42. सर्वदु:खहराय 43. सर्वलोकचारिणे 44. मनोजवय 45. पारिजातमूलस्थाय 46. सर्वमूत्ररूपवते 47. सर्वतंत्ररूपिणे 48. सर्वयंत्रात्मकाय 49. सर्वरोगहराय 50. प्रभवे 51. सर्वविद्यासम्पत 52. भविष्य चतुरानन 53. रत्नकुण्डल पाहक 54. चंचलद्वाल 55. गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ 56. कारागृहविमोक्त्री 57. सर्वबंधमोचकाय 58. सागरोत्तारकाय 59. प्रज्ञाय 60. प्रतापवते 61. बालार्कसदृशनाय

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Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna:सपने में हनुमान जी को देखना शुभ संकेत है या अशुभ, जानिये क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna:सपने में हर एक भगवान को देखने का अलग अर्थ होता है। वहीं सपने में हनुमान जी मूर्ति देखना शुभ संकेत माना गया है। निद्रावस्था के दौरान मस्तिष्क में होने वाली क्रियाओं को सपना कहते हैं। दरअसल सोते समय व्यक्ति की जो मानसिक स्थिति होती है, उसी से संबंधित चीजों के बारे में सपने आते हैं। कई बार सपनों में हमको भगवान भी दिखते हैं, जो कि शुभ है लेकिन सपने में भगवान किस तरह और क्या करते दिखाई दे रहे हैं, इसका महत्व होता है। आज हम आपको सपने में हनुमानजी के देखने का मतलब बताने जा रहे हैं। शास्त्रों में हनुमानजी को भगवान शिव का रुद्र अवतार बताया गया है। Dream Interpretation हनुमानजी की पूजा अर्चना करने से जीवन के कई बड़े संकट टल जाते हैं और शनि के ढैय्या व साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है। हनुमानजी के आशीर्वाद से कई बिगड़े काम बन जाते हैं और जीवन में मंगल ही मंगल बना रहता है। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna लेकिन क्या आपको पता है कि अगर सपने में हनुमानजी दिखें तो उसका क्या मतलब होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने यूं ही नहीं आते बल्कि हर सपने का कोई ना कोई मतलब जरूर होता है। कुछ सपनों का खास महत्व होता है और वह आने वाली जिंदगी में शुभ व अशुभ घटनाओं के बारे में सूचना देते हैं। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna लेकिन सपने में हनुमानजी दिख जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है लेकिन वह किस रूप में और किस तरह दिखाई दे रहे हैं। यह बहुत मायने रखता है। आइए जानते हैं सपने में हनुमानजी को देखने का क्या है मतलब… सपने में हनुमान जी का गदा देखना:Seeing Hanuman ji’s mace in dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में हनुमान जी का गदा देखना बेहद ही शुभ संकेत माना गया है। इसका मतलब है कि हनुमान जी हमेशा आपके साथ हैं। आप पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़िए आपका कार्य अवश्य पूरा होगा। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna:सपने में लेटे हुए हनुमान जी का दिखाई देना सपने में लेटे हुए हनुमान जी का दिखाई देना भी शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार ऐसा होने पर आपके या आपके परिवार जो भी लंबी बीमारी के पीड़ित है। वह जल्द ही ठीक हो सकता है। सपने में हनुमान जी को मुस्कुराते हुए देखना:Seeing Hanuman ji smiling in dreams सपने में हनुमान जी को मुस्कुराते हुए देखना का मतलब होता है Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna कि जल्द ही आपकी कोई इच्छा पूरी हो सकती है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में बाल हनुमान को देखना का मतलब होता है कि जल्द ही घर में खुशियां आ सकती है। सपने में पंचमुखी हनुमानजी देखना:Seeing Panchmukhi Hanumanji in dream सपने में पंचमुखी हनुमानजी का देखना बहुत शुभ माना जाता है। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna स्वपन शास्त्र के अनुसार, सपने में पंचमुखी हनुमानजी देखने का अर्थ है कि आपकी मनोकामना जल्द ही पूरी होने वाली है और पर्सनल या प्रफेशनल लाइफ में परेशान कर रहे शत्रुओं से मुक्ति भी मिलेगी। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna वहीं सपने में अगर आप हनुमानजी की पूजा या भजन कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपकी सभी मनोकामना पूरी होने वाली हैं। सपने में हनुमानजी का प्रसाद खाना:Eating Hanumanji’s Prasad in dream सपने में अगर आप हनुमानजी का प्रसाद खा रहे हैं तो इसका स्वप्न शास्त्र के अनुसार मतलब है कि हनुमानजी की घर में धन धान्य की कभी कमी नहीं होगी और आपके कार्य बिना अड़चन के पूरे होंगे। वहीं सपने में अगर आप हनुमानजी को चोला चढ़ा रहे हैं तो इसका मतलब है कि भगवान ने आपकी पूजा स्वीकार कर ली है और उनकी कृपा से धन व सम्मान में अच्छी वृद्धि होगी। सपने में हनुमानजी को रौद्र रूप में देखना:Seeing Hanumanji in a fierce form in the dream अगर आप सपने में हनुमानजी को रौद्र रूप यानी गुस्से में देख रहे हैं Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna तो इसका मतलब है कि भगवान आपको मौका दे रहे हैं कि अपनी गलती को सुधारें और क्षमा मांगे। हनुमानजी कभी भी अपने भक्त से नाराज नहीं होते, अगर आप सपने में हनुमानजी का रौद्र रूप देख रहे हैं तो इसका मतलब है Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna कि यह नहीं है कि हनुमानजी आपसे क्रोधित हैं बल्कि वह आपको मौका दे रहे हैं। इसके लिए आप अगले दिन सुबह हनुमान मंदिर में जाएं और भगवान से क्षमा मांगे। साथ ही अपनी गलती भी सुधारें। सपने में बंदर देखना:seeing a monkey in a dream अगर सपने में आपको बंदर दो बार दिखाई दे चुका है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना बहुत शुभ है। इसका अर्थ है कि हनुमानी का आशीर्वाद आप है। Sapne Mai Hanuman Ji Ko Dekhna इस सपने को देखने के बाद अगले दिन से हर रोज बंदर व अन्य जानवरों को कुछ ना कुछ खाने को अवश्य दें ताकि हनुमानजी की कृपा लगातार पर बनी रहे। सपने में हनुमानजी को बाल रूप में देखना:Seeing Hanumanji in child form in dreams सपने में अगर आप बालाजी को देख रहे हैं तो यह बहुत शुभ माना जाता है। बालाजी हनुमानजी का बाल स्वरूप है। इसका अर्थ है कि आपका जीवन नई दिशा की ओर जाने वाला है, जहां आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलेगी और बालाजी की कृपा से भूत प्रेत व नकारात्मक शक्तियां आपसे दूर रहेंगी। सपने में श्रीराम के साथ हनुमानजी:Hanumanji with Shri Ram in dream सपने में अगर आप हनुमानजी को प्रभु श्रीराम के चरणों में देखते हैं कि इसका मतलब बहुत शुभ होता है। इस सपने का अर्थ है कि हनुमानजी की आप पर कृपा रहेगी और जीवन के किसी भी क्षेत्र में आपको तरक्की मिलेगी। वहीं अगर आप सपने में भूत प्रेत देखते हैं और डरते नही हैं तो इसका मतलब है कि हनुमानजी की आप पर कृपा बनी रहेगी।

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Dream Interpretation: सपने में हो जाएं Hanuman Ji हनुमान जी के दर्शन तो ये किस बात का है संकेत, जानकर खुश हो जाएंगे

Dream Interpretation: सपने में हनुमान जी का दिखना क्या असर डालता है आपके जीवन पर, क्या होता है इसका अर्थ. जानें हनुमान जी का सपना खोलेगा आपके भाग्य, सफलता होगी आपके कदमों में यदि स्वप्न में हनुमानजी दिखें तो यह बहुत ही असाधारण स्वप्न है। वह किस रूप में और किस मुद्रा में दिख रहे हैं, इससे आप जान सकते हैं कि सपना आपके लिए कैसा रहेगा।  Dream Interpretation in Hindi: कहते हैं कि सपनों पर किसी का भी नियंत्रण नहीं होता है। अक्सर सोते हुए व्यक्ति कई चीजों को अपने सपनों में देखता है। कई बार हमें अच्छे सपने आते हैं, तो वहीं कई बार ऐसे सपने भी आते हैं जिन्हें देखते ही डर के मारे आंख खुल जाती है। आंख खुलने के बाद कुछ सपने याद रहते हैं, तो कुछ भूल जाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ये सपने यूं ही नहीं आते। हर सपने का कोई न कोई मतलब होता है। ऐसी मान्यता है कि हर सपने का हमारे निकट भविष्य से कोई न कोई संबंध होता है। कुछ सपने शुभ फलदायक होते हैं, तो वहीं कुछ सपने किसी अनहोनी का संकेत देते हैं।  यदि आपको सुबह के समय स्वप्न में भगवान शिव या हनुमानजी के दर्शन का हैं तो ऐसा स्वप्न काफी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसे सपनों का क्या अर्थ है। Dream Interpretation:सपने में हनुमान जी को देखना Sapne mai Hanuman ji ko dekhna Dream Interpretation: मंगलवार का दिन हनुमान पूजा के लिए स्वश्रेष्ठ माना गया है. हनुमान जी को सपने में देखने का क्या अर्थ है, आइये आपको बतातें है अलग-अलग तरह से अगर हनुमान जी आपको सपने में दर्शन देते हैं तो इसका क्या अर्थ होता है. हनुमान जी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीर्घ ही पूर्ण करते हैं. हनुमान जी का हाथ भी सदैव अपने भक्तों के सिर पर रहता हैं.अब आपको बताते हैं सपने में हनुमान जी का दिखना क्या दर्शाता है.  ऐसा माना गया है कि अगर आपको सपने में हनुमानजी का मंदिर दिखे या फिर हनुमान जी की मूर्ति दिखाई दे तो समझ लें कि हनुमान जी की कृपा आप पर बरसने वाली है. इस सपने का अर्थ है जल्द ही आपको बड़ी सफलता मिलेगी. Dream Interpretation अगर आपके कोई कानूनी मामले चल रहें हैं तो आपको उसमें शीर्घ ही सफलता मिलने के आसार हैं. अगर आपको सपने में हनुमान भगनाव का बाल रुप दिखाई देता है तो समझ लें आपके तरक्की के दरवाजे जल्द ही खुलने वाले हैं. आपको अपने वर्कस्पेस या ऑफिस में कोई नया पद संभालने को मिलेगा, जिससे आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी, Dream Interpretation और जल्द ही सफलता हाथ लगेगी. अगर आपको को सपने में दो बंदर दिखाई दें तो समझ लीजिए की हनुमान जी का हाथ आपके सिर पर है. उनकी कृपा -दृष्टि से आपके सभी काम बनेंगे. अगर आपको कभी भी सपने में हनुमान जी की रौद्र रुप दिखाई दे तो समझ लीजिए आपसे कोई बड़ी भूल चूक हुई है. जिससे हनुमान जी आपसे गुस्सा हैं. आपको ऐसा सपना अगर आता है तो तुरंत आपको हनुमान जी से क्षमा मांग लेनी चाहिए. सपने में पंचमुखी हनुमान जी का दिखना, बेहद शुभ माना गया है , ऐसा माना जाता है कि अहर आपको पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन होते हैं तो आपको जल्द ही सफलता मिलने वाली है. आपकी सभी इच्छाएं जल्द ही पूरी होने वाली हैं. यदि आपको स्वप्न में हनुमानजी की प्रतिमा दिखाई देती है तो ऐसा सपना बेहद शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि शीघ्र ही आपको बड़ी सफलता मिलने वाली है। अगर कोई कानूनी मामले हैं तो उसमें भी विजय मिलने की संभावना है। ऐसा सपना व्यक्ति के सौभाग्य का प्रतीक माना जाएगा।  सपने में पंचमुखी हनुमान जी को देखने का अर्थ है कि शीघ्र ही आपके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। Dream Interpretation आप अपने दुश्मनों को हराएंगे और आप पर हनुमान जी के साथ भगवान विष्णु की भी विशेष कृपा रहेगी।  यदि सपने में आपने हनुमान जी रौद्र रूप देखा है तो इसका अर्थ है कि आपसे कोई बड़ी भूल हुई है। यदि आपको ऐसा सपना आता है तो आपने जो भी गलती की है उसे जल्दी सुधार लें।  यदि सपने में Dream Interpretation आप हनुमान hanuman जी का बाल रूप देखते हैं इसका अर्थ है कि शीघ्र ही कार्यक्षेत्र में आपको कोई नया पद या प्रोजेक्ट मिलने वाला है जिसमें आपको सफलता मिलेगी।  यदि सपने आप हनुयामन जी का भजन कर रहे हैं औरउनके समक्ष प्रसाद भी ग्रहण कर रहे हैं तो आपके सभी काम पूरे होने वाले हैं। न सिर भौतिक संसार में बल्कि आध्यात्मिक संसार में भी आपको मान सम्मान की प्राप्ति होगी। 

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Hanuman Ji:मंगलवार को इस उपाय से प्रसन्न होते हैं बजरंगबली, इन मंत्रों का भी जरूर करें जाप

Hanuman Ji:हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन देवी-देवताओं की पूजा के लिए समर्पित होता है. मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है. मान्यता है कि मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. हनुमान जी बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं. इनकी पूजा करने से बल के साथ-साथ बुद्धि भी प्राप्त होती है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं हनुमान जी के कुछ चमत्कारी मंत्र. मंगलावर का दिन काफी खास माना जाता है. इस दिन बजरंग बली की पूजा की जाती है. इस दिन अगर आप कुछ उपाय करते हैं तो जीवन की सभी परेशानियों को दूर हो सकती हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आप मंगलवार को करते हैं तो हनुमान जी Hanuman Ji को प्रसन्न कर आपकी मनोकामना पूरी कर सकते हैं. Mangalwar ke Mantra:मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से कई लाभ मिलते हैं. मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी के कुछ मंत्रों का जाप करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं. आइए एस्ट्रोलॉजर डॉ.रुचिका अरोड़ा से जानते हैं हनुमान जी के कुछ चमत्कारी मंत्रों के बारे में. हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है. भगवान राम के भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करना काफी आसान होता है. इस दिन किए जाने वाले कुछ उपायों से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें मंगलवार के दिन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और हनुमान जी Hanuman Ji सभी मनोकामनाओं को पूरा भी करते हैं. आइए जानते हैं मंगलवार के उपाय-  पीपल के पत्ते- हनुमान जी Hanuman Ji को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंगबली को 11 पीपल के पत्ते अर्पित करें. ऐसा करने से घर में चल रही आर्थिक तंगी दूर होती है. ध्यान रखें कि ये पत्ते खंडित नहीं होने चाहिए.  पीपल के पत्तों की माला- मंगलवार और शनिवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पीपल के 11 पत्ते तोड़ लें. ये पत्ते कहीं से भी कटे और फटे नहीं होने चाहिए. इन पत्तों में कुमकुम और चावल से श्रीराम लिखें और Hanuman Ji हनुमान चालीसा का पाठ करें. इसके बाद इन पत्तों की माला बनाएं और हनुमान जी को अर्पित करें. Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा नारियल का उपाय- मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में नारियल लेकर जाएं. फिर अपने सिर से 7 बार वार कर इसे हनुमान जी के सामने फोड़ दें.  सिंदूर का उपाय- मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं. इस दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें. मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से आर्थिक तंगी दूर होती है  तुलसी का उपाय-  हनुमान जी को तुलसी बेहद प्रिय है इसीलिए हर मंगलवार उनके चरणों में तुलसी के पत्ते पर सिंदूर से श्री राम लिखकर अर्पित करें. इस उपाय से बजरंग बली जरूर प्रसन्न होंगे और सभी दुखों को हर लेंगे.  भोग-  मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को बूंदी के लड्डू का भोग लगाना चाहिए. इससे मनचाही इच्छा हनुमान जी जरुर पूरी करते हैं.  Hanuman Ji मंगलवार के मंत्र Mangalwar ke Mantra ॐ हं हनुमते नम:.’ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ ॐ अंजनिसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो मारुति प्रचोदयात्।

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Hanuman ji:रामायण के बाद हनुमानजी यहां चले गए थे और अब वे इन जगहों पर मिलते हैं…

Hanuman ji :हिंदू शास्त्रों में हनुमान जी को कलयुग का देवता बताया गया है। पौराणिक ग्रथों के अनुसार हनुमान जी को मां सीता से अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था। कई धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस बात का वर्णन मिलता है कि कलयुग में हनुमान जी कहां निवास करेंगे। दरअसल हनुमान जी के निवास स्थान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। बजरंगबली रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं। साथ ही वह आठ चिरंजीवियों में भी शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि रामायण के बाद श्री राम समेत अन्य सभी पृथ्वीलोक से प्रस्थान कर गए थे, लेकिन हनुमान जी को कलयुग की रक्षा का भार सौंपा गया, जिस कारण वह पृथ्वी पर ही रहे। इसलिए उन्हें कलयुग का जागृत देवता भी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि कलयुग में हनुमान जी कहां वास करते हैं। Hanuman ji:चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥ चारों युग में हनुमानजी Hanuman ji के ही परताप से जगत में उजियारा है। हनुमान को छोड़कर और किसी देवी-देवता में चित्त धरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आज भी हनुमानजी हमारे बीच इस धरती पर सशरीर मौजूद हैं।हनुमान इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात हैं। कलियुग में हनुमान Hanuman ji की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम हैं। बहुत से लोग किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर में भटकते रहते हैं, क्योंकि वे हनुमान की भक्ति-शक्ति को नहीं पहचानते। ऐसे भटके हुए लोगों का राम ही भला करे। आजो जानते हैं कि हनुमानजी कहां कहां उपस्थित है। Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा 1. जहां रामकथा वहां हनुमानजी ”यत्र-यत्र रघुनाथ कीर्तन तत्र कृत मस्तकान्जलि। वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तक॥” अर्थात : कलियुग में जहां-जहां भगवान श्रीराम की कथा-कीर्तन इत्यादि होते हैं, वहां हनुमानजी गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं। सीताजी के वचनों के अनुसार- अजर-अमर गुन निधि सुत होऊ।। करहु बहुत रघुनायक छोऊ॥ यदि मनुष्य पूर्ण श्रद्घा और विश्वास से इनका आश्रय ग्रहण कर लें तो फिर तुलसीदासजी की भांति उसे भी हनुमान और राम-दर्शन होने में देर नहीं लगती। 2.चित्रकुट के घाट पर हनुमानजी 6वीं सदी के महान संत कवि तुलसीदासजी को हनुमानजी Hanuman ji की कृपा से ही रामजी के दर्शन प्राप्त हुए। कथा है कि हनुमानजी ने तुलसीदासजी से कहा था कि राम और लक्ष्मण चित्रकूट नियमित आते रहते हैं। मैं वृक्ष पर तोता बनकर बैठा रहूंगा, जब राम और लक्ष्मण आएंगे मैं आपको संकेत दे दूंगा। हनुमानजी की आज्ञा के अनुसार तुलसीदासजी चित्रकूट घाट पर बैठ गए और सभी आने- जाने वालों को चंदन लगाने लगे। राम और लक्ष्मण जब आए तो हनुमानजी गाने लगे ‘चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर। तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।’ हनुमान के यह वचन सुनते ही तुलसीदास प्रभु राम और लक्ष्मण को निहारने लगे।’ इस प्रकार तुलसीदासजी को रामजी के दर्शन हुए। 3.गंधमादन पर्वत पर हनुमानजी Hanuman ji हनुमानजी Hanuman ji कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद भागवत में वर्णन आता है। उल्लेखनीय है कि अपने अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पांडव गंधमादन के पास पहुंचे थे। एक बार भीम सहस्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में पहुंच गए थे, जहां उन्होंने हनुमान को लेटे देखा और फिर हनुमान ने भीम का घमंड चूर कर दिया था। गंधमादन में ऋषि, सिद्ध, चारण, विद्याधर, देवता, गंधर्व, अप्सराएं और किन्नर निवास करते हैं। वे सब यहां निर्भीक विचरण करते हैं। हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में (दक्षिण में केदार पर्वत है) स्थित गंधमादन पर्वत की। यह पर्वत कुबेर के राज्यक्षेत्र में था। सुमेरू पर्वत की चारों दिशाओं में स्थित गजदंत पर्वतों में से एक को उस काल में गंधमादन पर्वत कहा जाता था। आज यह क्षेत्र तिब्बत के इलाके में है। पुराणों के अनुसार जम्बूद्वीप के इलावृत्त खंड और भद्राश्व खंड के बीच में गंधमादन पर्वत कहा गया है, जो अपने सुगंधित वनों के लिए प्रसिद्ध था। 4.श्रीलंका में हनुमान Hanuman ji श्रीलंका के जंगलों में एक आदिवासी समूह से हनुमानजी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते हैं। सेतु के शोधानुसार श्रीलंका के जंगलों में एक ऐसा कबीलाई समूह रहता है जोकि पूर्णत: बाहरी समाज से कटा हुआ है। इसका संबंध मातंग समाज से है जो आज भी अपने मूल रूप में है। उनका रहन-सहन और पहनावा भी अलग है। उनकी भाषा भी प्रचलित भाषा से अलग है। यह समूह पिदुरुथालागाला पर्वत की तलहटी में स्थित एक छोटे से गांव नुवारा में है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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मंगलवार को इस मुहूर्त में करें Hanuman Ji की पूजा-आराधना, पूरी होगी हर मनोकामना

 बजरंगबली (bajrangbali) या यूं कहें हनुमान जी (hanuman ji) का दिन है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते है तो वहीं कई लोग इस दिन बड़े ही भक्ति भाव (hanuman ji bhakt) से हनुमान जी की पूजा भी करते है. लेकिन, अगर आप पूजा भी करना चाहते है तो क्यों ना शुभ मुहूर्त में करें जिससे बजरंगबली प्रसन्न हो जाए. तो चलिए आपको आज के दिन का शुभ मुहूर्त बता देते है. जिसमें पूजा करने से आपको बहुत लाभ होंगे.   हनुमान जी की पूजा का शुभ मुहूर्त (shubh muhurat) या सही समय  वैसे तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा सुबह करें या शाम दोनों ही समय में करना फलदायी माना जाता है. इस दिन आप सूरज के उगने के बाद और शाम को सूरज डूबने के बाद हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं. वैसे तो पूरे दिन में सूरज डूबने के बाद ही पूजा का शुभ मुहूर्त (hanuman ji puja shubh muhurat) होता है.  Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा चलिए, आपको कुछ इसके शुभ मुहूर्त बता देते है-अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तकविजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से 02 बजकर 44 मिनट तकनिशीथ काल- मध्‍यरात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तकगोधूलि बेला- शाम 05 बजकर 19 मिनट से 05 बजकर 43 मिनट तकअमृत काल- शाम 07 बजकर 45 मिनट से 09 बजकर 32 मिनट तकत्रिपुष्कर योग- सुबह 07 बजकर 10 मिनट से दोपहर 02 बजकर 53 मिनट तक अब, शुभ मुहूर्त तो बता दिए इसके साथ ही अशुभ भी बता देते है जिसमें पूजा नहीं करनी चाहिए –  राहुकाल- दोपहर 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तकदुर्मुहूर्त काल- सुबह 09 बजकर 14 मिनट से 09 बजकर 55 मिनट तकदुर्मुहूर्त काल सुबह 09 बजकर 14 मिनट से 09 बजकर 55 मिनट तकभद्रा- अगली सुबह 03 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 10 मिनट तक हनुमान जी की पूजा विधि (hanuman ji puja vidhi)इस दिन सही विधि के साथ हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है. कहते हैं कि हनुमान जी की पूजा जितनी साधारण है उतनी ही मुश्किल भी है. आज के दिन सुबह उठकर नहा-धोकर लाल रंग के कपड़े पहन लें. आप घर या मंदिर कहीं भी पूजा कर सकते हैं. घर में पूजा करने के लिए ईशान कोष को साफ करके वहां पर एक चौकी की स्थापना करें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद उस पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें. इसके साथ ही भगवान श्री राम और माता सीता की मूर्ति रखना न भूलें. इसके बाद बजरंग बली के आगे घी का दीपक जलाएं. दीप, धूप जलाकर सुंदर कांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें. उसके बाद लाल फूल, लाल सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं.  इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी की आरती करें. मंगलवार के दिन भगवान को गुड़, केले और लड्डू का भोग लगाएं और परिवार के सदस्यों को प्रसाद बांटे. अगर आपने मंगलवार का व्रत रखा है तो इस बात का ध्यान रखें कि इसमें शाम के समय एक बार ही खाना खाना होता है. इस दौरान खाने में सिर्फ मीठा भोजन ही शामिल करें. इसके साथ ही दिन में केले, दूध और मीठे फलाहार शामिल किया जा सकता है. 

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Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा

Hanuman Ji: हनुमान जी को भगवान राम के परम भक्त के रूप में जाना जाता है। तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान के कई गुणों का विस्तृत वर्णन किया है। उनके चरित्र के चलते ही गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी को ‘सकल गुण निधानं’ कहा है। कुछ ऐसे संकेत बताए गए हैं जिनके मिलने पर आप यह जान सकते हैं कि आपके ऊपर हनुमान जी की कृपा बनी हुई है। आइए जानते हैं वह कौन-से संकेत हैं। निर्भय होता है जीवन अगर आपके जीवन में किसी प्रकार का डर नहीं है और आप पूरी सच्चाई के साथ अपना जीवन जी रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके ऊपर संकटमोचन हनुमान जी की विशेष कृपा बनी हुई है। क्योंकि जिस भक्त पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं उसका जीवन भयमुक्त बीतता है। Hanuman ji:रामभक्‍त हनुमान को किसने दिया था अमर होने का वरदान? पढ़ें ये पौराणिक कथा काम में नहीं आती कोई बाधा जब व्यक्ति के किसी काम में बाधा न आए। साथ ही उसे हर कार्य में सफलता की प्राप्ति हो रही है तो, यह भी इस बात की ओर संकेत करता है कि हनुमान जी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है। जब हाथ में दिखे मंगल रेखा अगर आपके हाथों में मंगल रेखा साफ दिखाई देने लगे तो इसका अर्थ है कि बजरंगबली आपसे प्रसन्न हैं। ऐसा होने पर कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी। घर के किसी भी सदस्य को किसी प्रकार का रोग या पीड़ा नहीं होगी।   शनि दशा का नहीं होता प्रभाव अगर व्यक्ति पर किसी प्रकार से शनि की साढ़े साती, ढैया या अन्य किसी भी प्रकार की शनि पीड़ा का असर नहीं होता तो समझा जाता है कि उस व्यक्ति पर हनुमान जी की विशेष कृपा बनी हुई है। जगन्नाथ का मंदिर : जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। कहावत है कि महाप्रभु जगन्नाथ में वीर मारुति को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था, परंतु जब-तब हनुमान भी जगन्नाथ-बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शनों का लोभ संवरण नहीं कर पाते थे, सम्प्रति समुद्र भी उनके पीछे नगर में प्रवेश कर जाता। केसरीनंदन की इस आदत से परेशान हो जगन्नाथ महाप्रभु ने हनुमान को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया।

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Hanuman ji:रामभक्‍त हनुमान को किसने दिया था अमर होने का वरदान? पढ़ें ये पौराणिक कथा

Hanuman Ji Puja: हिंदू धर्म में हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त और समर्पण के प्रतीक हैं. हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन श्री राम को समर्पित कर दिया था. हनुमान जी को महावीर, बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनेय समेत कई नामों से पुकारा जाता है. राम भक्त हनुमान की वीरता और साहस की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि कलयुग में अगर धरती पर कोई ईश्वर है, तो वे केवल हनुमान जी है. हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान मिला हुआ है. वाल्मीकि रामायण में हनुमान के अमर होने का वर्णन किया गया है. आइये जानते हैं हनुमान जी को किसने अमर होने का वरदान दिया था. Hanuman ji:हनुमानजी बंदर या वानर थे या किसने दिया हनुमान को अमर होने का वरदान? वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण का वध करने और लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या लौटे, तब उन्होंने युद्ध में साथ देने वाले सभी वीरों को उपहार दिया. विभीषण, अंगद और सुग्रीव समेत कई वीरों को उपहार मिला. इस दौरान हनुमान जी ने भगवान श्री राम से याचना करते हुए कहा कि ‘यावद् रामकथा वीर चरिष्यति महीतले। तावच्छरीरे वत्स्युन्तु प्राणामम न संशय:।। यानि, हे राम! इस लोक पर जब तक राम कथा प्रचलित रहे, तब तक मेरे प्राण शरीर में बसे रहें.

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Hanuman ji:दोपहर में क्यों नहीं करते हनुमान जी की पूजा? क्या है सही समय? यहां जानें सब कुछ

Lord Hanuman Puja: हिंदू धर्म में लगभग सभी देवी देवताओं की पूजा पाठ के लिए समय निश्चित किया गया है. माना जाता है कि सही समय पर पूजा पाठ करने से व्यक्ति को शुभता प्राप्त होती है. हनुमान जी की पूजा का समय भी निश्चित है. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है, कि हनुमान जी की पूजा किस समय करनी चाहिए? जिससे पूजा का शुभ फल प्राप्त हो. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है, कि हनुमान जी की पूजा सुबह अथवा शाम के वक्त ही करनी चाहिए. हिंदू धर्म पुराणों के अनुसार बजरंगबली की पूजा करने से कुंडली में मौजूद निर्बल ग्रह प्रबल होते हैं, और शुभ फल देते हैं. शनि की महादशा और साढ़ेसाती को दूर करने के लिए भी हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी होता है, लेकिन दोपहर के समय हनुमान जी की पूजा कभी भी ना करें, शास्त्रों में इसके पीछे की रोचक कथा बताई जाती है. Hanuman ji :हनुमानजी के 108 नाम, लेकिन जानिए 11 खास नामों का रहस्य प्रातःकाल ऐसे लें हनुमानजी का नाम रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी कहते हैं “प्रात नाम जो लेई हमारा, तेहि दिन ताहि न मिलहि आहारा।” यानी प्रातः काल में जो उनका नाम लेता है उसे दिनभर आहार नहीं मिलता. असल में हनुमान जी वानर रूप धारी हैं, और साथ ही देवता भी हैं, और देवताओं का नाम बिना स्नान और पवित्र हुए बिना नहीं लिया जाना चाहिए. इसलिए हनुमान जी का नाम लेना और पूजन करना है तो प्रातः काल स्नान करके पवित्र होने के बाद ही पवित्र भाव से ही उनका नाम लिया जाना चाहिए. ऐसा करने से कोई दोष नहीं लगता और हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है. हनुमानजी की पूजा का समय और लाभहनुमानजी की पूजा संध्या के समय करना भी शुभ मंगलकारी होता है। ज्योतिषीय उपायों में बताया जाता है कि रात में 8 बजे के बाद घी का दीप जलाकर हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो यह बहुत ही शुभ फलदायी होता है। हनुमान जन्मोत्सव यानी हनुमान जयंती का दिन हो या अन्य दिन शाम के समय हनुमानजी की पूजा करें तो मन में किसी प्रकार का क्लेश और भय नहीं रहता है। प्रतिकूल ग्रह दशाओं से निकला भी व्यक्ति के लिए आसान हो जाता है। इसलिए दोपहर में हनुमानजी की पूजा नहीं होतीहनुमानजी की पूजा के बारे में ऐसी मान्यता है कि दोपहर के समय हनुमानजी की पूजा करने से पूजा का फल नहीं मिलता है। क्योंकि इस समय की गई पूजा को हनुमानजी स्वीकार नहीं करते हैं। इसकी वजह यह है कि हनुमानजी दोपहर के समय भारत में नहीं रहते हैं। इस समय विभीषणजी को दिए वचन के अनुसार हनुमानजी लंका चले जाते हैं। इसलिए इनकी पूजा दोपहर के समय नहीं की जाती है। इसलिए दोपहर की पूजा नहीं स्वीकारते हनुमानजीविभीषणजी हनुमानजी से बड़ा स्नेह रखते थे। इन्होंने हनुमानजी से आग्रह किया, हे हनुमानजी आप हमारे साथ लंका में ही निवास कीजिए। लेकिन राम भक्त हनुमानजी भगवान राम से दूर कैसे रह सकते थे। इसलिए इन्होंने लंका में रहने से मना कर दिया। लेकिन विभीषणजी को एक वचन दे दिया, क्योंकि वह विभीषणजी के स्नेह को भी ठुकराना नहीं चाहते थे। हनुमानजी ने विभीषणजी से कहा कि वह नियमित रूप से दिन में दोपहर के समय लंका आएंगे और फिर वापस चले जाएंगे। शाम के समय हनुमानजी लंका से लौटकर आ जाते हैं। इसलिए शाम के समय हनुमानजी की पूजा फलदायी होती है।

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Hanuman ji :हनुमानजी के 108 नाम, लेकिन जानिए 11 खास नामों का रहस्य

हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। जो जपे हनुमानजी का नाम संकट कटे मिटे सब पीड़ा और पूर्ण हो उसके सारे काम। तो आओ जानते हैं कि हनुमानजी के नामों का रहस्य। 1. मारुति : हनुमानजी का बचपना का यही नाम है। यह उनका असली नाम भी माना जाता है।  2. अंजनी पुत्र : हनुमान की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है। 3. केसरीनंदन : हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है। 4. हनुमान : जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। 5. पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ। उस काल में वायु को मारुत भी कहा जाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया। 6. शंकरसुवन : हनुमाजी को शंकर सुवन अर्थात उनका पुत्र भी माना जाता है क्योंकि वे रुद्रावतार थे। 7. बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंगबली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदर शब्द है। जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे हनुमान जी के ये powerful मंत्र 8. कपिश्रेष्ठ : हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे। 9. वानर यूथपति : हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे। 10.रामदूत : प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत। 11. पंचमुखी हनुमान : पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। मरियल नामक दानव को मारने के लिए भी यह रूप धरा था। यहां पढ़ें हनुमानजी के 12 चमत्कारिक नाम हनुमान जी के 108 नाम 1.भीमसेन सहायकृते 2. कपीश्वराय 3. महाकायाय 4. कपिसेनानायक 5. कुमार ब्रह्मचारिणे 6. महाबलपराक्रमी 7. रामदूताय 8. वानराय 9. केसरी सुताय 10. शोक निवारणाय 11. अंजनागर्भसंभूताय 12. विभीषणप्रियाय 13. वज्रकायाय 14. रामभक्ताय 15. लंकापुरीविदाहक 16. सुग्रीव सचिवाय 17. पिंगलाक्षाय 18. हरिमर्कटमर्कटाय 19. रामकथालोलाय 20. सीतान्वेणकर्त्ता 21. वज्रनखाय 22. रुद्रवीर्य 23. वायु पुत्र 24. रामभक्त 25. वानरेश्वर 26. ब्रह्मचारी 27. आंजनेय 28. महावीर 29. हनुमत 30. मारुतात्मज 31. तत्वज्ञानप्रदाता 32. सीता मुद्राप्रदाता 33. अशोकवह्रिकक्षेत्रे 34. सर्वमायाविभंजन 35. सर्वबन्धविमोत्र 36. रक्षाविध्वंसकारी 37. परविद्यापरिहारी 38. परमशौर्यविनाशय 39. परमंत्र निराकर्त्रे 40. परयंत्र प्रभेदकाय 41. सर्वग्रह निवासिने 42. सर्वदु:खहराय 43. सर्वलोकचारिणे 44. मनोजवय 45. पारिजातमूलस्थाय 46. सर्वमूत्ररूपवते 47. सर्वतंत्ररूपिणे 48. सर्वयंत्रात्मकाय 49. सर्वरोगहराय 50. प्रभवे 51. सर्वविद्यासम्पत 52. भविष्य चतुरानन 53. रत्नकुण्डल पाहक 54. चंचलद्वाल 55. गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ 56. कारागृहविमोक्त्री 57. सर्वबंधमोचकाय 58. सागरोत्तारकाय 59. प्रज्ञाय 60. प्रतापवते 61. बालार्कसदृशनाय 62. दशग्रीवकुलान्तक 63. लक्ष्मण प्राणदाता 64. महाद्युतये 65. चिरंजीवने 66. दैत्यविघातक 67. अक्षहन्त्रे 68. कालनाभाय 69. कांचनाभाय 70. पंचवक्त्राय 71. महातपसी 72. लंकिनीभंजन 73. श्रीमते 74. सिंहिकाप्राणहर्ता 75. लोकपूज्याय 76. धीराय 77. शूराय 78. दैत्यकुलान्तक 79. सुरारर्चित 80. महातेजस 81. रामचूड़ामणिप्रदाय 82. कामरूपिणे 83. मैनाकपूजिताय 84. मार्तण्डमण्डलाय 85. विनितेन्द्रिय 86. रामसुग्रीव सन्धात्रे 87. महारावण मर्दनाय 88. स्फटिकाभाय 89. वागधीक्षाय 90. नवव्याकृतपंडित 91. चतुर्बाहवे 92. दीनबन्धवे 93. महात्मने 94. भक्तवत्सलाय 95.अपराजित 96. शुचये 97. वाग्मिने 98. दृढ़व्रताय 99. कालनेमि प्रमथनाय 100. दान्ताय 101. शान्ताय 102. प्रसनात्मने 103. शतकण्ठमदापहते 104. योगिने 105. अनघ 106. अकाय 107. तत्त्वगम्य 108. लंकारि

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