Shree Ram मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को सनातन संस्कृति का आधार माना जाता है। भगवान श्री राम, विष्णु जी के अवतार हैं। रामचरित मानस के अनुसार, भगवान श्री राम के शासन काल को राम राज्य कहा जाता है। भगवान श्री राम ने अपने जीवन काल में हमेशा एक न्यायप्रिय और प्रजाप्रिय राजा की तरह शासन किया। भगवान श्री राम ने हमेशा “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई।” के आधार पर अपना कर्तव्य निभाया। इसी कारण अपने पिता राजा दशरथ के कहने पर राज धर्म और वचन के पालन के लिए भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास पर भी गए। अपने जीवन काल में भगवान श्री राम ने अपने वचन और धर्म को हमेशा अपने स्वार्थ से ऊपर रखा।

Shree Ram मर्यादा पुरुषोत्तम

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। इसका अर्थ है कि वे मर्यादाओं के सर्वोच्च पुरुष हैं। भगवान श्री राम ने अपने जीवन में हमेशा मर्यादाओं का पालन किया। उन्होंने कभी भी अपने स्वार्थ के लिए मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया।

भगवान श्री राम की मर्यादाओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • उन्होंने अपने पिता के वचन का पालन करने के लिए 14 वर्षों के वनवास को स्वीकार किया।
  • उन्होंने माता सीता के अपहरण के बाद भी अपने शत्रु रावण को युद्ध में पराजित करने के बाद ही मारने की कसम खाई।
  • उन्होंने राजा बनने के बाद भी अपने मित्र सुग्रीव और हनुमान की सेवा की।

भगवान श्री राम के गुण

भगवान श्री राम में अनेक गुणों का समावेश है। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई, आदर्श मित्र और आदर्श राजा थे। उनके कुछ प्रमुख गुण इस प्रकार हैं:

  • धर्म – भगवान श्री राम धर्मपरायण थे। उन्होंने हमेशा धर्म का पालन किया।
  • निष्ठा – भगवान श्री राम अपने वचन और कर्तव्य के प्रति निष्ठावान थे।
  • सहिष्णुता – भगवान श्री राम सहनशील थे। उन्होंने कभी भी क्रोध या घृणा का प्रदर्शन नहीं किया।
  • दयालुता – भगवान श्री राम दयालु थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद करने का प्रयास किया।
  • क्षमाशीलता – भगवान श्री राम क्षमाशील थे। उन्होंने अपने शत्रु रावण को भी क्षमा किया।

भगवान श्री राम का महत्व

भगवान श्री राम का जीवन सभी के लिए एक प्रेरणा है। उनके जीवन से हमें अनेक बातें सीखने को मिलती हैं। भगवान श्री राम हमें बताते हैं कि हमें हमेशा मर्यादाओं का पालन करना चाहिए, धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, अपने वचन और कर्तव्य के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, दूसरों की मदद करनी चाहिए और क्षमाशील होना चाहिए।

अयोध्या नगरी में हुआ श्री राम का जन्म

श्रीराम

भगवान श्री राम

राम चरित मानस और रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्री राम का जन्म त्रेतायुग में अयोध्या नगरी के रघुकुल वंश के राजा दशरथ और उनकी पत्नी कौशल्या के घर में हुआ। राजा दशरथ कई वर्षों तक संतान सुख से वंचित रहे थे। इसके बाद ऋषि मुनियों द्वारा बताए गए उपायों को करने से राजा दशरथ की तीनों रानियों कौशल्या, केकैयी और सुमित्रा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। माता कौशल्या के पुत्र भगवान श्री राम हुए जो श्री हरि के रूप थे। रानी केकैयी भरत की माता बनीं और माता सुमित्रा ने शेषनाग अवतार लक्ष्मण जी और शत्रुघ्न को जन्म दिया। चार पुत्रों की प्राप्ति से राजा दशरथ बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने पूरे अयोध्या नगरी में उत्सव मनाया और सभी अयोध्या वासियों को भी इस उत्सव का सहभागी बनाया।

चंद्रमा को दिए वरदान के कारण कहलाए ‘रामचंद्र’

भगवान श्रीराम का रामचंद्र नाम

भगवान श्री राम के जन्म के समय अयोध्या नगरी में अत्यधिक हर्षोल्लास था। स्वर्ग लोक के देवता भी भगवान विष्णु के धरती पर अवतार लेने से बहुत प्रसन्न थे। वे सभी अयोध्या नगरी में भगवान श्री राम के दर्शन करने के लिए आए थे।

एक दिन भगवान विष्णु और अन्य देवताओं के साथ अयोध्या नगरी में एक उत्सव मनाया जा रहा था। इस उत्सव में भगवान सूर्य देव भी उपस्थित थे। उत्सव की शोभा देखकर भगवान सूर्य देव इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने अस्त होना भूल गए। इससे अयोध्या नगरी में रात नहीं हुई।

रात ने भगवान विष्णु से कहा कि मैं भी आपके राम रूप के दर्शन करना चाहती हूं। तब भगवान विष्णु ने भगवान सूर्य देव से अस्त होने की प्रार्थना की। भगवान सूर्य देव ने भगवान विष्णु की प्रार्थना सुनकर अस्त होना शुरू किया।

जब अयोध्या नगरी में रात हुई तब रात ने भगवान श्री राम से कहा कि सूर्य देव के कारण मुझे देरी से आपके दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भगवान श्री राम ने इस देरी के फलस्वरूप रात को वरदान दिया कि इस जन्म में उनका रंग रात के रंग की तरह ही रहेगा।

इसके बाद चंद्रदेव ने भी भगवान श्री राम से कहा कि सूर्यदेव के कारण मुझे भी आपके दर्शन पाने में देरी हो गई। भगवान श्री राम ने चंद्रदेव को भी यह वरदान दिया कि चंद्रदेव का नाम भगवान राम के नाम के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा। इसी कारण आज भी संसार में भगवान श्री राम को रामचंद्र जी के नाम से जाना जाता है।

रामचंद्र ram नाम का अर्थ

“राम” शब्द का अर्थ “सुख, शांति और आनंद” होता है। “चंद्र” शब्द का अर्थ “चाँद” होता है। अतः, रामचंद्र नाम का अर्थ हुआ “सुख, शांति और आनंद का चंद्रमा”।

भगवान श्रीराम के इस नाम का अर्थ यह है कि वे संसार में सुख, शांति और आनंद के प्रतीक हैं। वे अपने भक्तों को सुख, शांति और आनंद प्रदान करते हैं।

रामचंद्र नाम का महत्व Importance of name Ramchandra

भगवान श्रीराम का रामचंद्र नाम बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह नाम उनके गुणों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। यह नाम उनके भक्तों के लिए आशीर्वाद और प्रेरणा का स्रोत है।

भगवान श्री राम के रामचंद्र नाम का जाप करने से मन को शांति और आनंद प्राप्त होता है। यह नाम भक्तों को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है।

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