व्रत में लहसुन-प्याज ना खाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण:

धार्मिक कारण:

  • सात्विक भोजन: हिंदू धर्म में, व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करना शुभ माना जाता है। लहसुन और प्याज को तामसिक भोजन माना जाता है, जो कि मन और शरीर को भारी बनाता है और एकाग्रता में बाधा डालता है। व्रत के दौरान लोग ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करते हैं, इसलिए सात्विक भोजन ग्रहण करना ज़रूरी होता है।
  • रजोगुण और तामसिक गुण: लहसुन और प्याज को रजोगुण और तामसिक गुण वाला माना जाता है। व्रत के दौरान लोग सात्विक गुणों को बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए इन गुणों वाले भोजन से परहेज करते हैं।
  • पवित्रता: लहसुन और प्याज को गर्मी और उत्तेजना बढ़ाने वाला माना जाता है। व्रत के दौरान लोग शरीर और मन को शांत रखना चाहते हैं, इसलिए इनका सेवन नहीं करते।

वैज्ञानिक कारण:

  • पाचन: लहसुन और प्याज में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो पाचन को भारी बना सकते हैं। व्रत के दौरान लोग हल्का भोजन करना चाहते हैं, इसलिए इनका सेवन नहीं करते।
  • गर्मी: लहसुन और प्याज शरीर में गर्मी पैदा कर सकते हैं। व्रत के दौरान लोग ठंडा रहना चाहते हैं, इसलिए इनका सेवन नहीं करते।
  • रक्तचाप: लहसुन में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं। व्रत के दौरान लोग स्वस्थ रहना चाहते हैं, इसलिए इनका सेवन नहीं करते।

तामसिक भोजन के बारे में सनातन परंपरा:

सनातन परंपरा में, भोजन को तीन गुणों में बांटा गया है: सात्विक, राजसिक और तामसिक।

  • सात्विक भोजन: यह भोजन शुद्ध, ताज़ा और पौष्टिक होता है। यह मन और शरीर को शांत रखता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
  • राजसिक भोजन: यह भोजन उत्तेजक, स्वादिष्ट और ऊर्जावान होता है। यह मन को चंचल बना सकता है और असंतोष पैदा कर सकता है।
  • तामसिक भोजन: यह भोजन भारी, नीरस और जड़ होता है। यह मन को सुस्त बना सकता है और अज्ञानता पैदा कर सकता है।

व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करना और तामसिक भोजन से परहेज करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह जानकारी केवल धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। वैज्ञानिक रूप से लहसुन और प्याज के सेवन और व्रत के प्रभावों पर अधिक शोध की आवश्यकता है।

आहारशुद्धौ सत्तवशुद्धि: ध्रुवा स्मृति:. स्मृतिलम्भे सर्वग्रन्थीनां विप्रमोक्ष:॥

इसका अर्थ है- आहार शुद्ध होगा तो व्यक्ति अंदर से शुद्ध होगा और इससे ईश्वर में स्मृति दृढ़ होती है. स्मृति प्राप्त होने से हृदय की अविद्या जनित हर एक गांठ खुल जाती है. सात्विक भोजन करने से व्यक्ति का मन शांत होने के साथ विचार शुद्ध होते हैं.

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