वट सावित्री व्रत, जिसे सावित्री अमावस्या या वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। छह जून को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीघार्यु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस त्योहार को लेकर ये मान्यता है कि इस व्रत को रखने से परिवार के लोगों को सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में खुशियां आती है। माना जाता है कि इस व्रत का महत्व करवा चौथ के व्रत जितना होता है। इस दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संतापों का नाश करने वाली मानी जाती है।

Shani Jayanti and Vat Savitri Vrat on 6th June: Punya will increase by  taking baths, giving donations fasting, and worshipping in four big  auspicious yogas | शनि जयंती और वट सावित्री व्रत

हर साल ज्येष्ठ महीने की अमावस्या के दिन वट सावित्री का पर्व मनाया जाता है. इस बार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या 6 जून 2024 को पड़ रही है, खास बात ये है कि इस बार 6 जून के दिन ही शनि जयंती भी पड़ रही है. इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार शनि जयंती पर्व और वट सावित्री का पर्व ये दोनों ही एक साथ 6 जून के दिन मनाए जाएंगे. 6 जून के दिन कुछ दुर्लभ संयोग का निर्माण भी हो रहा है. ज्योतिष शास्त के अनुसार, 6 जून को धृति योग और शिव वास योग का निर्माण हो रहा है. इनका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला है. 

व्रत का महत्व:

  • पति की दीर्घायु: यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं।
  • सावित्री और सत्यवान की कथा: इस व्रत के पीछे सावित्री और सत्यवान की प्रेरणादायी कथा है। पौराणिक कथा के अनुसार, सत्यवान नामक एक युवक को मृत्यु का वचन दिया गया था। उसकी मृत्यु के दिन, उसकी पत्नी सावित्री ने यमराज से अपने पति को वापस लाने का आग्रह किया। सावित्री की सती-धर्म और पतिव्रता से यमराज इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सत्यवान को जीवनदान दे दिया।
  • पति-पत्नी के प्रेम और त्याग का प्रतीक: यह व्रत पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है।

व्रत विधि:

  • व्रत की तैयारी: अमावस्या के पूर्व वाले दिन, महिलाएं अपने घरों की सफाई करती हैं और व्रत के लिए आवश्यक सामग्री इकट्ठा करती हैं।
  • पूजन सामग्री: वट वृक्ष, गंगाजल, कलश, फल, फूल, चंदन, रोली, मौली, धूप, दीप, नैवेद्य आदि।
  • पूजन विधि: सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • वट वृक्ष की पूजा: वट वृक्ष को जल से स्नान कराएं, उस पर रोली, चंदन और मौली चढ़ाएं।
  • कथा वाचन: सावित्री और सत्यवान की कथा का वाचन करें।
  • अखंड सौभाग्य की कामना: अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना करें।
  • पारण: सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करें।

व्रत के नियम:

  • व्रत वाले दिन निर्जला या फलाहारी रहना चाहिए।
  • पूरे दिन वट वृक्ष के दर्शन करते रहें।
  • किसी से भी झगड़ा या विवाद न करें।
  • मन में सकारात्मक विचार रखें।

व्रत का महत्व:

वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक महिला के पति के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक भी है। यह व्रत महिलाओं को सशक्त बनाता है और उन्हें जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।

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