श्रीशर्दाशतकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी सरस्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों से बना है, जो सरस्वती की महिमा और शक्ति का वर्णन करते हैं।
श्रीशर्दाशतकम्: 1 में, देवी सरस्वती के स्वरूप का वर्णन किया गया है। इस श्लोक में, देवी सरस्वती को एक सुंदर महिला के रूप में वर्णित किया गया है, जो ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है।
श्रीशर्दाशतकम्: 2 में, देवी सरस्वती की महिमा का वर्णन किया गया है। इस श्लोक में, देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
श्रीशर्दाशतकम्: 2 का पाठ इस प्रकार है:
ओम
**सरस्वती ज्ञानदात्री, विद्यादायिनी, वाणी की अधिष्ठात्री, कला और संगीत की देवी,
तुमने ब्रह्मा को वेद और शास्त्रों का ज्ञान दिया, तुमने शिव को ध्यान और समाधि की शक्ति दी, तुमने विष्णु को सृष्टि का ज्ञान दिया, तुमने सभी देवताओं को ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद दिया।
हे सरस्वती, तुम सभी ज्ञान और कला के स्रोत हो, तुम सभी का मार्गदर्शन करती हो, तुम सभी को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हो, तुम सभी को सफलता और समृद्धि प्रदान करती हो।
हे सरस्वती, हम तुम्हारी शरण में आते हैं, कृपा करके हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करें, हमें सफलता और समृद्धि प्रदान करें, हमें सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं।**
अर्थ:
ओम
हे सरस्वती, तुम ज्ञान प्रदान करने वाली, विद्या प्रदान करने वाली, वाणी की अधिष्ठात्री और कला और संगीत की देवी हो।
तुमने ब्रह्मा को वेद और शास्त्रों का ज्ञान दिया, शिव को ध्यान और समाधि की शक्ति दी, विष्णु को सृष्टि का ज्ञान दिया, और सभी देवताओं को ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद दिया।
हे सरस्वती, तुम सभी ज्ञान और कला के स्रोत हो, तुम सभी का मार्गदर्शन करती हो, तुम सभी को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हो, और सभी को सफलता और समृद्धि प्रदान करती हो।
हे सरस्वती, हम तुम्हारी शरण में आते हैं, कृपा करके हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करें, हमें सफलता और समृद्धि प्रदान करें, और हमें सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं।
श्रीशर्दाशतकम्: 2 में, देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। इस श्लोक में, देवी सरस्वती को यह भी कहा गया है कि उन्होंने ब्रह्मा, शिव और विष्णु को ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद दिया। इस श्लोक में, देवी सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि, सफलता और समृद्धि की भी प्रार्थना की गई है।
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