अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह एकादशी 2 जून, 2024 को है।

अपरा एकादशी का महत्व

अपरा एकादशी को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अपरा एकादशी की कथा

एक बार भगवान इंद्र ने भगवान विष्णु से पूछा कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत कैसे करें। भगवान विष्णु ने कहा कि इस दिन दशमेश पर्वत पर स्थित भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

भगवान इंद्र ने दशमेश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की पूजा की। भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। भगवान शिव ने कहा कि जो भी इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।

अपरा एकादशी का व्रत

अपरा एकादशी का व्रत रखने के लिए दशमेश पर्वत पर जाकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। यदि दशमेश पर्वत जाना संभव न हो तो घर पर ही भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जा सकती है।

व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।

फिर भगवान विष्णु और भगवान शिव को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करके उनकी पूजा करनी चाहिए।

व्रत के दिन एकादशी तिथि के दौरान अन्न, नमक, मसाले आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

व्रत का पारण द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद करना चाहिए।

अपरा एकादशी के लाभ

अपरा एकादशी का व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  • पापों का नाश होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • धन-दौलत में वृद्धि होती है।
  • रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • ग्रहों के दोष दूर होते हैं।
  • मन शांत होता है।

अपरा एकादशी की पूजा विधि

अपरा एकादशी की पूजा विधि निम्नलिखित है:

  1. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान विष्णु और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. भगवान विष्णु और भगवान शिव को जल, फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें।
  4. धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  5. भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
  6. व्रत कथा का पाठ करें।
  7. दिन भर भगवान का ध्यान करें।
  8. सूर्यास्त के बाद फिर से भगवान की पूजा करें।
  9. दूसरे दिन सूर्योदय के बाद पारण करें।

अपरा एकादशी के पारण की विधि

अपरा एकादशी का पारण निम्नलिखित विधि से करें:

  1. सूर्योदय के बाद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान विष्णु और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. भगवान विष्णु और भगवान शिव को जल, फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें।
  4. धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

य: पुन: पठते रात्रौ गातां नामसहस्रकम् ।
द्वादश्यां पुरतो विष्णोर्वैष्णवानां समापत: ।
स गच्छेत्परम स्थान यत्र नारायण: त्वयम् ।

स्कंद पुराण (Skand Puran) में बताया गया है कि जो मनुष्य एकादशी की तिथि की रात में विष्णु (Lord Vishnu) के सामने, विष्णु भक्तों के पास बैठकर विष्णुसहस्त्रनाम (Vishnu Sahasranamam) का विधि पूर्वक पाठ करता है, वह उस परम धाम को जाता है, जहां स्वयं भगवान विष्णु विराजमान हैं.

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