वेदांत दशश्लोकी एक संस्कृत श्लोक संग्रह है जो वेदांत के दर्शन को सरल और सुबोध भाषा में प्रस्तुत करता है। यह संग्रह 12वीं शताब्दी के दार्शनिक निम्बार्काचार्य द्वारा रचित है।
वेदांत दशश्लोकी की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
Vedanta Dashashloki
वेदांत दशश्लोकी
अनादिमायापरियुक्तरूपं, त्वेनं विदुर्बुद्धिवैशारदी:। भोक्तारं भोग्यं नियन्तारमपि, ब्रह्मेति विद्धि सर्वम् एव तत्।।
अर्थात्:
सब जीव अनादी काल से माया के आवरण में लिपटे हुए हैं। बुद्धिमान लोग उन्हें ब्रह्म कहते हैं। वे ब्रह्म ही भोक्ता, भोग्य, और नियन्ता हैं।
वेदांत दशश्लोकी वेदांत के दर्शन के मूल सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है। यह संग्रह वेदांत के दर्शन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है।
वेदांत दशश्लोकी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यह संग्रह वेदांत के दर्शन को सरल और सुबोध भाषा में प्रस्तुत करता है।
- यह संग्रह वेदांत के दर्शन के मूल सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझाता है।
- यह संग्रह वेदांत के दर्शन के अभ्यास के लिए एक मार्गदर्शक है।
वेदांत दशश्लोकी वेदांत के दर्शन के अध्ययन और अभ्यास के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह संग्रह सभी हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक आवश्यक पठन है।
KARMASU