सनातन धर्म में मीन संक्रांति का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर माह एक संक्रांति तिथि पड़ती है। यानी पूरे साल में 12 महीनों की तरह 12 संक्रांति होती है। मीन संक्रांति भी उन्हीं में से एक है। हर माह में सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही एक नई संक्रान्ति शुरू होती है। जब सूर्यदेव राशियों को बदलते हुए मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मीन संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में मीन संक्रान्ति को बहुत ज्यादा शुभ माना गया है। साथ ही इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदी कैलेंडर के मुताबिक मीन संक्रान्ति फाल्गुन माह में पड़ती है, इसलिए इसे साल की आखिरी संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता हैं। इस बार मीन संक्रान्ति 15 मार्च को पड़ रही है। तो चलिए आज जानते हैं मीन संक्रान्ति का धार्मिक महत्व  और अन्य जानकारियां… 

मीन संक्रान्ति का धार्मिक महत्व

मान्यताओं के अनुसार मीन संक्रान्ति बहुत खास होती है। मीन संक्रान्ति से ही सूर्यदेव की गति उत्तरायण की तरफ बढ़ने लगती है। उत्तरायण के साथ दिन बड़ा और रात छोटी होने लगती है। कहा जाता है कि मीन संक्रान्ति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और पाप कटते हैं। साथ ही सुख समृद्धि आती है। 

मीन संक्रांति का शास्त्रों में खास महत्व बताया गया है। इस दिन को सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही पवित्र और शुभ नहीं माना जाता है, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी उत्तम माना जाता है। मीन संक्रान्ति से उत्तरायण शुरू हो जाता है, जिसे देवताओं का समय कहा गया है। माना जाता है कि इस समय देवता काफी सशक्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि  इस समय रातें छोटी होने के कारण नकारात्मक शक्तियों में भी कमी आ जाती है और दिन में ऊर्जा प्राप्त होती है।

मीन संक्रांति का महत्व

वैसे तो सभी संक्रांतियों का विशेष महत्व होता है लेकिन मीन संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान करने पर विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। इस दिन सुबह जल्दी से उठकर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष में सूर्यदेव को आत्मा और मान-सम्मान का कारक ग्रह माना गया है इसलिए संक्रांति पर गंगा स्नान और सूर्यदेव की पूजा करने पर पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। संक्रांति के दिन में गुप्त शत्रुओं का नाश करने और मन से नकारात्मक ऊर्जा का दूर करने के लिए आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।

इस दिन की जाती है सूर्य की उपासना

मान्यता है कि इस दिन सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसा करने से नकारात्मकाता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन तिल, वस्त्र और अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।

सूर्य की साधना में मंत्रों का जप करने पर मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती है। सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तमाम तरह की बीमारी और जीवन से जुड़े अपयश दूर हो जाते हैं। सूर्य के आशीर्वाद से आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता दिलाने वाले सूर्य मंत्र इस प्रकार हैं – 

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।

ॐ घृणि सूर्याय नमः।।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।।

ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।

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