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Published October 9, 2023
Updated October 9, 2023

गणेशष्टकम 3 एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान गणेश की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में रचित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान गणेश के एक अलग गुण या विशेषता की स्तुति की गई है।

गणेशष्टकम 3 की रचना जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य आनंदन्तानंद सरस्वती ने की थी। आनंदन्तानंद सरस्वती एक महान भक्त थे, और उन्होंने भगवान गणेश की भक्ति में कई स्तोत्र और भजन लिखे हैं।

गणेशष्टकम 3 का पाठ निम्नलिखित है:

श्रीगणेशाय नमः।

  1. गजवदन गणेश त्वं विभो विश्वमूर्ते! हरसि सकलविघ्नान् विघ्नराज प्रजानाम्।

भावार्थ:

हे गजमुख गणेश, हे विश्वमूर्ते, तुम विघ्नराज प्रजाओं के सभी विघ्नों को हराते हो।

  1. सपदि सकलविघ्नां यान्ति दूरे दयालो तव शुचि रुचिरं स्यान्नामसङ्कीर्तनं चेत्।

भावार्थ:

हे दयालु, तुम्हारे नाम का शुद्ध और सुंदर उच्चारण करने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।

  1. सकलदुरितहन्तुः त स्वर्गमोक्षादिदातुः सुररिपुवधकर्त्तुः सर्वविघ्नप्रहर्त्तुः।

भावार्थ:

तुम समस्त दुष्टता का नाश करने वाले, स्वर्ग और मोक्ष देने वाले, दैत्यों का वध करने वाले, और सभी विघ्नों को दूर करने वाले हो।

  1. तव गणप गुणानां वर्णने नैव शक्ता जगति सकलवन्द्या शारदा सर्वकाले।

भावार्थ:

हे भालदृष्टे, तुम्हारे गुणों का वर्णन करने में जगत की सभी वंदनीय विद्या देवी शारदा भी समर्थ नहीं हैं।

  1. बहुतररमनुजैस्ते दिव्यनाम्नां सहस्रैः।

भावार्थ:

तुम्हारी दिव्य नामों की सहस्त्रों आवृत्तियों से, स्तुति और हवन करके सभी सिद्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। यह विधि सभी तंत्रशास्त्रों में प्रसिद्ध है।

  1. त्वदितरदिह नास्ते सच्चिदानन्दमूर्त्ते इति निगदति शास्त्रं विश्वरूपं त्रिनेत्र।

भावार्थ:

सच्चिदानन्दमूर्ति, त्रिनेत्र, विश्वरूप, तुम्हें छोड़कर इस जगत में और कोई नहीं है। यह शास्त्रों में कहा गया है।

  1. सकलसुखद माया या त्वदीया प्रसिद्धा शशधरधरसूने त्वं तया क्रीडसीह।

भावार्थ:

हे शशधरधरसूने, तुम्हारा प्रसिद्ध माया-रूपी सुखदायक खेल सभी को मोहित करता है।

  1. भव इह पुरतस्ते पात्ररूपेण भर्तः बहुविधनरलीलां त्वां प्रदर्श्याशु याचे।

भावार्थ:

मैं तुम्हारे सामने एक पात्र के रूप में प्रकट हुआ हूं। हे प्रिय, कृपा करके मुझे तुम्हारे अनेक लीलाओं का दर्शन कराओ।

गणेशष्टकम 3 एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों स्तरों पर सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

गणेशष्टकम 3 को पढ़ने या गाने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • स्तोत्र को धीरे-धीरे और ध्यान से पढ़ना या गाना चाहिए।
  • स्तोत्र को पढ़ते या गाते समय, भक्त को भगवान गणेश की छवि या मूर्ति के सामने बैठना चाहिए और उनकी स्तुति करनी चाहिए।

गणेशष्टकम 3

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